अपोलो टॉवर के पास बनेगा मेट्रो का स्टेशन, छप्पन दुकान की ओर से भी आ सकेंगे यात्री

Indore News - मेट्रो ट्रेन के लिए दिल्ली से आई तकनीकी एक्सपर्ट और अफसरों की टीम सोमवार को एमजी रोड का मुआयना करने पहुंची। टीम ने...

Bhaskar News Network

Jul 23, 2019, 08:00 AM IST
Indore News - mp news metro station will be built near apollo tower passengers can also come from chappan shop
मेट्रो ट्रेन के लिए दिल्ली से आई तकनीकी एक्सपर्ट और अफसरों की टीम सोमवार को एमजी रोड का मुआयना करने पहुंची। टीम ने पलासिया चौराहे से हुकुमचंद घंटाघर चौराहा होते हुए शास्त्री ब्रिज तक का दौरा किया और यहां बनने वाले पिलर के लिए स्थान चिह्नित किए। अपोलो टॉवर के पास बनने वाले मेट्रो ट्रेन के स्टेशन के लिए भी टीम ने मार्किंग की।

अफसरों के मुताबिक पलासिया क्षेत्र में मेट्रो ट्रेन साकेत चौराहे से बड़वानी प्लाजा होते हुए पहुंचेगी। यहां से वह एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलेगी और रीगल तिराहे से फिर अंडरग्राउंड हो जाएगी। अफसरों ने एक-एक स्पॉट देखा और फिर आसपास के लोगों से भी बात की। टीम 56 दुकान, अपोलो टॉवर गई और वहां के व्यापारियों को प्रोजेक्ट के बारे में बताया। अफसरों के मुताबिक, अपोलो टॉवर के ठीक पास मेट्रो का स्टेशन बनेगा। इस तक पहुंचने के लिए दो फुटओवर ब्रिज बनेंगे, जिनसे 56 दुकान और शेखर सेंट्रल व तिलक प्रतिमा के पास से यात्री स्टेशन तक पहुंच सकेंगे। टेंडर प्रक्रिया के बाद काम शुरू करने के लिए एमजी रोड के डिवाइडर वाले हिस्से में बैरिकेड्स लगाए जाएंगे।

टॉवर के दाहिनी तरफ टू व्हीलर पार्किंग में एंट्री बंद हो जाएगी

दोपहर में मेट्रो टीम अपोलो टॉवर पहुंची और व्यापारियों के साथ बैठक की। इसका उद्देश्य टॉवर के रास्ते पर आने वाले समय में लगने वाले बैरिकेड्स की जानकारी देना और उनसे सहयोग लेना था। चूंकि अपोलो टॉवर के पास ही स्टेशन बन रहा है, इसलिए जब भी काम शुरू होगा, टॉवर के दाहिनी तरफ वाले टू व्हीलर पार्किंग में एंट्री बंद हो जाएगी। उसके 15 फीट हिस्से में बैरिकेड्स लगेंगे। व्यापारी एसोसिएशन के सुनील गुप्ता के मुताबिक, टीम ने हमसे काम के दौरान सहयोग करने को कहा है। बाकी वे यहां मार्किंग और सर्वे करके गए हैं। मालूम हो, मंत्री जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में मेट्रो ट्रेन को इंदौर से उज्जैन तक बढ़ाने की बात कही थी। इसे लेकर भास्कर ने इंदौर निगमायुक्त आशीष सिंह से बात की। उन्होंने बताया इससे इंदौर के प्रोजेक्ट को ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इंदौर से उज्जैन तक मेट्रो चलाने का प्रोजेक्ट बहुत बड़ा होगा। इसके लिए डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। सर्वे सहित अन्य प्रक्रिया पूरी करने में ही कम से कम दो साल का समय लगना तय है। एक बार इसकी स्थिति तय हो जाए तो इंदौर में जहां सांवेर रोड पर उज्जैन से मिलने का जंक्शन बनेगा, वहां जरूर चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। इसके लिए टेक्निकल टीम एनालिसिस कर रही है। यानी मेट्रोपॉलिटन एरिया बनने के बाद भी किसी महापौर, सरपंच के अधिकारों में कटौती नहीं होगी।

प्लान : काम शुरू होते ही टॉवर के दाहिनी ओर टू व्हीलर पार्किंग में एंट्री बंद होगी

अपोलो टॉवर के पास यहीं कहीं बनेगा मेट्रो ट्रेन के लिए स्टेशन। पलासिया क्षेत्र में मेट्रो ट्रेन साकेत चौराहे से बड़वानी प्लाजा होते हुए पहुंचेगी

हैदराबाद, अमरावती, अहमदाबाद के मॉडल पर बनेगा इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया, दो हजार वर्ग किमी में होगा विकास


इंदौर | इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी एरिया बनाने के लिए सरकार तीन शहरों अहमदाबाद, अमरावती और हैदराबाद के मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है। सरकार सबसे पहले एक्ट बनाएगी और फिर महानगर योजना समिति और काउंसिल का गठन होगा। योजना समिति का दायरा इंदौर, महू, देवास, पीथमपुर तक सीमित था, लेकिन रविवार को विधानसभा में नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह ने ऐलान किया कि इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में अब उज्जैन भी शामिल होगा। इससे नया क्षेत्र करीब दो हजार वर्ग किमी का हो जाएगा। इसमें तीन शहरों इंदौर, देवास, उज्जैन के महापौर, दो संभागायुक्त, चार कलेक्टर और दर्जनों नगर पंचायतों, पालिकाओं के अध्यक्ष सदस्य के रूप में शामिल होंगे। महानगर योजना समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। पीथमपुर, महू, देवास, उज्जैन और इंदौर की किसी भी विकास योजना के लिए इस समिति की मुहर लगना जरूरी होगी। इसके बाद काम संबंधित निगम या पालिका ही करेगी।

विशेषज्ञ बोले : मेट्रो सिटी का मॉडल किसी भी शहर का अपना सकते हैं

मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी सिटी के लिए लंबे समय से काम कर रहे अजीतसिंह नारंग के मुताबिक, ये सारी व्यवस्थाएं 74वें संशोधन में शामिल हैं। सरकार मेट्रो सिटी का मॉडल किसी भी शहर का अपना सकती है, पर संवैधानिक व्यवस्था में योजना समिति सबसे सशक्त होगी। उसको तकनीकी सलाह मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट काउंसिल देगी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नगर निगमों की होगी।

असर : उज्जैन जुड़ने से बड़ा हो जाएगा एरिया

उज्जैन के मेट्रोपॉलिटन एरिया में जुड़ने से नॉलेज सिटी, धार्मिक पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने की योजनाएं अब प्रभावी ढंग से लागू हो सकेंगी। इंदौर-उज्जैन का मिलकर डेवलपमेंट प्लान बनेगा। दोनों शहरों के जुड़ने से मेट्रो सिटी का एरिया दो हजार वर्ग किमी के लगभग होगा, जो बेंगलुरू (4 हजार वर्ग किमी) से आधा है। बेंगलुरू का विकास भी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनने के बाद बहुत तेजी से हुआ।

बदलाव : पानी, खदानों, का नए सिरे से बंटवारा

इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया में अब दो संभाग (इंदौर-उज्जैन) व चार जिले (इंदौर, देवास, उज्जैन, धार) आ गए हैं, इसलिए संभव है कि जब महानगर योजना समिति का गठन हो तो प्राकृतिक संसाधनों जैसे नर्मदा और शिप्रा का पानी, इन क्षेत्रों की खदानें और वन क्षेत्र की संपदा का नए सिरे से बंटवारा हो। अगर मेट्रोपॉलिटन एरिया में कहीं पानी पर्याप्त हो और कहीं कम, तो फिर बंटवारा जरूरी हो जाएगा।

पहले एक्ट बनेगा, फिर नोटिफिकेशन : जैन

टीएंडसीपी के डायरेक्टर राहुल जैन के मुताबिक इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया के लिए अमरावती व हैदराबाद और गुजरात के अहमदाबाद की स्टडी की है। अमरावती को गुंटूर और विजयवाड़ा को मिलाकर नई मेट्रो सिटी बनाई जा रही है। उनके मॉडल का सर्वे करवा रहे हैं। सबसे पहला काम तो हमें एक्ट बनाने का करना होगा, उसके बाद मेट्रोपॉलिटन के लिए नोटिफिकेशन होगा।

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