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मैंने मीरा के गीतों में नृत्य की असीम संभावनाएं खोजीं

मुंबई की कथक नृत्यांगना डॉ. टीना ताम्बे का कहना है कि मैंने मीरा के गीतों में नृत्य की असीम संभावनाओं को खोजने की...

Danik Bhaskar | Jun 12, 2018, 03:35 AM IST
मुंबई की कथक नृत्यांगना डॉ. टीना ताम्बे का कहना है कि मैंने मीरा के गीतों में नृत्य की असीम संभावनाओं को खोजने की कोशिश की है। मीरा के काव्य तत्वों में नृत्य के कई सुंदर तत्व दिखाई देते हैं। हमारी संस्कृति में जिस अष्टनायिका की कल्पना की गई है वह मीरा का काव्य तत्व में देखी जा सकती है। मैंने इन्हीं नायिकाओं को अभिनय अंग से साकार करने की कोशिश की है। यह बात उन्होंने शनिवार को सिटी भास्कर से बातचीत में कही। वे मुंबई से निजी प्रवास पर इंदौर आई हैं।

विदेशों में प्रस्तुतियां दे चुकीं मुंबई की कथक नृत्यांगना डॉ. टीना ताम्बे ने बताया वे कैसे प्रयोग कर रही हैं कथक में

मीरा काव्य नायिका के विरह को अभिव्यक्त करता है

वे कहती हैं कि मीरा के काव्य तत्व में प्रोषितनायिका देखी जा सकती है जो अपने नायक के बिछोह में है। मीरा काव्य तत्व इसी नायिका के विरह को अभिव्यक्त करते हैं। इसी तरह मीरा के काव्य में होली का वर्णन मिलता है : होली खेलत गिरधारी, चंदन केसर छिड़कत मोहन। इसमें नृत्य की खूबूसरत संभावना को खोजकर कथक किया जा सकता है। मीरा के एक भजन में तो द्रौपदी चीर हरण का वर्णन मिलता है जिसे नृत्य में चरितार्थ किया जा सकता है। इस तरह मैंने मीरा का काव्य में इन नृत्यों को खोजा और किया।

डॉ. टीना ताम्बे

वे बताती हैं कि मैंने इंदौर में सुचित्रा हरमलकर और रंजना ठाकुर से कथक सीखा और फिर 2001 में मुंबई में रहकर गुरु उमा डोगरा से तालीम हासिल की। मैं श्रीलंका, मलेशिया और ग्रीस में कथक की प्रस्तुतियां देकर आई हूं। मैं भी यह मानती हूं कि यह सही है कि भारतीय शास्त्रीय नृत्यों में कथक में प्रयोगधर्मिता की अनेक संभावनाएं हैं लेकिन मैं पारंपरिक कथक ही करना पसंद करती हूं। इसके बावजूद मैंने अपने नृत्यों के जरिए अपनी ही दृष्टि से कुछ नया करने की कोशिश की है। मिसाल के लिए मैंने द्वैत से अद्वैत नृत्य कल्पित किया जिसमें यह बताने की कोशिश की व्यक्ति अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग व्यवहार करता है। मैं इसके जरिए व्यक्ति की डुएलिटी को अभिव्यक्त करना चाहती थी।

द्वैत से अद्वैत का प्रयोग