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अहंकार न करें और हमेशा िवनम्र रहें इसी से जीवन में पा सकते हैं सफलता

सुख और दुख जीवन के क्रम हैं, जिनसे कोई भी बच नहीं सकता। सुख और दुख हमारे अंतर्मन की उपज हैं। हमारी जितनी कामनाएं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 04:00 AM IST

अहंकार न करें और हमेशा िवनम्र रहें इसी से जीवन में पा सकते हैं सफलता
सुख और दुख जीवन के क्रम हैं, जिनसे कोई भी बच नहीं सकता। सुख और दुख हमारे अंतर्मन की उपज हैं। हमारी जितनी कामनाएं बढ़ेंगी, उतना ही दुख भी बढ़ेगा। पतन से बचने के लिए अहंकार को कभी भी पास फटकने नहीं देना चाहिए। हमेशा विनम्र बने रहें, इसी जीवन में सफलता मिलती है।

यह बात वृंदावन के भागवताचार्य स्वामी अनिरुद्धाचार्य ने मंगलवार शाम पलसीकर चौराहा स्थित मां शारदा मंदिर पर श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ आयोजन समिति के तत्वावधान में चल रही भागवत कथा में कही। उन्होंने कहा- देवराज इंद्र के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान ने गोवर्धन पर्वत को एक अंगुली पर उठाकर समूचे बृज को बचा लिया बल्कि अपने साथ बाल ग्वालों को भी जोड़कर यह संदेश भी दिया कि बड़ी से बड़ी पहाड़ जैसी विपत्ति को भी सब लोग मिलकर एक अंगुली के दम पर दूर कर सकते हैं। परमात्मा ने हमें प्रकृति के रूप में अनेक अनमोल उपहार दिए हैं, लेकिन हमें मुफ्त में मिले उपहारों की कद्र करना नहीं आता। जिस दिन हम पानी की हर बूंद का और पौधों की हर पत्ती का महत्व समझ लेंगे, जीवन सार्थक बन जाएगा। 13 जून को रुक्मिणी विवाह का जीवंत उत्सव मनेगा। साथ ही दो कन्याओं के विवाह भी कथा मंडप में ही रस्मो-रिवाज के साथ संपन्न होंगे।

मां शारदा मंदिर में चल रही भागवत कथा के दौरान आरती में शामिल श्रद्धालु।

रावण वध, भगवान के राज्याभिषेक के साथ होगा कथा का समापन

हमारे परिवार मर्यादाओं की लक्ष्मण रेखा में ही पल्लवित हो रहे हैं। सीताहरण का प्रसंग इस बात को रेखांकित करता है कि जब तक हम मर्यादा की लक्ष्मण रेखा में रहेंगे, हमारा आत्मसम्मान भी सुरक्षित रहेगा। यह बात आचार्य हरिकृष्ण शास्त्री ने मंगलवार को विद्याधाम पर आयोजित श्रीराम कथा में सीताहरण और हनुमान मिलन जैसे प्रसंगों की व्याख्या में कही। रामकथा में 13 जून को रावण वध व राज्याभिषेक के साथ कथा का समापन होगा।

हंसदास मठ में चल रहे भागवत पारायण की पूर्णाहुति आज

पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में बड़ा गणपति पीलियाखाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ में 16 मई से 51 विद्वानों द्वारा किए जा रहे भागवत पारायण की पूर्णाहुति 13 जून को शाम 5 बजे होगी। इस दौरान मठ के महंत रामचरण दास महाराज व आचार्य डाॅ. नारायणदत्त शास्त्री मौजूद रहेंगे। मठ के पं. पवन शर्मा ने बताया सुबह 51 विद्वानों द्वारा भागवत पारायण के नियमित पाठ के बाद शाम 5 बजे पूर्णाहुति होगी। इस अवसर पर सभी मंडल व नवग्रह का पूजन किया जाएगा। इसके बाद विसर्जन कर सभी विद्वानों व आचार्य का सम्मान किया जाएगा।

नगीन नगर में चल रही धार्मिक व्याख्यानमाला का समापन आज

नगीन नगर में पुरुषोत्तम मास में आयोजित रामचरित मानस मास पारायण पर आधारित दार्शनिक व्याख्यान में डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने मंगलवार को कहा- जिस प्रकार हनुमानजी को संजीवनी बूटी लाने से रोकने के लिए राक्षस कालनेमि ने छल से द्रोणागिरि पर्वत के पास आश्रम बनाया और खुद साधु बनकर उसमें बैठ गया, ठीक इसी तरह लोग चालाकी कर दूसरों के साथ छल करते हैं। बुधवार को अर्चन और प्रसाद वितरण के साथ अनुष्ठान का समापन होगा।

30 दिनी भागवत कथा की पूर्णाहुति आज

पंचकुइया स्थित श्रीराम मंदिर आश्रम में चल रहे 30 दिनी 108 भागवत कथा महोत्सव की पूर्णाहुति 13 जून को होगी। मंदिर के महामंडलेश्वर लक्ष्मणदास महाराज ने बताया पूर्णाहुति पर दोपहर 12 बजे आचार्य पं. दिनेश शास्त्री के आचार्यत्व में हवन-पूजन किया जाएगा। मंगलवार को भागवत कथा का समापन हुआ। ।

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