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एक एकड़ खेती की जमीन खरीदने पर 25 लाख रुपए तक की बचत होगी

2 वर्ष पहले
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10 साल से पुराने मकान की कीमत में भी आठ फीसदी तक आएगी कमी

भास्कर संवाददाता| इंदौर. पंजीयन विभाग ने प्रॉपर्टी की गाइडलाइन के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। 2003 के बाद हुए इस बदलाव के कारण 1 अप्रैल से खेती की जमीन की कीमतों में भारी कमी होगी। इंदौर नगरीय सीमा के गांवों की खेती की जमीन की कीमत लगभग 25 लाख रु. प्रति एकड़ तक कम हो जाएगी। 10 साल से अधिक पुराने मकान की निर्माण लागत के मूल्यांकन के नियम में भी बड़ा बदलाव किया गया है, इससे जितना पुराना मकान होगा, अब उसकी कीमत में उसी तुलना से कम होती जाएगी। इसमें करीब 8% तक की कमी हो सकेगी। पंजीयक अभिभाषक समिति के अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी ने बताया कि इस बदलाव से खेती की जमीन के वास्तविक खरीदारों को कीमत और पंजीयन ड्यूटी में छूट से दोहरा लाभ होगा। शेष|पेज 12 पर

इस तरह बदले गए नियम

खेती की जमीन को लेकर

- अभी नियम है कि नगरीय सीमा में खेती की जमीन खरीदने पर एक हजार वर्गमीटर जमीन की कीमत आवासीय या व्यावसायिक भूखंड की दर से लगती है। बाकी जमीन का खेती के भाव से वैल्यूशन किया जाता है। नगरीय सीमा के बाहर लगे गांव में 500 और नगर परिषद क्षेत्र में 300 वर्गमीटर जमीन पर आवासीय व व्यावसायिक भूखंड के दाम लगते हैं।

- ... लेकिन उपबंध में बदलाव किया गया है कि नगरीय सीमा में पहले 400 मीटर तक ही आवासीय व व्यावसायिक भूखंड के दाम लगेंगे। 401 से 700 वर्गमीटर तक आवासीय, व्यावसायिक भूखंड की दर का 80% और बाद में 701 से 1000 वर्गमीटर तक इस दर का 60% ही जोड़ा जाएगा। नगरीय सीमा के बाहर पहले 200 वर्गमीटर और नगर परिषद क्षेत्र में 120 वर्गमीटर तक आवासीय, व्यावसायिक भूखंड की दर लगेगी। बाद में खेती की जमीन का ही भाव लगेगा।

इस तरह होगा लाभ

पंजीयन वकील सतनाम सिंह छाबड़ा ने बताया कि छोटा बांगड़दा में एक एकड़ जमीन अभी एक करोड़ 33 लाख रुपए की पड़ती है (पहले एक हजार वर्गमीटर जमीन 5400 रुपए के हिसाब से 54 लाख और बाद की जमीन खेती के भाव से 79 लाख की होती है)। नए नियम से यह जमीन केवल एक करोड़ 11 लाख की पड़ेगी (पहले 400 वर्गमीटर 5400 से 21.60 लाख की होगी। बाद में खेती के भाव लगेंगे)। यानी, सीधे 21 लाख कम कीमत की होगी। इस पर 10.30 फीसदी की दर से स्टाम्प ड्यूटी व पंजीयन शुल्क कम लगेगा। यानी, यहां भी दो लाख 16 हजार रुपए की बचत होगी। इस तरह जहां जमीन का ज्यादा भाव होगा, वहां ज्यादा बचत होगी।

पुराने मकान खरीदी में इस तरह होगी बचत

अभी यह है नियम

- 20 साल से अधिक पुराना मकान होने पर निर्माण लागत 10% और 50 साल से अधिक पुराना होने पर लागत दर 20% कम मानी जाती है। मान लें- 100 वर्गमीटर के प्लॉट पर 200 वर्गमीटर में बना 40 साल पुराना मकान 50 लाख का है। इसमें 30 लाख का प्लाॅट हो गया। 10 हजार रुपए प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत से इसकी कुल लागत 20 लाख है। वर्तमान नियम से इस मकान पर निर्माण लागत 20 के बजाय 18 लाख मानी जाएगी। यानी, मकान 48 लाख का हुआ।

- ... लेकिन नए नियम में 10 से 55 साल तक पुराने मकान के लिए स्लैब में अलग-अलग कटौती की गई है। जैसे- 40 साल का मकान होने पर 50 लाख के मकान में निर्माण लागत (20 लाख) में 30% यानी छह लाख रुपए की कम हो जाएगी। मकान की कीमत 44 लाख रह जाएगी। इसी हिसाब से फिर स्टाम्प ड्यूटी में भी छूट मिलेगी।

पुराने मकान में ये है निर्माण लागत में कटौती का स्लैब

मकान पुराना निर्माण लागत में कटौती

10 से 20 साल 10%

20 से 25 साल 15%

25 से 30 साल 20%

30 से 35 साल 25%

35 से 40 साल 30%

40 से 45 साल 35%

45 से 50 साल 40%

50 से 55 साल 45%

55 साल से अधिक पुराना मकान 50%

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