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मूक-बधिरों की ‘वकील’ बनी 9 साल की फौजिया, अफसरों के सामने इशारों में रखती है पीड़ितों की बात, 22 मामलों में दिला चुकी न्याय

नाम-फौजिया। उम्र 9 साल, लेकिन ऐसे लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती हैं, जो बोल और सुन नहीं सकते। वह इशारों की भाषा...

Dainik Bhaskar

Jun 13, 2018, 04:00 AM IST
मूक-बधिरों की ‘वकील’ बनी 9 साल की फौजिया, अफसरों के सामने इशारों में रखती है पीड़ितों की बात, 22 मामलों में दिला चुकी न्याय
नाम-फौजिया। उम्र 9 साल, लेकिन ऐसे लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती हैं, जो बोल और सुन नहीं सकते। वह इशारों की भाषा की जानकार है। मूक-बधिर माता-पिता की बेटी ने तीन से चार जिलों में जाकर करीब 22 मामलों में मूक-बधिर दंपती व पीड़ितों की मदद की है। खंडवा में दो समुदायों में तनाव जैसे हालात बनते रहे हैं, इसी के चलते इसे संवेदनशील शहरों में गिना जाता है। यहां दो समाजों के बीच फौजिया किसी मिसाल से कम नहीं है। वह गुरुनानक स्कूल में कक्षा चौथी की छात्रा है। उसके पिता फारूख और मां फेमिदा दाेनों मूक-बधिर हैं। माता-पिता को इशारों में बात करते देख वह भी इस भाषा काे सीख गई। इसी खूबी के चलते मां से प्रेरणा लेकर उसने मूक बधिर लोगों की मदद शुरू कर दी। खंडवा, इंदौर, बुरहानपुर सहित कई जिलों में वह कलेक्टर और एसपी के सामने वकीलों की तरह बेबाक पीड़ितों के पक्ष रख चुकी हैं। जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिला वह उनके साथ भी रहीं।

एसपी मिश्र के सामने पीड़ित दंपती के परिजनों को बुलाकर फौजिया ने इशारों से दोनों के बीच समझौता कराया।

एक बार मदद की, फिर नहीं रुकी

फौजिया ने बताया बचपन से वह शहर में सांप्रदायिक तनाव की खबरें सुनती आ रही हैं। वह इंसानियत की मदद कर इस तनाव को खत्म करना चाहती है। जब वह बुरहानपुर में अपने मामा के यहां थी तब मदद करने का मौका मिला। एक मूक-बधिर को परेशानी आने पर उसने बुरहानपुर प्रशासन की मदद की थी। मूक-बधिर की परेशानी दूर होने पर उसे खुशी मिली तब से लेकर आज तक वह कई जगह प्रशासन व मूक-बधिरों के बीच ट्रांसलेटर के तौर पर मदद कर चुकी है, जिसमें ज्यादातर हिंदू परिवार थे।

मूक बधिर दंपती की मदद की, मामला सुलझाया

मंगलवार को जनसुनवाई में ऋषि और रितु नामक मूक-बधिर दंपती एसपी रुचि वर्धन मिश्र के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे। मूक-बधिर होने से एसपी उनकी परेशानी समझ नहीं पा रही थीं। ऐसे में मूक-बधिर संस्था के साथ फौजिया वहां पहुंची और घरेलू केस में पीड़ितों व पुलिस की मदद की। फौजिया ने एसपी मिश्र को बताया कि इनके पिता राजेश सेजकर शराब पीकर दोनों के साथ मारपीट कर रुपयों की मांग करते हैं। ऐसे में मूक-बधिर दंपती खंडवा से बुरहानपुर शिफ्ट होना चाहते हैं, लेकिन पिता उन्हें जाने नहीं देना चाहते। फौजिया ने इशारों में दंपती की समस्या सुनकर एसपी को बताई। एसपी ने मूक-बधिर ऋषि के माता-पिता को ऑफिस बुलाया और समझाइश दी। इसके बाद मूक-बधिर दंपती की समस्या का समाधान हो गया। फौजिया के आत्मविश्वास और मानवता को देखकर एसपी मिश्र भी दंग रह गईं। उन्होंने उसके साथ सेल्फी लेकर बाजार से उसकी पसंद के कपड़े भी दिलवाए।

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मूक-बधिरों की ‘वकील’ बनी 9 साल की फौजिया, अफसरों के सामने इशारों में रखती है पीड़ितों की बात, 22 मामलों में दिला चुकी न्याय
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