ईओडब्ल्यू ने कहा- राठौर को बचाने वालों का नाम बताओ, सहआरोपी बनाएंगे

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:50 AM IST

Indore News - ईओडब्ल्यू के छापे में 25 करोड़ से ज्यादा के आसामी निकले नगर निगम के भ्रष्ट अफसर अभय राठौर से जुड़ी कई जानकारियां नगर...

Indore News - mp news eow said tell rathore the name of those who saved will make co operation
ईओडब्ल्यू के छापे में 25 करोड़ से ज्यादा के आसामी निकले नगर निगम के भ्रष्ट अफसर अभय राठौर से जुड़ी कई जानकारियां नगर निगम से गायब कर दी गई हैं। निगम अफसर पिछले सात दिनों से उसकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन दस्तावेज नहीं मिल रहे। अब नोटशीट ढूंढी जा रही है, जिससे सभी जानकारियों की कड़ियां स्थापित की जा सकें। इधर, ईओडब्ल्यू ने निगम को फाइनल रिमाइंडर भेजकर पूछा है कि राठौर की जानकारी कौन अफसर छुपा रहा है, उसका नाम बताएं, ताकि उसे भी सहआरोपी बना सकें।

ईओडब्ल्यू ने पिछले साल अक्टूबर में राठौर के घर पर छापा मारा था। तब से अब तक अलग-अलग पड़ताल में उनकी और रिश्तेदारों की 25 करोड़ की संपत्ति सामने आ चुकी है। राठौर पर जल यंत्रालय में रहते हुए 2012 से 2016 के बीच टैंकरों से अवैध रूप से कमाई कर संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। ईओडब्ल्यू को दस टैंकरों की जानकारी मिली थी, जिसे राठौर ने ही निगम में लगवाया था। इसके अलावा भी कई टैंकरों की सूचना है। इस संबंध में ईओडब्ल्यू निगम से सात महीने से जानकारी मांग रहा है और 7 रिमाइंडर दे चुका है। अफसरों ने एक भी रिमाइंडर का न तो जवाब दिया और न ही जानकारी भेजी। पिछले दिनों भास्कर द्वारा इसका खुलासा करने के बाद निगमायुक्त ने जानकारी भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जो जानकारी ईओडब्ल्यू को भेजने के लिए तैयार की गई, वह अधूरी थी। उसमें ईओडब्ल्यू के पूछे सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे थे। हफ्तेभर से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन निगम में इससे जुड़ी कोई फाइल नहीं मिल रही।

नोटशीट से जोड़ेंगे कड़ियां

नगर निगम में टैंकरों को किए भुगतान की जानकारी लॉग बुक में होती है। 10 में से एक भी टैंकर की लॉग बुक अफसरों को नहीं मिल रही है। ऐसे में इस जानकारी को चेक करने का दूसरा जरिया होता है नोटशीट। अब नोटशीट देखी जा रही है, जिससे ईओडब्ल्यू को दी जाने वाली जानकारी एकत्र कर निगमायुक्त के सामने पेश की जाए।

जानकारी देने में क्यों लग रहा इतना समय?

ईओडब्ल्यू की तरफ से हाल ही में निगम को फाइनल रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें पूछा गया है कि जानकारी भेजने में इतना समय क्यों लग रहा, यह जानकारी किस अधिकारी के अधीन थी। इसके लिए जिस अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है, उसका नाम उजागर करें, ताकि कोर्ट को इससे अवगत करवा सकें। सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के मुताबिक, अगर कोई विभाग किसी कर्मचारी की जानकारी जांच एजेंसियों को नहीं देता है तो उस पर भी कार्रवाई की जा सकती है। अगर अफसर नाम जारी कर देते हैं तो उसे भी सहआरोपी बनाया जा सकता है।

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