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सीजन की शुरुआत में हाट बाजार में एक हजार क्विंटल निम्बोली की हुई आवक

निम्बोली के बढ़ते उपयोग ने इसके अच्छे दिन ला दिए हैं। इस सीजन की शुरुआत में साप्ताहिक हाट बाजार में 9 से 9.50 रुपए किलो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 03:05 AM IST

सीजन की शुरुआत में हाट बाजार में एक हजार क्विंटल निम्बोली की हुई आवक
निम्बोली के बढ़ते उपयोग ने इसके अच्छे दिन ला दिए हैं। इस सीजन की शुरुआत में साप्ताहिक हाट बाजार में 9 से 9.50 रुपए किलो के मान से व्यापरियों ने निम्बोली खरीदी। उधर, बिना छिलके वाली गिरी यानी बीज 14 रुपए किलो के भाव पर खरीदा गया। थोक व्यापारी मयंक राठी के अनुसार हाट बाजार में करीब 900 से 1000 बोरी निम्बोली की आवक हुई, यानी करीब 51 टन। व्यापारियों से हुई चर्चा अनुसार नीम का उपयोग औषधि निर्माण में बहुतायत से होने लगा है। साथ ही सरकार ने कीटनाशक दवाइयों के निर्माण में भी नीम के उपयोग को अनिवार्य कर दिया है। जिसके चलते निम्बोली की मांग एकदम से बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली निम्बोली हर अनाज व्यापारी खरीद रहा है। शनिवार को झाबुआ नाका एरिया में लगी पल्ली की हर दुकान पर निम्बोली के बड़े-बड़े ढेर लग गए थे।

क्षेत्र में आमतौर पर हर साल निम्बोली का सीजन मई के मध्य से जून के मध्य तक चलता है। इस वर्ष अब तक बारिश की नहीं आने से किसान खेती के कार्यों से फुर्सत में है। लिहाजा खाली समय का उपयोग ग्रामीण निम्बोली बीनकर आय अर्जित करने में कर रहे है। इससे निम्बोली की भरपूर आवक देखने को मिल रही है। बारिश आते ही किसान खेती के काम मे लग जाएंगे जिससे आवक कम हो सकती है। उस स्थिति में निम्बोली के भाव मे और उछाल आ सकता है।

साप्ताहिक हाट बाजार में मंगलवार को ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में निंबोली की आवक हुई।

जाती है कई राज्यों में

व्यापारी राहुल नागोरी ने बताया ग्रामीणों से खरीदी के बाद बड़े व्यापारी निम्बोली को मध्यप्रदेश के अलावा बाहर के राज्यों में भी भेजते है। समीपवर्ती गुजरात, राजस्थान के अलावा महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश के सुदूर स्थानों पर भेजी जाती है। महाराष्ट्र के सांगली में नीम के तेल व कीटनाशक बनाने के कई कारखाने है। लिहाजा ज्यादातर मांग वहीं से आने पर व्यापारी ज्यादा माल वहीं भेजते है।

महाराष्ट्र में ज्यादा उपयोग, अपने यहां बेहद कम : महाराष्ट्र के किसान खेती में कीटनाशक के रूप में नीम का उपयोग बहुतायत से करते है। झाबुआ जिले की बात करे तो यहां बेहद कम किसान इसका उपयोग करते हैं। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि निम्बोली को खेत की मेड़ पर चारों ओर डाल दी जाए तो उस खेत में कीट नहीं पड़ते। लगभग जीरो कीमत पर मिल रहे इस प्राकृतिक कीटनाशक का उपयोग नहीं करते हुए जिले के किसान महंगे दामों वाले रासायनिक कीटनाशक का उपयोग करते हैं।

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