• Hindi News
  • Madhya Pradesh
  • Indore
  • News
  • शहर की ये ख्वाहिशें मेरे गांव तक आ गईं, एक कॉलोनी मेरे खेत खा गई
--Advertisement--

शहर की ये ख्वाहिशें मेरे गांव तक आ गईं, एक कॉलोनी मेरे खेत खा गई

Dainik Bhaskar

Jun 12, 2018, 03:40 AM IST

News - अभिव्यक्ति को सार्थक मंच दे रहे हैं शहर के अोपन माइक। जहां गुस्सा है, प्यार है, गंभीर मुद्दों पर विचारों की टकराहट...

शहर की ये ख्वाहिशें मेरे गांव तक आ गईं, एक कॉलोनी मेरे खेत खा गई
अभिव्यक्ति को सार्थक मंच दे रहे हैं शहर के अोपन माइक। जहां गुस्सा है, प्यार है, गंभीर मुद्दों पर विचारों की टकराहट है, चिंता और सकारात्मकता, युवाओं की आशावादिता है। विचारों की ऐसी ही गर्माहट लेकर योअर कोट 7.0 ओपन माइक में कुछ युवा इकट्‌ठा हुए। 56 दुकान स्थित कैफे में 50 से ज्यादा मेम्बर्स शामिल हुए। शुरुआत गौरव भार्गव ने तुम प्रकृति स्वयं में हो, विराजती हर मन में हो... गीत के साथ की। अभिषेक नेमा ने बेटियों को शिक्षा देने और पढ़ाने के मैसेज को कुछ यूं बयां किया कि उठते सवालों का छंद बनाकर पढ़ जा, गुड़िया पढ़ जा, गुड़िया बढ़ जा।

यह मंच उन युवाओं का बड़ी गर्मजोशी से स्वागत करता है, जो पहली बार इस मंच से अपनी बात कहते हैं और इसका अहसास प्राची सक्सेना को हुआ, जब उन्होंने पहली बार कविता पढ़ी। प्राची ने कहा समंदर के उस छोर तक जहां तक मैं निहारती हूं, मुझे दिखाई देते हो बस तुम। महेश यादव ने प्यार के लम्हों को साझा किया, और गज़ल पढ़ी कि इश्क़ ने उसके गुमनामी दी, बेवफाई ने मशहूर कर दिया। राजेश सूर्यवंशी ने शहरीकरण का बहुत ही संवेदनशील मुद्दा उठाया, और कहा शहर की ये ख्वाहिशें मेरे गांव तक आ गईं, शहर की एक कॉलोनी मेरे खेत को खा गई। अवधेश शर्मा "ध्रुव' ने कोख़ में मारी जा रही बेटियों का दर्द बयां करते हुए कविता पढ़ी और माहौल कुछ संजीदा हो गया। शुभांगी तिवारी, उदिता, नीतीश, मनीषा, अपूर्व, आला चौहान, दीपक मालवीय, देबु करोलिया, रोहित, अंकित, प्रितेश, लोकेश, देवेंद्र, ऋषभ चोलकर, हिमांशु वर्मा और मिहिर ने भी किस्से, कहानी, गीत और ग़ज़ल पढ़ी।

Literary Programme

तेरी आंखों में रात गुजर गई/दो कदम तुम्हारे, दो हमारे थे/ चलते हुए मुलाकात गुजर गई

गीले तकिये ने कर दिया बयां/ रोते-रोते, बरसात गुजर गई

इंसान हो गया हूं मैं आज से/ कल से मेरी जात गुजर गई

ज़िस्म तेरा यूं ख़ाक जो हुआ/ रूह मेरी तेरे साथ गुज़र गई

आला चौहान "मुसाफ़िर'

X
शहर की ये ख्वाहिशें मेरे गांव तक आ गईं, एक कॉलोनी मेरे खेत खा गई
Astrology

Recommended

Click to listen..