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44% लोग अब भी खुले में शौच कर रहे हैं: रिपोर्ट

2 वर्ष पहले
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इस रिपोर्ट के मुख्य शोधकर्ता और पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के डेमोग्राफर आशीष गुप्ता ने दैनिक भास्कर से कहा कि ग्रामीण भारत में खुले की सोच की समस्या की मुख्य वजह जातिवाद और छुआछूत है। ऐसे में इसे खत्म करने के लिए जातिवाद पर वार करना होगा। लोग मानते हैं कि टॉयलेट की सफाई एक विशेष तबके का काम है। आशीष कहते हैं कि सर्वे में 56% लोगों ने कहा कि टॉयलेट बनवाने या खुले में शौच से रोकने के लिए उनके गांव के लोगों को प्रताड़ित किया गया। बिहार में पुलिस ने एक शख्स को जेल में डाल दिया। एेसी ही चार किस्से...

टॉयलेट होने के बावजूद 23% लोग खुले में शौच कर रहे, इनमें 20% महिलाएं और 25% पुरुष

सर्वे के मुताबिक घर में टॉयलेट होने के बाद भी करीब 20% महिलाएं और 25% पुरुष खुले में जा रहे हैं। 4 साल पहले किए सर्वे में यही स्थिति थी। स्वच्छ भारत मिशन कुछ हद तक लोगों के घरों में टॉयलेट बनाने में तो सफल रहा है। पर लोगों को टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित या जागरूक नहीं कर सका है।

सरकार का दावा है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में खुले में शौच में जाना लगभग बंद हो गया है। पर इस सर्वे के मुताबिक यूपी में 39%, बिहार में 60%, मध्य प्रदेश में 25% और राजस्थान में 53% लोग खुले में शौच कर रहे हैं। यानी कुल मिलाकर इन राज्यों में औसतन 44% खुले में शौच के लिए जा रहे हैं।

रिसर्च खुले में शौच से भारत में हर साल 2 लाख बच्चों की मौत हो जाती है

टेक्सास यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिस्ट डीन स्पीयर्स और सोशल साइंटिस्ट डाऐन कॉफी ने भारत में खुले में शौच से हो रहे नुकसानों पर रिसर्च की है। इसके मुताबिक... हर साल भारत में करीब 2 लाख बच्चे अपने आसपास के लोगों के खुले में शौच जाने की वजह से अपना पांचवा जन्मदिन नहीं मना पाते ।

खुले में शौच में होने वाले संक्रमण के चलते ही दूसरे गरीब देशों की तुलना में भारत के बच्चों की लंबाई कम है।

दुनियाभर में की गई रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि औसतन लंबे लोग छोटे कद के लोगों से ज्यादा पैसे कमाते हैं। इस समस्या को खत्म करना भारत की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है।

स्पीयर्स ने शोध में पाया कि खुले में शौच से पैदा होने वाले कीटाणुओं से बच्चों की शारीरिक ही नहीं मानसिक विकास पर भी असर पड़ रहा है।

इंदौर की बेगन्दा ग्राम पंचायत ने खुले में शौच जाने पर जुर्माना और राशन रोकने के नियम बनाए।

यूपी के कई स्वच्छाग्रही ने बताया, ‘डीएम साहब का निर्देश है कि अगर टॉयलेट बनवाने के लिए कोई नहीं मानें तो उसका राशन बंद कर दो। डराने के लिए कुछ तो करो।’

राजस्थान में हमें सुनने को मिला कि घर में अगर टॉयलेट नहीं है तो राशन, पेंशन और अन्य सरकारी मदद के अलावा बच्चों का नाम भी स्कूल से काट दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश में एक सरपंच ने बताया कि टॉयलेट न बनवाने वाले लोगों के पास पुलिस को ले जाना पड़ा। उनसे कहा गया कि अगर टॉयलेट नहीं बनवाओगे तो जेल में डाल देंगे।

बिहार में एक सरपंच ने बताया कि खुले में शौच के लिए जाते एक शख्स को पुलिस ने पकड़कर 15 दिनों तक जेल में रखा। परिवार को से छुड़ाने के लिए 10 हजार घूस देनी पड़ी।

जबकि, सरकार राजस्थान, मध्य प्रदेश को ओडीएफ घोषित कर चुकी; यूपी-बिहार में जल्द ही घोषणा संभव

देश को जल्दबाजी में ओडीएफ घोषित करने से नुकसान होगा

इस शोध से जुड़े नजर खालिद कहते हैं कि सरकार आधी-अधूरी तैयारी के साथ इस साल देश को खुले में शौच मुक्त घोषित करना चाहती है। इससे टॉयलेट इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने वाले कार्यक्रम बंद हो जाएंगे। मध्य प्रदेश और राजस्थान इसके सटीक उदाहरण हैं। यहां अब टॉयलेट इस्तेमाल करने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बच्चे खुले में शौच में होने वाली बीमारियों के चलते मरते रहेंगे।

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