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मॉडल दर्जे के लिए 200 करोड़ रुपए मांगने वाला डीएवीवी 3 साल में 15 करोड़ खर्च नहीं कर पाया

28 टीचिंग विभाग, तीन अन्य एकेडमिक विभाग (कम्यूनिटी कॉलेज भी शामिल) में ही 10 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें 300...

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2018, 03:35 AM IST
28 टीचिंग विभाग, तीन अन्य एकेडमिक विभाग (कम्यूनिटी कॉलेज भी शामिल) में ही 10 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें 300 से ज्यादा फैकल्टी हैं। यही नहीं 250 करोड़ के बजट वाली इस यूनिवर्सिटी में नालंदा कैंपस में रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार सहित 10 अफसर हैं। इसके बावजूद यह राशि खर्च नहीं हो पाई। हालांकि मूल जिम्मेदारी स्थापना विभाग की है। उसके अफसर और ठेकेदारों का भी यह कुप्रबंधन है।

छह साल विभाग के एडी रहने वाले कुलपति, मैनेजमेंट की 50 से ज्यादा फैकल्टी और 10 बड़े अफसर, फिर भी बजट खर्च करने में फेल

दिनेश जोशी | इंदौर

मॉडल यूनिवर्सिटी प्रोजेक्ट के लिए पिछले तीन साल से राज्य शासन से 200 करोड़ रुपए का बजट मांग रही देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी तीन साल में 15 करोड़ रुपए खर्च नहीं कर पाई है। रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत सितंबर 2015 से मिलना शुरू हुई इस राशि में से यूनिवर्सिटी प्रबंधन महज 9 करोड़ रुपए खर्च कर पाया। प्रबंधन के सामने अब नया संकट यह कि यदि अगले ढाई माह में बचे हुए छह करोड़ रुपए खर्च नहीं हुए तो इसी साल मिलने वाले पांच करोड़ के साथ यह छह करोड़ रुपए भी लैप्स हो जाएंगे। इस तरह 11 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान होगा।

... तो 200 करोड़ का कैसे करेंगे उपयोग?

छात्र हित और विकास कार्यों के लिए मिला पैसा भी खर्च न कर पाने की यह स्थिति इसलिए भी चिंताजन है, क्योंकि सवा दो साल से वह प्रो. नरेंद्र धाकड़ कुलपति हैं जो छह साल तक उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त संचालक रहे। यही नहीं, यूनिवर्सिटी के टीचिंग विभागों में मैनेजमेंट पढ़ाने वाले 50 से ज्यादा फैकल्टी (लेक्चरर, रीडर और प्रोफेसर) हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तीन साल में महज 15 करोड़ रुपए खर्च नहीं कर पाने वाला प्रबंधन मॉडल यूनिवर्सिटी के लिए मिलने वाले 200 करोड़ रुपए कैसे खर्च करेगा।

जो 9 करोड़ खर्च किए, उसमें 7 करोड़ तो सिर्फ होस्टल पर

यूनिवर्सिटी ने जो 9 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, उनमें भी 7 करोड़ रुपए तो सिर्फ एक होस्टल बनाने पर खर्च किए जा रहे हैं। बाकी दो करोड़ रुपए अन्य प्रोजेक्ट पर खर्च किए गए। यानी चार साल में महज तीन-चार प्रोजेक्ट पर काम हुआ फिर भी प्रबंधन बाकी राशि खर्च नहीं कर पाया।

250 करोड़ रुपए का है बजट

सीधी बात
30 अगस्त तक राशि खर्च करने का दिया टारगेट

 4 साल में भी 15 करोड़ रुपए खर्च क्यों नहीं हो पाए, इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

तकनीकी वजह रही। जिम्मेदारों को फटकार लगाई है। 30 अगस्त तक राशि खर्च करने का टारगेट दिया है।

 जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी? ढाई माह में 6 करोड़ कैसे खर्च करेंगे?

राशि डूबी तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाकी राशि खर्च करने के लिए कम्प्यूटर खरीदी सहित अन्य प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं।

छात्रों पर भी पड़ेगा असर

इस राशि से यूटीडी के 10 हजार छात्रों से जुड़े प्रोजेक्ट पर काम होता है। इसमें पढ़ाई, रिसर्च से जुड़े जरूरी संसाधन जुटाने, नई विभागीय बिल्डिंग, होस्टल, लाइब्रेरी, रिसर्च लैब बनाने या कम्प्यूटर खरीदी जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं। अगर 11 करोड़ रुपए डूबते हैं तो सबसे ज्यादा असर छात्रों पर ही पड़ेगा।

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