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महंगा डीजल और खनन पर रोक का डर, रेत 45 से बढ़कर 70 हजार रुपए ट्रक

खुद के घर का सपना पूरा करना अब और भी मुश्किल हो गया है। पहले गिट्टी और अब रेत के भावों में करीब डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 15, 2018, 03:30 AM IST

महंगा डीजल और खनन पर रोक का डर, रेत 45 से बढ़कर 70 हजार रुपए ट्रक
खुद के घर का सपना पूरा करना अब और भी मुश्किल हो गया है। पहले गिट्टी और अब रेत के भावों में करीब डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हो गई है। आज से 15 दिन पहले रेत का जो ट्रक 45 हजार रुपए में आ रहा था, वह अब 70 हजार रुपए पर पहुंच गया है। रेत के साथ सीमेंट और सरिए के दाम भी बढ़ गए हैं।

रेत के भाव में अचानक यह वृद्धि बारिश के मौसम में खनन पर लगने वाले संभावित प्रतिबंध के कारण हुई है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के निर्देशों के मद्देनजर सरकार बारिश के दौरान नदियों से रेत निकालने पर पाबंदी लगा देती है। चार महीने की इस रोक के कारण रेत के सप्लाय पर विपरीत असर पड़ता है। इसका फायदा उठाने की नीयत से कुछ लोगों ने रेत का संग्रहण शुरू कर दिया है, इससे एकाएक कृत्रिम संकट पैदा हो गया है। रेत व्यापारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि मांग और आपूर्ति में भारी अंतर आने से रेत के भाव बढ़े हैं।

सरिया 5200, सीमेंट 305 रुपए बोरी

इधर, सरिए का भाव भी बढ़ गया है। व्यापारियों ने बताया कि सरिया पहले 4950 रुपए क्विंटल मिल रहा था, वह भी 5200 रुपए क्विंटल पर पहुंच गया है। सीमेंट पर भी बढ़ोतरी का असर पड़ा है। स्टैंडर्ड क्वालिटी और ब्रांड की सीमेंट हफ्तेभर पहले 300 रुपए में मिल रही थी, वह 305 और 307 रुपए हो गई है। गिट्टी के भाव व्यापारियों ने 10 जून को ही बढ़ाए हैं। वह भी 65 रुपए क्यूबिक मीटर से 75 रुपए क्यूबिक मीटर हो गई। इससे 10 क्यूबिक मीटर का डंपर जो 6500 रुपए में मिल रहा था, वह 7500 रुपए का हो गया है।

गाड़ी वालों ने भी बढ़ाया भाड़ा

निर्माण मटेरियल की कीमतें बढ़ने की एक वजह डीजल भी है। डेढ़ महीने में पेट्रोल-डीजल के दाम तेजी से बढ़े हैं। मटेरियल का परिवहन पूरी तरह ट्रक, डंपर और छोटे लोडिंग वाहनों पर निर्भर है, इसलिए पहले उनका भाड़ा बढ़ा, फिर मटेरियल की कीमतें।

1500 वर्गफीट निर्माण पड़ेगा 18 लाख रुपए में

अब मकान बनाना 9 फीसदी महंगा

सीमेंट लगती है 900 बोरी

पहले कुल खर्च 2,70,000

अब होगा खर्च 2,74,500

फर्क आया 4500

गिट्टी लगती है 03 डंपर

पहले कुल खर्च 19,500

अब होगा खर्च 22,500

फर्क आया 3000

रेत लगती है 03 डंपर या हाईवा

पहले कुल खर्च 1,35,000

अब होगा खर्च 2,10,000

फर्क आया 75000

सरिया लगता है 05 टन

पहले कुल खर्च 2,45,000

अब होगा खर्च 2,60,000

फर्क आया 15000

(बिल्डर राजकुमार तिवारी और देवेंद्र शर्मा के मुताबिक)

िववाद का डर :मकान बनाने का करार पहले तो अब कीमत ज्यादा क्यों दें?

बिल्डरों के मुताबिक अचानक दाम बढ़ने का असर उन प्रोजेक्ट पर ज्यादा पड़ेगा, जो दो-तीन महीने पहले से चल रहे हैं। उनमें अगर किसी ने पुराने रेट के आधार पर लागत तय की है तो अब वह करीब पौने दो गुना तक बढ़ जाएगी। ऐसे में निर्माण करवाने वाले और ठेकेदारों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी।

बिल्डिंग मटेरियल की कीमतों में वृद्धि का असर आम आदमी पर पड़ेगा। 1000 वर्गफीट के प्लॉट पर करीब 1500 वर्गफीट निर्माण होता है। हफ्तेभर पहले इस मकान की लागत 16 लाख 50 हजार रुपए के आसपास पड़ रही थी, वह अब 18 लाख से कम नहीं होगी, क्योंकि पहले ऐसा मकान 1100 रुपए वर्गफीट में बन रहा था, वह औसत 1200 रुपए वर्गफीट के करीब पहुंच गया है।

इस भाव पर मिल रही अब रेत

वाहन माल फीट में पहले भाव अब

ट्रक 1000 45000 70000

लोडिंग रिक्शा 16 1000 1500

ट्रैक्टर ट्रॉली 80 4500 5500

(सभी भाव रेत व्यापारी एसो. के मुताबिक। पुराने भाव 1 जून के और नए 13 जून के)

स्टॉक न हो :प्रतिबंध का असर दिख रहा

रेत व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन शर्मा और सचिव मनीष अजमेरा ने बताया कि बािरश के दौरान चार महीने रेत खनन पर प्रतिबंध की आशंका और डीजल के दाम में लगातार बढ़ोतरी के कारण रेत के भाव बढ़े हैं। अभी सप्लाय में इतनी परेशानी नहीं है, पर संग्रहण पर रोक लगना चाहिए। रेत के साथ बाकी मटेरियल जैसे सरिया, सीमेंट के भावों में भी तेजी आई है।

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Web Title: महंगा डीजल और खनन पर रोक का डर, रेत 45 से बढ़कर 70 हजार रुपए ट्रक
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