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स्पीड राडार से 3 महीने में एक भी चालान नहीं बना

डीपीएस हादसे के बाद तेज रफ्तार गाड़ियों पर कार्रवाई के लिए मैदान में लाया गया स्पीड राडार फिर सड़क से गायब हो गया है।...

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 03:30 AM IST
डीपीएस हादसे के बाद तेज रफ्तार गाड़ियों पर कार्रवाई के लिए मैदान में लाया गया स्पीड राडार फिर सड़क से गायब हो गया है। उसे भारी दबाव के बाद पुलिस ने संदूक से निकाला था, लेकिन लगता है कि वह फिर वहीं चला गया। तीन महीने से ट्रैफिक पुलिस ने तेज गति से चलने वाले एक भी वाहन का चालान नहीं बनाया है।

जनवरी में डीपीएस की तेज रफ्तार बस के बेकाबू होने के बाद हुई मासूम बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने तेज रफ्तार वाहनों और बसों पर कार्रवाई का ऐलान किया था। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और पुलिस के साथ प्रशासन की टीम ने स्कूल-कॉलेजों में जाकर बसों की जांच पड़ताल की और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई भी शुरू की। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि अब स्पीड राडार से पुलिस ने चालान बनाना बंद कर िदया है। ट्रैफिक पुलिस का सारा फोकस सिर्फ हेलमेट की कार्रवाई पर ही रह गया है। पुलिस ने तेज रफ्तार वाहनों को ढील दे दी है, जबकि कुछ स्कूल 15 से तो बाकी 20 जून से शुरू हो रहे हैं। सिर्फ स्कूल बस ही नहीं, उपनगरीय बसों के खिलाफ शुरू की गई मुहिम भी पूरी तरह ठप है।

तेज गति की कार्रवाई

माह कार्रवाई

जनवरी 83

फरवरी 113

मार्च 0

अप्रैल 0

मई 0

कुल 196

लाखों के उपकरण खरीदे, पुराने खा रहे धूल

कुछ महीने पहले आए डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला ने ट्रैफिक पुलिस को नए संसाधन खरीदने के लिए राशि देने की घोषणा की थी। इसके बाद पुलिस ने प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेज दिया और नए लॉक, स्टॉपर भी बुलवा लिए, लेकिन कई पुराने उपकरणों का इस्तेमाल ही नहीं हो पा रहा है।

विशेष संवाददाता | इंदौर

डीपीएस हादसे के बाद तेज रफ्तार गाड़ियों पर कार्रवाई के लिए मैदान में लाया गया स्पीड राडार फिर सड़क से गायब हो गया है। उसे भारी दबाव के बाद पुलिस ने संदूक से निकाला था, लेकिन लगता है कि वह फिर वहीं चला गया। तीन महीने से ट्रैफिक पुलिस ने तेज गति से चलने वाले एक भी वाहन का चालान नहीं बनाया है।

जनवरी में डीपीएस की तेज रफ्तार बस के बेकाबू होने के बाद हुई मासूम बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने तेज रफ्तार वाहनों और बसों पर कार्रवाई का ऐलान किया था। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और पुलिस के साथ प्रशासन की टीम ने स्कूल-कॉलेजों में जाकर बसों की जांच पड़ताल की और तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई भी शुरू की। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि अब स्पीड राडार से पुलिस ने चालान बनाना बंद कर िदया है। ट्रैफिक पुलिस का सारा फोकस सिर्फ हेलमेट की कार्रवाई पर ही रह गया है। पुलिस ने तेज रफ्तार वाहनों को ढील दे दी है, जबकि कुछ स्कूल 15 से तो बाकी 20 जून से शुरू हो रहे हैं। सिर्फ स्कूल बस ही नहीं, उपनगरीय बसों के खिलाफ शुरू की गई मुहिम भी पूरी तरह ठप है।

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