Hindi News »Madhya Pradesh »Indore »News» बेटी से नहीं मिलने देने की साजिश तो नहीं?

बेटी से नहीं मिलने देने की साजिश तो नहीं?

खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले संत भय्यू महाराज बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शाम चार बजे विजय नगर स्थित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 04:10 AM IST

बेटी से नहीं मिलने देने की साजिश तो नहीं?
खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने वाले संत भय्यू महाराज बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। शाम चार बजे विजय नगर स्थित मुक्तिधाम में बेटी कुहू ने उन्हें मुखाग्नि दी। वहीं, इस मामले में महाराज की प|ी डॉ. आयुषी और बेटी के बीच चल रहा विवाद ही मुख्य वजह के रूप में सामने आ रहा है। फिर भी पुलिस कई एंगल पर जांच कर रही है। जैसे- भय्यू महाराज ने सुसाइड नोट में बेटी का जिक्र नहीं करते हुए सेवादार विनायक दुधाड़े को ही क्यों सर्वेसर्वा बताया? प|ी से रिश्ते अच्छे थे उसे भी संपत्ति और व्यावसायिक मामलों की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी? उन्हें बेटी से नहीं मिलने देने की साजिश तो नहीं थी? पुलिस ने महाराज की प|ी व घर में रहने वाले 7 लोगों के बयान लिए हैं। कम्प्यूटर, गैजेट्स, मोबाइल जब्त किए। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने बताया मोबाइल की सीडीआर और डेटा चेक करवाया जा रहा है। इससे पहले, अंतिम संस्कार से पहले महाराज का शव सूर्योदय आश्रम में रखा गया। वहां बेटी और प|ी एक कार से पहुंची। दोनों करीब 4 घंटे शव के पास बैठी रहीं, लेकिन एक-दूसरे को देखा नहीं। इस दौरान सेवादार विनायक को महाराज की मां ने दुलारा।

महाराज के तीन सबसे करीबी लोग; दो ने उनसे ही पूछे सवाल, तीसरे पर उठे सवाल

बेटी कुहू

बाबा, मेरा क्या होगा... आपने सोचा ही नहीं

आश्रम में महाराज के शव को बॉडी कूलर में रखा गया था। बेटी कुहू बोल रही थी कि एक बार मेरे प्यारे बाबा को मुझे गले तो लगाने दो। बाबा, बस एक बार मुझे देखकर मुस्करा दो..। मैं तो अभी इतनी छोटी हूं। किसके सहारे रहूंगी। मेरा क्या होगा... आपने एक बार भी नहीं सोचा। मैं आपने बस मिलने आ ही रही थी। मैंने क्या-क्या सोच रखा था। आते ही आपको गले लगा लूंगी। बहुत सारी बातें थी जो आपको बताना थी। आप तो मुझसे मिलने आने वाले थे। मेरे साथ घूमने की बात कर रहे थे। मैं क्या करूंगी? मुझे रूठना होगा तो किससे रूठूंगी? आप मुझसे बिना मिले चले गए। मम्मी भी साथ नहीं हैं। आपने भी मुंह फेर लिया। बेटी के साथ कोई ऐसा करता है क्या? सिर पर हाथ फेर दो ना।

बेटी-प|ी को लेकर विवाद से इनकार नहीं

सीएसपी खजराना मनोज र|ाकर ने बताया कि आयुषी ने बयान दिया कि मंगलवार को गुरुजी परेशान नहीं दिखे। विनायक, खाना बनाने वाली सरोज सोलंकी, आश्रम के योगेश चह्वाण, गोलू सिंगाड़े, ड्राइवर राजेंद्र पंवार, प्रवीण देशमुख ने दंपती को लेकर ज्यादा विरोधाभासी बातें नहीं की। हालांकि बेटी व प|ी को लेकर विवाद होने की बातों से इनकार नहीं किया।

एक कार में आईं बेटी-प|ी, शव के पास बैठीं पर एक-दूसरे को देखा तक नहीं

सेवादार विनायक : दर्शन करने आया था, अब करोड़ों की संपत्ति के उत्तराधिकारी का दावेदार

भय्यू महाराज के श्री सद्गुगुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट की देशभर में करोड़ों की संपत्ति बताई जा रही है। महाराज ने सुसाइड नोट में जिस विनायक को अपना उत्तराधिकारी बताया है, वह 1996 यानी, 21 साल पहले सूर्योदय आश्रम में भय्यू महाराज के दर्शन करने आम आदमी की तरह आया था। तीन घंटे इंतजार के बाद महाराज से मिलकर इतना प्रभावित हुआ कि आश्रम का नियमित सेवादार बन गया। कुछ सालों में वह महाराज का इतना करीबी हो गया कि उनकी मां का ध्यान वही रखता था। महाराज किससे बात करेंगे और कौन उनसे मिलेगा, यह वही तय करता था।

सेवादार को क्यों बना दिया उत्तराधिकारी?

बेटी से मिलने जा रहे थे, रास्ते से कैसे लौटे

सोमवार को बेटी से मिलने के लिए महाराज पुणे रवाना हो चुके थे, लेकिन पता चला कि वह मंगलवार को इंदौर आ रही है। इसलिए लौट आए थे। सवाल उठ रहा है कि किसी ने साजिश तो नहीं रची कि वे बेटी से नहीं मिल सके? उन्हें बेटी को लेकर इतना तनाव दे दिया हो कि खुदकुशी कर ली? वहीं, दो सुसाइड नोट की कहानी फर्जी निकली है। उनका एक ही सुसाइड नोट था। दूसरा किसी ने फर्जी बनाया।

तस्वीर सर्वोदय आश्रम की। फोटो : ओपी सोनी

मुझे और बेटे को मिलने बुलाया था : महिला

रेस्तरां के सीसीटीवी फुटेज में भय्यू महाराज के साथ नजर आई महिला ने भास्कर को बताया कि मेरा बेटा और कुहू डेली कॉलेज में 12वीं साथ पढ़े। मेरा बेटा पढ़ाई के लिए लंदन जा रहा है। कुहू भी जाने का प्लान कर चुकी थी। महाराज को मेरे भी जाने का पता चला तो उन्होंने सोचा मैं कुहू का भी ध्यान रखूं। सोमवार को वे सेंधवा से लौट रहे थे तो उन्होंने बेटे को कॉल कर उसे और मुझे रेस्तरां में मिलने बुलाया था।

प|ी आयुषी

हमें किसके भरोसे छोड़ गए, एक बार बोल दो

डॉ. आयुषी भी बॉडी कूलर के ऊपर से ही महाराज के सिर पर हाथ फेरने की कोशिश करती रही। वह कभी रोतीं तो कभी यादों में खो जातीं। महाराज को गर्मी पसंद नहीं थी। वह बाडी कूलर पर बार-बार हाथ से हवा दे रही थी। वह बोलती रहीं कि तुमने सुबह (मंगलवार) तो मुझे हंस के भेजा था। तुम एक बार आंखे खोलकर मेरी हालत तो देखो यार। अपनी बेटी (चार महीने) को मैं क्या बोलूंगी? वह रात को रोएगी तो कौन उसे घुमाकर सुलाएगा? तुम्हारी आवाज सुनकर तो वह खिलखिला उठती थी। आपका फोटो देखकर वह रोएगी तो मैं उसे कैसे चुप कराऊंगी? तुमको टेंशन थी...मुझे तो बोलकर देखते..। हमें किसके भरोसे छोड़कर गए? एक बार तो बोल दो यार..।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Indore News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: बेटी से नहीं मिलने देने की साजिश तो नहीं?
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×