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भय्यू महाराज ने की खुदकुशी

संत भय्यू महाराज (50) ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली। उन्होंने सिल्वर स्प्रिंग्स स्थित घर में रिवॉल्वर कनपटी पर रखकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 03:55 AM IST

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    संत भय्यू महाराज (50) ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली। उन्होंने सिल्वर स्प्रिंग्स स्थित घर में रिवॉल्वर कनपटी पर रखकर गोली चला दी, जो आरपार हो गई। उन्होंने पॉकेट डायरी में डेढ़ पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा है। पुलिस की प्राथमिक जांच में घरेलू विवाद के तनाव में आत्महत्या की बात सामने आ रही है। वहीं, पुलिस को दिए बयान में प|ी-बेटी ने पारिवारिक विवाद की बात करते हुए एक-दूसरे पर आरोप लगाया।

    डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया कि घर में भय्यू महाराज, मां व सेवक विनायक और योगेश थे। प|ी डॉ. आयुषी बाहर गई थीं। पुलिस को विनायक ने बताया कि घर में कई लोग रहते हैं। दो सेवादार और थे जिन्हें सुबह 11 बजे उन्होंने नीचे भेज दिया था और पुणे में रहने वाली बेटी कुहू के कमरे में चले गए थे। प|ी दोपहर करीब 12 बजे लौटीं तो देखा कि लाइसेंसी रिवॉल्वर भय्यू महाराज के हाथ के पास पड़ी थी और सिर से खून बह रहा था। विनायक और योगेश उन्हें बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। अस्पताल के जीएम के मुताबिक दोपहर 2.06 बजे सेवक उन्हें यहां लेकर आए। वे ब्रॉट डेड (अस्पताल आने के पूर्व मृत्यु होना) थे। इंदौर फ्रंट पेज भी पढ़ें

      

    8 जून : प|ी के जन्मदिन पर चारों ओर खुशियां, लेकिन चेहरे पर तनाव

    तस्वीर 8 जून की है, जब भय्यू महाराज ने रात में बायपास स्थित रेस्तरां आर-9 में प|ी डॉ. आयुषी का जन्मदिन मनाया। इस कार्यक्रम में बेटी कुहू को छोड़ आश्रम के सभी लोग और परिजन शामिल हुए। उन्होंने मेहमानों की अगवानी भी की।

    11 जून : रेस्तरां में घंटेभर बैठे, एडमिशन के लिए मिली महिला

    बेटी कुहू पुणे से मंगलवार को आने वाली थी। वे इससे खुश थे, लेकिन चेहरे पर तनाव भी था। वह दोपहर साढ़े तीन बजे राऊ स्थित अपना स्वीट्स रेस्तरां पहुंचे। वहां एक घंटे रुके और एक महिला से बातचीत की। इसके बाद चले गए। दोनों अलग-अलग गाड़ियों से आए थे। बताया जा रहा है कि वह महिला किसी शिक्षण संस्थान में दाख़िले के लिए भय्यू महाराज से मिलने आई थी।

    बेटी कुहू और प|ी आयुषी ने पुलिस को यह बताया-

    मैं उन्हें (डॉ. आयुषी को) अपनी मां नहीं मानती। उन्हीं के कारण पिता ने यह कदम उठाया। उन्हें जेल में बंद कर दीजिए। -कुहू

     डॉ. आयुषी के कारण ही पिता ने यह कदम उठाया, इन्हें जेल में बंद कर दीजिए

    कुहू को मैं और मेरी बेटी पसंद नहीं थी। इसलिए बेटी के जन्म के बाद ही मैं अपनी मां के घर रहने चली गई थी, क्योंकि कुहू यहां रहने वाली थी। कुहू के पुणे जाने के बाद कुछ दिन पहले ही मैं इंदौर आई थी और हम दोनों (भय्यू महाराज और वह) अच्छे से रह रहे थे। -डॉ. आयुषी

    विवाद में डरते-सहम जाते थे : नौकर

    हर बात पर वे प|ी से ज्यादा बेटी का पक्ष लेते थे। इसी पर दोनों में विवाद भी होते थे। इस दौरान वह डरकर सहम जाते थे।

    10 जून : बेटी से मिलने जा रहे थे, रास्ते से लौटे

    भय्यू महाराज अपनी बेटी कुहू से मिलने के लिए पुणे रवाना हुए थे। हालांकि बीच रास्ते से ही लौट आए। दोपहर में बापट चौराहा स्थित अपने आश्रम पहुंचे और सीधे अपने कक्ष में चले गए। कुछ करीबी लोगों से मिले, लेकिन भक्तों से नहीं मिले। शाम तक आश्रम में ही रहे। आश्रम से जुड़े लोगों की मानें तो महाराज कुछ उदास और परेशान थे।

    और आज : बेटी के रूम को लेकर प|ी से बहस

    मंगलवार सुबह करीब 11 बजे भय्यू महाराज बेटी कुहू के कमरे में पहुंचे तो वह अस्त-व्यस्त मिला। प|ी को बोला कि कुहू आने वाली है। इसे व्यवस्थित क्यों नहीं रखते हो? इसे लेकर दोनों के बीच बहस भी हुई। इसके बाद खड़े होकर नौकरों से कमरा व्यवस्थित कराया। काम पूरा होने तक वहीं खड़े रहे।

     कुहू को मैं पसंद नहीं थी, अच्छे से रह रही थी गुरुजी के साथ मैं

    अंतिम संस्कार आज

    भय्यू महाराज का अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर 2.30 बजे किया जाएगा। सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक उनके पार्थिव शरीर को ‘सूर्योदय’ आश्रम में रखा जाएगा।

    10 लाइन का सुसाइड नोट

    अाखिरी लम्हा... प|ी की जुबानी

    उन्हें देख मेरा गला ही सूख गया

    गु रुजी रोज की तरह उठे। योगा किया। पूजा-पाठ करने के बाद मुझसे कहा- आज कटहल की सब्जी खाने की इच्छा है। मैं कॉलेज जाने से पहले बोलकर गई थी, खाना खा लेना। वापस आई तो पहले बच्ची को खिलाया। इसके बाद मैंने नौकरों से पूछा- गुरुजी कहां हैं। नौकर बोले- किसी कमरे में हैं। मैंने कई कमरों में जाकर देखा। गुरुजी नहीं दिखे। थोड़ी चिंता हुुई। बाथरूम तक में जाकर देख लिया। फिर ज्यादातर बंद रहने वाले एक कमरे में जाकर देखा। दरवाजा अंदर से बंद था। खटखटाया। कोई हलचल नहीं। मैंने जोर से आवाज लगाकर नौकरों को बुलाया। नौकर दौड़ते हुए आए। मैंने कहा- दरवाजा तोड़ दो। दरवाजा तीन से चार झटके में टूटा। महाराज आंखें फेरे हुए पड़े थे। चारों तरफ खून फैला हुआ था। मेरा तो जैसे गला ही सूख गया। आवाज बंद पड़ गई। गाड़ी में रखकर उन्हें अस्पताल की ओर भागे।

    - जैसा प|ी डॉ. आयुषी ने अस्पताल में करीबी लोगाें को बताया

    ‘पारिवारिक जिम्मेदारी संभालने के लिए यहां कोई होना चाहिए’, ‘मैं बहुत तनाव में हूं। थक चुका हूं, इसलिए जा रहा हूं। विनायक मेरा विश्वासपात्र है। सब प्रॉपर्टी इन्वेस्टमेंट वही संभाले। किसी को तो परिवार की ड्यूटी करनी जरूरी है तो वही करेगा। मुझे उस पर विश्वास है। मैं कमरे में अकेला हूं और सुसाइड नोट लिख रहा हूं। किसी के दबाव में आकर नहीं लिख रहा हूं। कोई इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।’

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