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प्रदेश में 27.5% शहरी और 20.1% ग्रामीण आबादी को हाई ब्लड प्रेशर

एक वर्ष पहले
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एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि प्रदेश की 27.5 फीसदी शहरी और 20.1 फीसदी ग्रामीण आबादी हाई ब्लड प्रेशर की शिकार है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है जो अपने साथ दूसरी बीमारियां भी लाती है। बीते एक दशक से इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। देश की बात करें तो 25.3 फीसदी लोग इससे पीड़ित हैं। महिलाओं की तुलना में पुरुष इससे अधिक प्रभावित होते हैं। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज स्टडीज के अनुसार बीपी के कारण 2016 में 1.63 मिलियन लोगों की मौत हुई। करीब 30 फीसदी लोगों को ही पता होता है कि वे इस बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें से 10 फीसदी लोग ही इलाज लेते हैं।

ऑफिस में बीपी ज्यादा होता है, लेकिन बाद में सामान्य हो जाता है : हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अल्केश जैन ने बताया तनाव व भय के कारण यह समस्या होना आम बात है। इस कारण कई बार बीपी की रीडिंग गलत आ जाती है। इसे वाइट कोट हार्इपरटेंशन कहते हैं। इस कारण व्यक्ति अनावश्यक दवा ले लेता है, जबकि वास्तव में उसका बीपी सामान्य होता है। इसलिए एम्बुलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग का उपयोग किया जाता है। इसे मरीज 24 घंटे तक साथ रख सकता है। यह 15 से 30 मिनट में मरीज के बीपी की रिकॉर्डिंग करता है। इससे बीपी का सही पैटर्न पता चलता है। जरूरी है।

बीपी का असर हार्ट और गुर्दे पर भी पड़ता है

कार्डियक सर्जन डॉ. मनीष पोरवाल व डॉ. नितिन मोदी ने बताया सामान्य रक्तचाप 80 से 120 तक होता है, लेकिन अगर यह लगातार 90 से 140 तक बना हुआ है, इसका मतलब व्यक्ति हायपरटेंशन का शिकार है। 25 साल की आयु का हर तीसरा व्यक्ति इससे पीड़ित है। इससे बचने के लिए व्यक्ति को महीने में एक बार बीपी की जांच करवाना चाहिए। इंदौर के निजी मेडिकल कॉलेज ने वर्ष 2017 में खातीवाला टैंक क्षेत्र में सर्वे किया था। इसमें 41 फीसदी वयस्क लोगों में हायपरटेंशन निकला। वर्ष 2015 में इंदौर में सर्वे किया गया था। 15 से 50 साल तक की शहरी आबादी में से 12 फीसदी हार्इपरटेंशन के मरीज मिले। ग्रामीण क्षेत्रों में 10 फीसदी इससे पीड़ित हैं। इसके कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गुर्दा और आंखों में परेशानी हो सकती है। इससे बचने के लिए रोज व्यायाम और संतुलित आहार की आदत डालें।

सेहत का ऐसे रखें ख्याल : रोज 30 मिनट पैदल चलकर बच सकते हैं हार्ट अटैक से

हार्इपरटेंशन विश्व में हर साल होने वाली 13 फीसदी मौतों के लिए जिम्मेदार है। हर तीसरा युवा इससे पीड़ित है। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल भराणी व डॉ. अखिलेश जैन ने बताया ज्यादातर मामलों में इसके लक्षण नहीं होते हैं। कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, डायबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, भोजन में ताजे फल तथा सब्जियों का अभाव व मानसिक तनाव इसके कारण हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए रोजाना 30 से 60 मिनट तक पैदल चलना, व्यायाम, वजन कम करना, नमक की मात्रा कम करना चाहिए।

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