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बड़ी बात, हम हमेशा के लिए नं.1... आदतें बदलने में

News - आईआईएम के प्रो. गणेश कुमार निदुगला और अभय पंत की एक रिपोर्ट में रहवासी संघ, पब्लिक टॉयलेट, खुले में शौच से मुक्त...

Dainik Bhaskar

May 17, 2018, 06:15 AM IST
बड़ी बात, हम हमेशा के लिए नं.1... आदतें बदलने में
आईआईएम के प्रो. गणेश कुमार निदुगला और अभय पंत की एक रिपोर्ट में रहवासी संघ, पब्लिक टॉयलेट, खुले में शौच से मुक्त होना लोगों के व्यवहार जैसे कई बिंदु शामिल थे।

स्वच्छता को लोगों ने संस्कृति ही बना लिया है, अब तो इसे मजबूती देनी है, 



1. घर-दुकान से दे रहे कचरा

निगम ने पेटियां हटाकर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शुरू किया तो लोग घर, दुकान से कचरा देने लगे। उसमें भी गीला और सूखा कचरा अलग-अलग।

2. कचरे से बना रहे खाद

लोकमान्य नगर में 750 परिवार टेराकोटा पॉट से कचरे से खाद बना रहे हैं। हफ्ते में दो बार ही निगम को कचरा देते हैं।

3. कचरे का वहीं निपटान

गीले कचरे को डि-सेंट्रलाइज्ड किया, खाद के लिए प्लांट लगाए। बगीचे, होटल, स्कूल में 700 से ज्यादा यूनिट लगी।

4. पॉलिथीन का कम उपयोग

कचरा फैलने का बड़ा कारण पॉलिथीन थी। लोगाें ने इस्तेमाल कम कर दिया। दुकानदार भी मानक स्तर की ही पॉलिथीन देने लगे।




5. वाहनों में रख रहे डस्टबिन

लोग कार में छोटे डस्टबिन रखने लगे, ताकि कचरा सड़क पर नहीं फेंकना पड़े। पान-गुटखा खाने वाले भी डस्टबिन का इस्तेमाल करने लगे।

6. बच्चे टोकने लगे बड़ों को

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के अनुसार एक बस्ती में महिला ने बताया कि बच्चे कहते हैं कचरा अलग-अलग करके दो।

7. आयोजनों में विशेष ध्यान

जुलूस, रैली या धार्मिक आयोजन, लोग वहां भी सफाई पर विशेष ध्यान देने लगे। जुलूस के तत्काल बाद लोग सफाई कर देते हैं।

8. आठवां वचन सफाई का

लोग स्वच्छता के लिए इतने जागरूक हो गए कि सामूहिक विवाह में नवदंपती आठवां वचन सफाई का लेने लगे हैं। डस्टबिन बांटे जा रहे हैं।




पहले शहर में सड़क किनारे कचरा पेटियां थीं। वे भर जाती थीं, तब भी कचरा नहीं उठता था। इससे गदंगी होती थी। आवारा पशु वहीं डटे रहते थे। सफाई के लिए निगम ने सबसे पहले कचरा पेटियां ही हटाईं।


बाजारों में पहले सुबह ही सफाई होती थी। निगम ने इस व्यवस्था को बदला। शाम को दुकानों से कचरा लेने लगे। इसके अलावा रात में भी बाजारों में सफाई होने लगी।


पूरे देश में 1.8 क्यूबिक मीटर क्षमता के कचरा वाहन चलते हैं। इससे 300 घर ही कवर होते थे। इंदौर नगर निगम ने 3.3 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली गाड़ियां बनवाईं। अब एक गाड़ी 800 से एक हजार घरों से कचरा लेती है।


सफाई के लिए बच्चे ब्रांड एंबेसेडर बने, ताकि घर में सफाई में खामी रहने पर वे बड़े लोगों को टोक सके। इसके अलावा स्कूल और काॅलेजों में स्वच्छता समितियों का गठन किया गया।


श हर में पहले कई स्थान ऐसे थे जहां कचरे के ढेर लगे रहते थे, लेकिन लोगों ने और निगम ने वहां वॉल बनवा दी और उस पर सुंदर पेंटिंग्स की। अब ऐसे स्थल लोगों के लिए सेल्फी पॉइंट बन गए हैं।





190

अस्पताल व नर्सिंग होम

इन जगहों से कचरा एकत्रित करने के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई। रात में भी निगम कर्मचारी सड़कों पर सफाई करने निकले।


155

होटल

104

मैरिज गार्डन व धर्मशालाओं



17

मॉल और सुपर बाजार

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