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अगले साल से ग्रेजुएशन के बजाय 12वीं के बाद होगा बीएड, चार साल होगी कोर्स की अवधि

अगले साल से ग्रेजुएशन के बजाय 12वीं के बाद बीएड का इंटीग्रेटेड कोर्स होगा, जो दो के बजाय चार साल का होगा। नए सत्र से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 03:55 AM IST

अगले साल से ग्रेजुएशन के बजाय 12वीं के बाद बीएड का इंटीग्रेटेड कोर्स होगा, जो दो के बजाय चार साल का होगा। नए सत्र से छात्र बीए और बीएससी बीएड कोर्स कर सकेंगे। दो साल के बीएड का यह आखिरी साल होगा। यही वजह है कि इस साल ज्यादा से ज्यादा ऐसे आवेदक बीएड में एडमिशन लेंगे, जिनका ग्रेजुएशन काफी पहले हो चुका है। इस बार संभावना जताई जा रही है कि प्रदेशभर की सभी 55 हजार सीटें भर जाएंगी। अकेले इंदौर में बीएड के 60 से ज्यादा कॉलेज हैं, जिनमें 6200 सीटें हैं। बताते हैं कि बीएड में इस बार रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन की भी उम्मीद है। पिछले साल 80 हजार के लगभग रजिस्ट्रेशन हुए थे जो इस बार 1 लाख के पार पहुंच सकते हैं।

डीएलएड का महत्व भी होगा खत्म

12वीं के बाद बीएड में प्रवेश होने से अगले साल से डीएलएड का महत्व भी खत्म हो जाएगा। अभी डीएलएड में 12वीं के बाद प्रवेश होता है, लेकिन जब बीएड में ही 12वीं के बाद प्रवेश होने लगेगा तो ज्यादातर छात्रों का झुकाव उसी तरफ होगा। बीएड कोर्स के विशेषज्ञ रामबाबू शर्मा बताते हैं कि यह बदलाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई साल से बीएड कोर्स के साथ अलग-अलग प्रयोग हुए। एडमिशन की प्रक्रिया बदली। फिर एक साल का कोर्स दो साल का किया गया। अब यह अंतिम प्रयोग लगता है, क्योंकि जैसे बीए एलएलबी या बीबीए-एमबीए के इंटीग्रेटेड कोर्स सफल रहे, वैसे बीएड को भी महत्व मिल सकता है। 15 साल बीएड कोर्स के सिलेबस से जुड़े कॉलेज संचालक सुनील पंड्या का कहना है कि इस बार ज्यादातर छात्र बीएड में एडमिशन के लिए आवेदन करेंगे, क्योंकि अगले साल दो साल का बीएड खत्म होने से उनका मौका खत्म हो जाएगा। फिर ग्रेजुएशन के बाद बीएड नहीं हो सकेगा।

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