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सुसाइड नोट में विनायक को उत्तराधिकारी बताया, पर ट्रस्टियों का मानना- फिलहाल ऐसा कुछ नहीं

भय्यू महाराज की मौत के बाद श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट को कौन संचालित करेगा, सबसे बड़ा सवाल...

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 03:35 AM IST
सुसाइड नोट में विनायक को उत्तराधिकारी बताया, पर ट्रस्टियों का मानना- फिलहाल ऐसा कुछ नहीं
भय्यू महाराज की मौत के बाद श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट को कौन संचालित करेगा, सबसे बड़ा सवाल यही है। इसका जवाब 15 दिन बाद मिलेगा, जब ट्रस्ट की बैठक होगी। महाराज ने सुसाइड नोट में भले ही विनायक को उत्तराधिकारी बताया हो, लेकिन ट्रस्टियों का मानना है कि अभी ऐसा कुछ नहीं है। ट्रस्ट के ज्यादातर काम जनसहयोग से होते थे, जिसमें महाराज के आह्वान पर लोग तन, मन, धन से सहयोग करते थे। ट्रस्टियों का मानना है कि प्रकल्प चलाने में फंड की समस्या आएगी। इसकी व्यवस्था कैसे होगी, यह बैठक में मुख्य मुद्दा होगा।

150 जगह स्मृति स्वरूप होगा निर्माण

भय्यू महाराज की दो समाधि और एक छत्री बनाई जाएगी। एक समाधि महाराष्ट्र स्थित खामगांव और दूसरी इंदौर स्थित आश्रम में जहां गादी है वहां बनेगी। चूंकि महाराज जमींदार ताल्लुक रखते थे, इसलिए छत्री शुजालपुर में बनाई जाएगी। यही उनके परिवार की परंपरा है। ट्रस्टी संजय यादव के अनुसार, तीनों जगह जल्द ही विधि-विधान से काम शुरू कर दिया जाएगा। महाराष्ट्र के ऐसे 150 स्थान, जहां उनके प्रकल्प चलते थे वहां भी स्मृति स्वरूप निर्माण किया जाएगा।

2002 में महाराष्ट्र में लिया था लाइसेंस

भय्यू महाराज ने जिस रिवाॅल्वर से आत्महत्या की, उसका लाइसेंस नहीं होने की बात सामने आई थी। डीआईजी ने बताया कि जांच में पता चला कि महाराज ने 2002 में वाशिम (महाराष्ट्र) में रिवाॅल्वर का लाइसेंस बनवाया था। इसे 2012 में बुलढाणा में ट्रांसफर करवाया था। वहां इस जानकारी की तस्दीक की गई, जो सही निकली। वहीं महाराज ने खुद को गोली बेटी के कमरे में मारी थी। इसलिए पुलिस वे वहां सुसाइड नोट की तलाश की। उनके बिस्तर के पास टेबल में रखी डायरियां खंगालीं। एक डायरी मिली, जिसके दो पेज पर सुसाइड नोट था। बाकी पेज खाली थे।

आत्महत्या से गलत संदेश जाएगा : कम्प्यूटर बाबा

राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कम्प्यूटर बाबा ने नीमच में कहा कि भय्यू महाराज के परिवार में तनाव था। शायद इसलिए ही उन्होंने यह कदम उठाया। वे ज्ञान का संदेश देते थे। उनके लाखों अनुयायी थे। उनकी आत्महत्या से समाज में गलत संदेश जाएगा। गौरतलब है प्रदेश सरकार ने कम्प्यूटर बाबा के साथ ही भय्यू महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। हालांकि भय्यू महाराज ने सरकार का यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।

एक ही बंगले में रह रहीं बेटी और प|ी, पर एक-दूसरे का मुंह तक नहीं देख रहीं

वसीयत की तरह लिखी दो लाइन से सेवादार विनायक को नहीं मिलेगा संपत्ति का मालिकाना हक

भय्यू महाराज के सुसाइड नोट के दूसरे पन्ने में लिखा है कि- मैं अपनी सभी वित्तीय, प्रॉपर्टी और बैंक खाते संबंधी साइनिंग अथॉरिटी विनायक को सौंपता हूं, क्योंकि मुझे उस पर पूरा विश्वास है। वसीयत की तरह लिखी गई इन दो लाइनों से यह माना जा रहा है कि महाराज की संपत्ति का पूरा मालिकाना हक विनायक का होगा। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के वकील और मुंबई के चैंबर ऑफ टैक्स कंसल्टेंट के प्रेसीडेंट अजय सिंह का कहना है कि इन लाइनों से साफ है कि महाराज की मंशा विनायक को केवल एक्जीक्यूटर बनाने की है। उन्होंंने कहीं भी मालिकाना हक वाली बात नहीं लिखी है और केवल साइनिंग अथॉरिटी बनाया है। यानी, विनायक का जिम्मा होगा कि वह संपत्ति के संबंध में कानूनी प्रक्रिया करके महाराज के जो भी वैधानिक वारिस हैं, उन्हें इनका दायित्व सौंपे। सिंह ने कहा कि विभिन्न कानूनी वाद में यह बात तय होती है कि मालिकाना हक के लिए स्पष्ट शब्दों में वसीयत होती है और विशेष परिस्थितियों को छोड़कर जो मूल वारिस है, उनका हक नहीं जाता है। वरिष्ठ पंजीयक वकील पं. देवीप्रसाद शर्मा का कहना है कि डायरी में लिखी लाइनों को वसीयत का दर्जा नहीं मिलता है। वसीयत भले ही रजिस्टर्ड नहीं हो, लेकिन यह व्यवस्थित तरीके से लिखी गई होना चाहिए। इसमें ऐसा नहीं है और इसमें संपत्ति को हैंडल किस तरह किया जाए, केवल इसकी प्रक्रिया की बात कही गई है। इसकी कोई वैधानिकता नहीं है।

भय्यू महाराज की शोकसभा। मंच पर एक-दूसरे से तीन फीट की दूरी पर बैठी महाराज की बेटी कुहू और प|ी डॉ. आयुषी। एक घंटे चली शोकसभा में इतने करीब बैठने के बाद भी दोनों ने एक-दूसरे को नहीं देखा। तल्खी जस की तस बनी हुई है। शोकसभा शुरू हुई तो दोनों अलग-अलग कार से आईं और मंच के पास दूरी बनाए खड़ी रहीं। कुहू को विनायक तो आयुषी को कांग्रेस नेत्री शोभा ओझा ने पास बैठाया। शोकसभा खत्म हुई तो आयुषी एक झटके में उठकर अपने दोस्तों के साथ रवाना हो गईं। वे मीडिया में कुछ बोलना चाहती थीं। एक पल रुककर मुड़ना चाह रही थीं, लेकिन फिर कार में बैठकर चली गईं।

नक्षत्र ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार शाम 5 बजे शोकसभा शुरू हुई। आयुषी को सहारा देकर मंच पर चढ़ाया। वे पूरे समय गुमसुम रहीं। शून्य को ताकती रहीं। महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित कर लोग आयुषी के सामने आकर हाथ जोड़ते लेकिन आयुषी का ध्यान ही नहीं रहता। जब कोई पास जाकर आयुषी को नमस्कार करता तो उसका ध्यान टूटता और वह नमस्कार करती। कुहू ने पूरे समय हाथ जोड़कर संवेदना प्रकट करने वालों का आभार माना। उसके हाथ जोड़ने के तरीके को देखकर लोग कहते वह बिलकुल महाराज की तरह प्रणाम करती है। इस दौरान कैबिनेट मंत्री लालसिंह आर्य, भाजपा नगराध्यक्ष कैलाश शर्मा, भाजयुमो अध्यक्ष मनस्वी पाटीदार, आशा विजयवर्गीय, कृपाशंकर शुक्ला, अरविंद बागड़ी, मुन्नालाल यादव, गोलू शुक्ला।

4 माह की बेटी ने नवाया तस्वीर के सामने शीश| महाराज व आयुषी की चार महीने की बेटी भी मंच पर किसी की गोद में थी। मासूम की आवाज हॉल में गूंजती रही। कभी वह हंसती तो कभी किसी चीज को देखकर चिल्लाती। बार-बार वह नन्हे हाथों से मां को छूने की कोशिश भी करती। परिजन ने बच्ची को गोद में लेकर महाराज की तस्वीर के आगे शीश नवाया। बच्ची को हल्की-हल्की थपकी दी तो वह खेलते-खेलते सो गई।

पिता और पहली प|ी की अस्थियां नर्मदा में ही की थीं विसर्जित

गुरुवार सुबह मुक्तिधाम में अस्थि संचय हुआ। कुहू और महाराज के करीबी, रिश्तेदार वहां गए। अस्थि संचय की क्रिया पूरी की। महेश्वर में दोपहर 2 बजे कुहू के हाथों अस्थियों का विसर्जन किया गया। उनके साथ परिजन प्रदीप देशमुख, अनिल पाटिल, मामा मनोज देशमुख, विनायक, शेखर, नूप राजुरकर, आनंद शर्मा, साहेबराव शिंदे भी थे। भय्यू महाराज भी कुछ साल पहले पिता एवं प|ी माधवी की अस्थियां नर्मदा में ही विसर्जित करने गए थे।

कुहू का ध्यान विनायक तो आयुषी को संभाल रहे उनके परिजन

महाराज के निधन के बाद कुहू व आयुषी सुखलिया स्थित महाराज के पहले निवास शिवनेरी में हैं। बंगले में तीन बेडरूम हैं। एक कमरा कुहू, दूसरा महाराज और तीसरा आयुषी का है। दोनों एक ही बंगले में रहकर मुंह तक नहीं देख रहीं। कुहू के पास पूरे समय विनायक है तो आयुषी के पास उसके परिजन। वहीं आश्रम व परिवार से जुड़े कुछ सेवादारों ने बताया कि बेटे की मौत के बाद से मां कुमुिदनी सदमे में हैं। न तो वह किसी से कुछ बोल रही हैं और न आंखों से आंसू आ रहे हैं। सेवादारों को देखकर भी वह कुछ प्रतिक्रिया नहीं दे रही हैं। हालांकि एक नर्स उनका पूरा ध्यान रख रही है।

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