मनमोहनी धुनाें के सर्जक की सुरीली याद

Indore News - दुनिया ए फ़ानी से सन् 1975 में रुख़सत होने के बाद संगीतकार मदनमोहन की याद बरस-दर-बरस और गाढ़ी होती जाती है। इस बात का सुबूत...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:50 AM IST
Indore News - mp news harmonious remembrance of manmohani smack
दुनिया ए फ़ानी से सन् 1975 में रुख़सत होने के बाद संगीतकार मदनमोहन की याद बरस-दर-बरस और गाढ़ी होती जाती है। इस बात का सुबूत जाल ऑडिटोरियम में देखा जा सकता था जहां 275 कुर्सियों के लिये दाेगुनी तादात में संगीतरसिक मौजूद थे। स्वरदा की मेज़बानी में ‘तू जहां-जहां चलेगा’ उन्वान से मंसूब संगीत निशा में मनमोहिनी धुनों के सर्जक की सुरीली याद थिरक रही थी।

मदनमोहन का संगीत कुछ ऐसा जादुई है जहां साज़ और शायरी हमसफ़र होकर एक बेजोड़ तिलिस्म रच देते हैं। स्वरदा की महफ़िल का तक़रीबन हर गीत ऐसा था जो सुनकारों को फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर की यादों की सैर करवाता रहा। इसका बड़ा श्रेय की-बोर्ड वादक अभिजीत गौड़ और रवि सालके को देना होगा जिन्होंने पूरी तन्मयता से सितार, बांसुरी, वॉयलिन्स के वैभव को अपने इलेक्ट्रॉनिक बाजों पर जीवंत किया। पवन सेम ने तबले, रवि खेड़े ने ढोलक, अनूप कुलपारे ऑक्टोपैड-कांगो और सचिन परमार ने गिटार पर मदनमोहन की धुनों को असर पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मोना ठाकुर ने संचालन किया.

स्वरदा की पेशकश के प्रमुख स्वर थे सपना केकरे और राजेन्द्र गलगले। दोनों मदनमोहन गीतिधारा की रसधार श्रोताओं तक पहुंचाने में क़ामयाब रहे। हम प्यार में जलने वालों को चैन कहां, कैसे कटेगी ज़िंदगी तेरे बग़ैर-तेरे बग़ैर, ज़मी से हमें आसमां पर, रुके रुके से क़दम, आज सोचा तो आंसू भर आए, नैनो में बदरा छाए, मेरी आवाज़ सुनो और मैं निगाहें तेरे चेहरे से हटाऊं कैसे जैसे सुपर हिट गीतों को सुनते हुए श्रोता-बिरादरी मदनमोहन की मौसीक़ी की महक साथ लेकर लौटी।

सपना केकरे और राजेन्द्र गलगले ने गीतों की प्रस्तुति दी।

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