44% लोग अब भी खुले में शौच कर रहे हैं: रिपोर्ट

Indore News - इस रिपोर्ट के मुख्य शोधकर्ता और पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के डेमोग्राफर आशीष गुप्ता ने दैनिक भास्कर से कहा कि...

Jan 09, 2019, 03:46 AM IST
इस रिपोर्ट के मुख्य शोधकर्ता और पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के डेमोग्राफर आशीष गुप्ता ने दैनिक भास्कर से कहा कि ग्रामीण भारत में खुले की सोच की समस्या की मुख्य वजह जातिवाद और छुआछूत है। ऐसे में इसे खत्म करने के लिए जातिवाद पर वार करना होगा। लोग मानते हैं कि टॉयलेट की सफाई एक विशेष तबके का काम है। आशीष कहते हैं कि सर्वे में 56% लोगों ने कहा कि टॉयलेट बनवाने या खुले में शौच से रोकने के लिए उनके गांव के लोगों को प्रताड़ित किया गया। बिहार में पुलिस ने एक शख्स को जेल में डाल दिया। एेसी ही चार किस्से...

टॉयलेट होने के बावजूद 23% लोग खुले में शौच कर रहे, इनमें 20% महिलाएं और 25% पुरुष



रिसर्च
टेक्सास यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिस्ट डीन स्पीयर्स और सोशल साइंटिस्ट डाऐन कॉफी ने भारत में खुले में शौच से हो रहे नुकसानों पर रिसर्च की है। इसके मुताबिक...



इंदौर की बेगन्दा ग्राम पंचायत ने खुले में शौच जाने पर जुर्माना और राशन रोकने के नियम बनाए।





जबकि, सरकार राजस्थान, मध्य प्रदेश को ओडीएफ घोषित कर चुकी; यूपी-बिहार में जल्द ही घोषणा संभव

देश को जल्दबाजी में ओडीएफ घोषित करने से नुकसान होगा

इस शोध से जुड़े नजर खालिद कहते हैं कि सरकार आधी-अधूरी तैयारी के साथ इस साल देश को खुले में शौच मुक्त घोषित करना चाहती है। इससे टॉयलेट इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम बंद हो जाएंगे। मध्य प्रदेश और राजस्थान इसके सटीक उदाहरण हैं। यहां अब टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चे खुले में शौच में होने वाली बीमारियों के चलते मरते रहेंगे।

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