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1943 में भी था आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस, आज उसका इम्प्लिमेंटेशन बढ़ गया है

\आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस जिसे हम नवाचार कह रहे हैं, असल में नया कॉन्सेप्ट नहीं है। सबसे पहले 1943 में मैक्युलॉ और...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:45 AM IST

  • 1943 में भी था आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस, आज उसका इम्प्लिमेंटेशन बढ़ गया है
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    "आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस जिसे हम नवाचार कह रहे हैं, असल में नया कॉन्सेप्ट नहीं है। सबसे पहले 1943 में मैक्युलॉ और पिट्स ने आर्टिफीशियल न्यूरॉन्स का मॉडल प्रपोज़ किया था। 1956 में मिन्स्की और एडमंड्स ने पहला न्यूरल नेटवर्क कम्प्यूटर "द स्नार्क' बनाया था। 1956 में ही जॉन मैक्कार्थी ने मशीन इंटेलीजेंस पर स्टडी कर रहे रिसर्चर्स के लिए दो महीनों तक चली द डार्टमाउथ काॅन्फ्रेंस आयोजित की थी। इसी काॅन्फ्रेंस में मशीन इंटेलीजेंस को आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस नाम देने पर भी सहमति बनी थी।'

    सेमिनार में एआई के बारे में यह जानकारी एसजीएसआईटीएस की कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट की हेड डॉ. वंदना तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि एआई का उपयोग आज मुख्यत: रोबोटिक्स, मशीन लर्निंग, लेंग्वेज सिस्टम और विज़न सिस्टम्स में हो रहा है। स्मार्ट फोन, स्मार्ट थर्मोसेट्स और वॉइस एक्टिवेटेड वचुर्अल असिस्टंस के माध्यम ये हमारे जीवन में प्रवेश कर चुका है।

    एआई से खेती आसान बना रहे अमेरिकी किसान

    एआई के फायदों के रूप में डॉ. तिवारी ने बताया- ये कई तरह की समस्याओं से भी हमें निजात दिलवा रहा है। फार्मलॉग्स नामक फार्मिंग मैनेजमेंट एप के ज़रिए अमेरिका के 33 फीसदी किसान आज खेती में पहले से ज्यादा फसल ले रहे हैं क्योंकि उन्हें जलवायु मिट्‌टी की जानकारी, पौधों की अनियमित ग्रोथ की जानकारी भी मिल रही है। आने वाले समय में कैंसर जैसी बीमारियों के लिए भी पर्सनलाइज़्ड ट्रीटमेंट प्लान बनाए जा सकेंगे।

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