गांव के अस्पतालों में एक साल काम करने वाले डॉक्टरों का वेतन कर दिया दोगुना

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:55 AM IST

Indore News - प्रदेश सरकार ने गांवों के अस्पतालों में एक साल काम करने वाले डॉक्टरों का वेतन बढ़ाकर लगभग दोगुना कर दिया है। अभी तक...

Indore News - mp news doctors of one year working in village hospitals doubled their salary
प्रदेश सरकार ने गांवों के अस्पतालों में एक साल काम करने वाले डॉक्टरों का वेतन बढ़ाकर लगभग दोगुना कर दिया है। अभी तक ग्रामीण सेवा गारंटी अनुबंध के तहत एमबीबीएस, पीजी डिप्लोमा और पीजी डिग्रीधारी डॉक्टरों को 26 हजार, 36 हजार और 38 हजार दिए जाते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत 55 हजार, 57 हजार और 59 हजार दिए जाएंगे। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज से पास होने के बाद ग्रामीण सेवा अनुबंध की शर्तों के तहत एमबीबीएस और पीजी डॉक्टरों को ग्रामीण सेवा अनिवार्य की गई है। वैसे जितने डॉक्टरों को गांवों में पदस्थ किया जाता है, उनमें से 50 फीसदी भी गांवों में नहीं जाते।

गौरतलब है कि निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में सरकारी मेडिकल कॉलेज में बेहद कम शुल्क देना पड़ता है। राज्य सरकार सब्सिडी पर छात्रों के लिए एमबीबीएस और पीजी पाठ्यक्रम संचालित करती है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को ग्रामीण सेवा गारंटी बॉण्ड भरना पड़ता है, जिसके तहत उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद कम से कम एक साल तक ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल में काम करना अनिवार्य है। हालांकि इस व्यवस्था के बावजूद अस्पतालों की हालत बेहतर नहीं हुई है। पढ़ाई करने के बाद डॉक्टर्स गांव नहीं जाना चाहते। सुविधाओं का अभाव भी इसकी एक वजह है।

गारंटी बॉण्ड के तहत पैसा जमा करा कर वापस पा लेते हैं मूल दस्तावेज

वैसे पिछले दस साल के रिकार्ड देखें स्वास्थ्य विभाग मेडिकल कॉलेजों से सूची लेकर पास होने वाले डॉक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ करती हैं, लेकिन उनमें से आधे से ज्यादा जॉइन नहीं करते। कुछ डॉक्टर्स बैंक गारंटी बॉण्ड के तहत पैसा जमा करा कर मूल दस्तावेज वापस पा लेते हैं। जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल कर पिछले साल स्टायपेंड की राशि बढ़वा ली थी।

भास्कर संवाददाता | इंदौर

प्रदेश सरकार ने गांवों के अस्पतालों में एक साल काम करने वाले डॉक्टरों का वेतन बढ़ाकर लगभग दोगुना कर दिया है। अभी तक ग्रामीण सेवा गारंटी अनुबंध के तहत एमबीबीएस, पीजी डिप्लोमा और पीजी डिग्रीधारी डॉक्टरों को 26 हजार, 36 हजार और 38 हजार दिए जाते थे, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत 55 हजार, 57 हजार और 59 हजार दिए जाएंगे। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज से पास होने के बाद ग्रामीण सेवा अनुबंध की शर्तों के तहत एमबीबीएस और पीजी डॉक्टरों को ग्रामीण सेवा अनिवार्य की गई है। वैसे जितने डॉक्टरों को गांवों में पदस्थ किया जाता है, उनमें से 50 फीसदी भी गांवों में नहीं जाते।

गौरतलब है कि निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में सरकारी मेडिकल कॉलेज में बेहद कम शुल्क देना पड़ता है। राज्य सरकार सब्सिडी पर छात्रों के लिए एमबीबीएस और पीजी पाठ्यक्रम संचालित करती है। सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को ग्रामीण सेवा गारंटी बॉण्ड भरना पड़ता है, जिसके तहत उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद कम से कम एक साल तक ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पताल में काम करना अनिवार्य है। हालांकि इस व्यवस्था के बावजूद अस्पतालों की हालत बेहतर नहीं हुई है। पढ़ाई करने के बाद डॉक्टर्स गांव नहीं जाना चाहते। सुविधाओं का अभाव भी इसकी एक वजह है।

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