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असहाय और जरूरतमंदों की सेवा करना भी प्रभु भक्ति के समान : अनिरुद्धाचार्य

मित्रता बहुत गहरा शब्द है। यह केवल शब्द नहीं भावनाओं का समंदर है। जहां प्रेम होता है, वहीं भक्ति होती है। भक्ति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 15, 2018, 03:30 AM IST

असहाय और जरूरतमंदों की सेवा करना भी प्रभु भक्ति के समान : अनिरुद्धाचार्य
मित्रता बहुत गहरा शब्द है। यह केवल शब्द नहीं भावनाओं का समंदर है। जहां प्रेम होता है, वहीं भक्ति होती है। भक्ति जीवन में निर्भयता लाती है। भक्त बनना आसान है पर उसकी निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण काम है। माया का पर्दा जब-तब व्यक्ति को अपनी मंजिल से विमुख करता रहता है। इस स्थिति में गीता, भागवत, रामायण जैसे ग्रंथ प्रकाश स्तंभ की भूमिका निभाते हैं। हम परमार्थ के जितने अधिक कार्य करेंगे, प्रभु उतने प्रसन्न रहेंगे। असहाय, जरूरतमंदों की सेवा करना भी प्रभु भक्ति के समान है।

यह बात भागवताचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने गुरुवार शाम पलसीकर चौराहा स्थित मां शारदा मंदिर पर चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ में कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग व समापन अवसर पर कही। व्यासपीठ का पूजन पार्षद सीमा वीरांग, महिला मोर्चा की अध्यक्ष वर्षा मूलचंदानी, कैलाश वीरांग आदि ने किया। समापन पर शोभा यात्रा भी निकाली गई।

मां शारदा मंदिर में भागवत कथा में आखिरी दिन सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए।

मदनमोहन मंदिर में लगाया 56 भोग, किया शृंगार

गोराकुंड, एमजी रोड स्थित पुष्टिमार्गीय मदनमोहन मंदिर व हवेली में पुरुषोत्तम मास में ठाकुरजी की लीलाओं से जुड़े विभिन्न मनोरथ मनाए गए। अनुराग मुखिया एवं आलोक शर्मा ने बताया समापन पर ठाकुरजी को छप्पन भोग लगाया गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने ठाकुरजी के दर्शन किए। भक्त मंडल के राजेश जोशी भी मौजूद थे।

भागवत पारायण की पूर्णाहुति

बड़ा गणपति पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ पर पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में महंत रामचरणदास महाराज के सान्निध्य में चल रहे भागवत पारायण अनुष्ठान में शामिल विद्वानों व मुख्य आचार्य पं. नारायणदत्त शास्त्री का सम्मान किया गया। इसके पूर्व मठ परिसर में विद्वानों व यजमान परिवारों ने कलशयात्रा भी निकाली। इसमें बड़ी संख्या में मंगल कलशधारी महिलाएं भी शामिल हुईं। मठ के पं. पवन शर्मा ने बताया महामंडलेश्वर राधे-राधे बाबा, महामंडलेश्वर गोपालदास, महंत विजयराम दास सहित संत-विद्वानों के सान्निध्य में यज्ञ-हवन के साथ अनुष्ठान का समापन हुआ।

भागवताचार्य का सम्मान

इस अवसर पर जूना अखाड़ा के संत आनंदगिरि महाराज के सान्निध्य में कथा संयोजक गोपीकृष्ण नेमा, चंद्रकांता वर्मा, पूर्व पार्षद शिव वर्मा व आयोजन समिति की ओर से अनिरुद्धाचार्य का सम्मान भी किया गया।

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