90 लाख यूनिट्स खून ही उपलब्ध हो पाता है हर साल, जबकि जररूत 1 करोड़ 20 लाख यूनिट्स की पड़ती है।

Indore News - वियतनाम के स्वास्थ्य विभाग ने संसद में रक्तदान संबंधी एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसके तहत यहां के हर एक स्वस्थ...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:45 AM IST
Indore News - mp news 9 million units of blood is available only every year while in the form of 12 million units
वियतनाम के स्वास्थ्य विभाग ने संसद में रक्तदान संबंधी एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसके तहत यहां के हर एक स्वस्थ वयस्क नागरिक के लिए रक्तदान अनिवार्य था। चौंकाने वाली बात यो यह है कि भारत में तो ऐच्छिक रक्तदान का आंकड़ा जनसंख्या की तुलना में 0.75 फीसदी ही है। जानिए देश तथा दुनिया में रक्तदान से जुड़े ऐसे ही तथ्य।

देश में

01 लाख से ज्यादा थैलीसिमिया के मरीज हैं, जिन्हें बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है।

10 हजार बच्चे हर साल थैलीसिमिया जैसी बीमारी के साथ पैदा होते हैं और इनमें से कई को वक्त पर खून नहीं मिल पाता है।

48 के करीब जिले ऐसे हैं, जहां ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा अब भी उपलब्ध नहीं है।

01 लाख रक्त यूनिट की आवश्यकता पड़ती है दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हर साल, महज 30 फीसदी जुट पाती है।

10 करोड़ लोग हर साल रक्तदान करते हैं, लेकिन इनमें से आधे विकसित देशों से होते हैं।

60 फीसदी श्रीलंका में, 95 फीसदी थाईलैंड में, 77% इंडोनेशिया में और 60 फीसदी म्यांमार में है स्वैच्छित रक्तदान का आंकड़ा।

दुनिया में

59 फीसदी रक्तदान ही स्वैच्छिक होता है, जानकारों के अनुसार भारत में, जबकि दिल्ली में स्वैच्छिक रक्तदान केवल 32 फीसदी है।

60 देश ऐसे हैं, जहां रक्तदान 100 फीसदी लोगों की इच्छा से होता है, रक्तदान करने वाले कोई पैसा नहीं लेते।

73 देश ऐसे हैं, जहां मरीजों को खून के लिए परिवार वालों पर या पैसा लेकर रक्त देने वालों पर निर्भर रहना पड़ता है।

90 फीसदी मांग कुल रक्त की स्वैच्छिक रक्तदान से पूरी होती है नेपाल में।

Expert

डॉ. मुकेश दुबे, इंदौर

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