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25 साल की सेवा के बाद आईएएस बन पाता है केंद्र में ज्वॉइंट सेक्रेटरी, लेटरल एंट्री से अधिकारियों में निराशा

केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक सुधार के तहत चुनिंदा विभागों में दस ज्वॉइंट सेक्रेटरी के पदों पर निजी सेक्टर के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 12, 2018, 03:30 AM IST

केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक सुधार के तहत चुनिंदा विभागों में दस ज्वॉइंट सेक्रेटरी के पदों पर निजी सेक्टर के सीनियर अधिकारियों की लेटरल एंट्री की शुरुआत करने से आईएएस लॉबी में निराशा देखी जा रही है। इस नए भर्ती सिस्टम के साथ ही एक बार फिर ब्यूरोक्रेसी में सामान्य विरुद्ध विशेषज्ञ अधिकारी के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। केंद्र ने इस लेटरल एंट्री के लिए यही तर्क दिया है कि इससे निजी सेक्टर की विशेषज्ञता ब्यूरोक्रेसी में आती है, वहीं हमेशा से आईएएस लॉबी का तर्क रहा है कि काम के लिए प्रशासनिक क्षमता जरूरी होती है न कि किसी विषय का ज्ञान। इस लेटरल एंट्री के संदर्भ में करीब एक से डेढ़ साल पहले से ही केंद्र की तैयारी हो रही थी और इसे लेकर मप्र सहित सभी राज्यों से सुझाव भी मांगे गए थे, हालांकि अधिकांश राज्य इसे लाने पर एकमत नहीं थे। आईएएस लॉबी अधिकारी इसलिए भी निराश है, क्योंकि मप्र में काम करने वाला एक आईएएस 25 साल की सेवा के बाद केंद्र में ज्वाइंट सेक्रेट्री के पात्र हो पाता है।

ज्वॉइंट सेक्रेटरी होने के यह हैं मायने

मप्र में मुख्य सचिव रैंक का अधिकारी केंद्र में सचिव पद पर और एसीएस स्तर का अफसर एडीशनल सचिव के पद पर जाता है। उल्लेखनीय है कि मुख्य सचिव प्रदेश में सबसे बड़ा प्रशासनिक पद है। वहीं प्रमुख सचिव स्तर का व्यक्ति (यह दर्जा आईएएस सेवा के करीब 25 साल बाद मिलता है) ही केंद्र में ज्वॉइंट सेक्रेटरी स्तर पर जाता है। वहीं प्रदेश में सचिव स्तर का अधिकारी केंद्र में डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर रैंक पर जाता है। इस हिसाब से ज्वॉइंट सेक्रेटरी स्तर का पद काफी अहम हो जाता है।

मप्र में दो विभागों में लागू किया था

जानकारों ने बताया कि मप्र में मप्र वेंचर कैपिटल फंड और एमपीईडीसी विभाग में यह सिस्टम लागू किया था और यहां निजी सेक्टर के सीईओ, पदाधिकारी को लाया गया था, लेकिन यह सिस्टम फेल हो गया। वेंचर कैपिटल फंड के सीईओ ने तो कहा था कि सरकारी सिस्टम से सहयोग नहीं मिला। वहीं जानकारों का यह भी कहना है कि ज्वॉइंट सेक्रेटरी भले ही निजी सेक्टर से आए, लेकिन उनके नीचे और ऊपर के अधिकारी तो ब्यूरोक्रेसी सिस्टम के ही हैं। एेसे में वह किस तरह काम कर सकेंगे, यह चुनौती होगी।

प्रदेश से हर साल 10-11 आईएएस जाते हैं केंद्र में

केंद्र में हर साल 10 से 11 अधिकारी केंद्र में जाते हैं। इसके लिए केंद्र की समिति इन सभी आईएएस की पूरी सीआर, अनुशासन और काम का रिकॉर्ड चेक करती है। इसके बाद ही इन्हें बुलाया जाता है। सामान्य तौर पर यह तीन से पांच साल वहां काम करते हैं। अभी अनुराग जैन, अजय तिर्की, अलका श्रीवास्तव, अलका उपाध्याय, आशीष उपाध्याय, जयदीप गोविंद सहित कई सीनियर आईएएस केंद्र में कार्यरत हैं।

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