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इंदौर / सास का हाथ पकड़कर ऑफिस तक लाईं नई एसएसपी, पैर छूकर संभाली नई जिम्मेदारी



एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र अपनी सास को लेकर कार्यालय पहुंचीं। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र अपनी सास को लेकर कार्यालय पहुंचीं।
एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र
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एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र अपनी सास को लेकर कार्यालय पहुंचीं।एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र अपनी सास को लेकर कार्यालय पहुंचीं।
एसएसपी रुचिवर्धन मिश्रएसएसपी रुचिवर्धन मिश्र

  • शहर की पहली महिला एसएसपी ने किया पदभार ग्रहण, कहा - अपराध नियंत्रण पहली प्राथमिकता
  • वर्ष 2006 की आईपीएस बैच की टॉपर और अचूक निशानेबाज हैं मिश्र, मूल रूप से सतना की रहने वाली

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 08:32 AM IST

इंदौर. शहर की पहली महिला एसएसपी रुचि वर्धन मिश्र ने मंगलवार को इंदौर पुलिस की कमान संभाल ली। वे सुबह 11 बजे कार से कलेक्टर पति शशांक, बेटे और सास के साथ डीआईजी कार्यालय पहुंचीं। सास को खुद हाथ पकड़कर ऑफिस तक ले गईं।

 

डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने उनका स्वागत किया और चार्ज सौंपा। एसएसपी ने पहले सास के पैर छुए। फिर नई जिम्मेदारी संभाली। बाद में वे एडीजी वरुण कपूर के कार्यालय पहुंचीं। वर्ष 2006 की आईपीएस बैच की टॉपर और अचूक निशानेबाज रुचि वर्धन मूल रूप से सतना की रहने वाली हैं।

 

वे होशंगाबाद में एसपी और भोपाल व राजगढ़ में एएसपी रह चुकी हैं। भोपाल की ही सबसे प्रमुख सातवीं बटालियन में कमांडेंट भी रही थीं। उनके पति शशांक मिश्र उज्जैन कलेक्टर हैं। उनकी एक बेटी है।

 

मिश्र बताती हैं कि मुझे शुरू से ही कुछ अलग करने का जुनून था। मेरा आईएएस और आईपीएस दोनों के लिए चयन हो गया था। पहले अटैम्प्ट में ही आईपीएस का इंटरव्यू क्लियर कर लिया था। आईपीएस को चैलेंजिंग जॉब मानकर इसे चुना। इसमें फील्ड में हमेशा देश के लिए कुछ करने के अवसर मिलते हैं।

 

शूटिंग कॉम्पिटिशन में 10 में से 10 नंबर लाईं
मिश्र बताती हैं कि 2006 में वे दिल्ली की जेएनयू यूनिवर्सिटी में एमए और एमफील की पढ़ाई करने के साथ यूपीएससी परीक्षा में भी सेलेक्ट हुई। उनकी ऑल इंडिया में 67वीं रैंक थी। आईपीएस बनने के बाद तीन महीने की इंडक्शन ट्रेनिंग मसूरी में मिली। फिर हैदराबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस एकेडमी में ट्रेनिंग ली। यूपीएससी परीक्षा के नंबरों सहित दो साल की ट्रेनिंग के नंबर का टोटल मिलाने पर मिश्र को एकेडमी की बैच ऑफ टॉपर का अवॉर्ड और ट्रॉफी भी मिली। इसी ऑफिसर मीट में हुए शूटिंग कॉम्पिटिशन में 10 में से 10 नंबर लाकर अचूक निशाने लगाने पर उन्हें पहला अवॉर्ड मिला था।

 

गैंग रेप के दो मामलों में 12 को सजा दिलवाने में अहम भूमिका
भोपाल में नवंबर 2016 में यूपीएससी की छात्रा से गैंग रेप के मामले में जांच अधिकारी रहते उन्होंने कोर्ट के आदेश पर डे-बाय-डे चैलेंज मिलने पर जांच पूरी कर चार्जशीट पेश की थी। इसमें सभी चारों आरोपियों को कोर्ट ने दिसंबर 2017 में आजीवन सजा सुनाई थी। वे भोपाल में ही रेलवे एसपी रही थीं।  भोपाल रेलवे स्टेशन पर 2016 में 13 वर्षीय बच्ची से आठ युवकों ने गैंग रेप किया था। आठों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

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