इंदौर लोकसभा सीट / इस सीट ने दिए केंद्रीय मंत्री और लोकसभा स्पीकर, 1989 से भाजपा का गढ़, इस बार चुनौती



Lok Sabha Elections 2019, Indore Parliamentary Constituency
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Lok Sabha Elections 2019, Indore Parliamentary Constituency

  • 1989 से लगातार यहां भाजपा की सुमित्रा महाजन विजयश्री प्राप्त करती आ रही हैं
  • इस बार कांग्रेस ने पंकज संघवी और भाजपा ने शंकर लालवानी को अपना उम्मीदवार बनाया

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 07:21 PM IST

इंदौर. मध्यप्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीटों में इंदौर लोकसभा सीट शामिल है। इंदौर लोकसभा सीट को भाजपा का गढ़ कहा जाता है। क्योंकि, पिछले 8 लोकसभा चुनाव यानी 1989 से लगातार यहां भाजपा की सुमित्रा महाजन विजयश्री प्राप्त करती आ रही हैं। वर्तमान में महाजन लोकसभा स्पीकर भी है। 


साल 2014 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार इंदौर में भाजपा के लिए कुछ मुश्किल हो सकती है। इसका कारण यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के समय इंदौर की 9 विधानसभा सीटों में से 8 भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास थी। जबकि 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 4 सीट पर विजय प्राप्त की। वहीं, भाजपा के खाते में 5 सीट आई है। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस ने पंकज संघवी को मैदान में उतारा है वहीं भाजपा ने शंकर लालवानी को अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

मप्र की आर्थिक राजधानी है इंदौर: जनसंख्या की दृष्टि से मप्र का सबसे बड़ा शहर है इंदौर। वहीं, प्रदेश की आर्थिक राजधानी भी इंदौर है। मिनी मुंबई के नाम से मशहूर इंदौर देश का एकमात्र शहर है जहां आईआईटी और आईआईएम जैसी संस्थाएं हैं। 

 

23.5 लाख मतदाता:  2011 की जनगणना के सरकारी आंकड़ों अनुसार इंदौर की कुल जनसंख्या 32,76,697 है। इसमें 16,99,627 पुरुष और 15,77,070 महिला शामिल है। इंदौर की कुल जनसंख्या में 8,48,988 लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं जबकि शहरी क्षेत्र की आबादी 2427709 है। इंदौर संसदीय क्षेत्र में 23 लाख 49 हजार 476 मतदाता हैं।


पहली बार मतदान करेंगे 66 हजार युवा: 18 से 19 आयु वर्ग के युवा मतदाताओं की संख्या 66 हजार 638 हैं जो इस लोकसभा चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। जिले में दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 14 हजार 422 है।
 

इतिहास: 1962 के चुनाव में जीती थी कम्युनिस्ट पार्टी
आजादी के बाद साल 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में इंदौर से कांग्रेस की जीत हुई थी। 1957 में भी यहां कांग्रेस जीती थी। लेकिन, 1962 के चुनाव में यहां कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने जीत दर्ज की। 1967 और 1971 में कांग्रेस के प्रकाश चंद सेठी जीते थे। 1975 में हुए उपचुनाव में भी कांग्रेस के राम सिंह भाई विजयी हुए।

 

लेकिन, 1977 में यहां भारतीय लोक दल के कल्याण जैन की जीत हुई थी। 1980 और 1984 में कांग्रेस के प्रकाश चंद सेठी सांसद थे। 1989 के चुनाव में भाजपा की सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस के प्रकाशचंद सेठी को हराकर यहां से भाजपा को पहली बार जीत दिलाई। तब से लेकर वर्तमान तक अर्थात 1991, 1996, 1998,1999, 2004, 2008 और 2014 के चुनावों में भाजपा की सुमित्रा महाजन जीतती आई।

 

केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री रहे थे सेठी
यहां से चार बार सांसद रहे कांग्रेस के प्रकाश चंद सेठी इंदिरा गांधी के खास समर्थकों में शामिल थे। वे केंन्द्र की कांग्रेस सरकार में विभिन्न विभागों के मंत्री रह चुके थे। सेठी दो बार 1967 से 1972 और 1972 से 1975 तक मप्र के मुख्यमंत्री भी रहे।

 

विधानसभा चुनाव हार गईं थी, फिर बनाया जीत का रिकार्ड 
12 अप्रैल 1943 को महाराष्ट्र के चिपलुन में जन्मी सुमित्रा महाजन के पिता संघ के प्रचारक थे। 22 साल की उम्र में इंदौर में एडवोकेट रहे स्व. जयंत महाजन से उनका विवाह हुआ। वे खुद एडवोकेट भी हैं। ताई के नाम से  मशहूर सुमित्रा महाजन के राजनीतिक जीवन 1980 के दशक में शुरू हुआ। वे इंदौर की उपमहापौर चुनी गईं।  इसके बाद भाजपा ने उन्हें  इंदौर-3 से विधानसभा का टिकट दिया। लेकिन कांग्रेस के महेश जोशी ने उन्हें हरा दिया। राजनीतिके जीवन में ये उनकी एकमात्र हार थी। 1989 में उन्होंने पूर्व मंत्री प्रकाशचंद्र सेठी के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद जीत का सिलसिला शुरू हो गया।

 

एक ही प्रत्याशी के खिलाफ सबसे बड़ी और सबसे छोटी जीत
लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा की सुमित्रा महाजन ने लगातार आठवीं बार विजय प्राप्त की थी। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को हराया, जो की मध्यप्रदेश में किसी भी उम्मीदवार की सबसे बड़ी जीत थी। इसके बाद महाजन को सर्वसम्मति से सोलहवीं लोकसभा का अध्यक्ष बनाया गया। रोचक बात यह है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में भी सुमित्रा महाजन और सत्यनारयण पटेल आमने-सामने थे और तब ताई की जीत का अंतर मात्रा 11480 वोट था, जो की उनकी अब तक की चुनावी जीत में सबसे कम था।

 

चुनावी मैदान में सुमित्रा महाजन ने इन दिग्गजों को हराया
1989 - प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी को 1,11614 वोटों से हराया।
1991 - दूसरे चुनाव में ललित जैन को 3, 36037 वोटों से शिकस्त दी।
1996 - कांग्रेस के पूर्व महापौर मधु वर्मा को 1,04433 वोटों से पराजित किया।
1998- कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी को 49,852 से हराया।
1999 - पूर्व मंत्री महेश जोशी को 1,31315 वोटों से पराजित किया।
2004 - पूर्व मंत्री रामेश्वर पटेल को 1,93936 वोटों से हराया।
2009 -  सत्यनारायण पटेल को 11480 वोटों से हराया।
2014- विधायक सत्यनारायण पटेल को 466901 वोटों से हराया।

 

इंदौर लोकसभा सीट 1952 से लेकर 2014 तक
1952 :
नंदलाल सूर्यनारायण जोशी (कांग्रेस)।
1957 : कन्हैयालाल खादीवाला (कांग्रेस) ने किशोरीलाल (भारतीय जनसंघ) को हराया।
1962 : होमी एफ दाजी (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) ने रामसिंह भाई करनसिंह (कांग्रेस) को हराया।  
1967 : प्रकाश चंद सेठी (कांग्रेस) ने होमी दाजी (स्वतंत्र) को हराया।
1971 : प्रकाश चंद सेठी (कांग्रेस) ने सत्यभान सिंघल (भारतीय जनसंघ) को हराया।
1975 उपचुनाव : राम सिंह भाई (कांग्रेस) ने कल्याण जैन (सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया) को हराया।
1977 : कल्याण जैन (भारतीय लोक दल) ने नंदकिशोर भट्‌ट (कांग्रेस) को हराया।
1980 : प्रकाश चंद सेठी (कांग्रेस-ई) ने शीलकुमार निगम (जेएनपी) को हराया।
1984 : प्रकाश चंद सेठी (कांग्रेस) ने राजेन्द्र निलकंठ धारकर (भाजपा) को हराया।

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