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नाट्योत्सव : फीकी शुरुआत, बुंदेली बोली वाला स्मृति का पुजारी रहा श्रेष्ठ

एक वर्ष पहले
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नाट्योत्सव : फीकी शुरुआत, बुंदेली बोली वाला स्मृति का पुजारी रहा श्रेष्ठ

सिटी रिपोर्टर | इंदौर

संस्था सूत्रधार के बैनर तले शनिवार को दो दिनी एकल नाट्य महोत्सव शुरू हुआ। प्रीतमलाल दुआ सभागृह में हो रहे इस उत्सव के पहले दिन चार प्रस्तुतियां दी गईं। 25 से 30 मिनट की अवधि वाले इन नाटकों को भोपाल की संस्था रंगसमूह के कलाकारों ने खेला। उत्सव की शुरुआत कुछ फीकी रही। अव्वल तो ये मंच नाटक के लिए माकूल नहीं क्योंकि एंट्री-एग्ज़िट के लिए एक ही दरवाज़ा है। दूसरा, दर्शकों की आवाजाही पर, उनके मोबाइल पर बतियाने पर, वहां लोगों से गपियाने पर कोई रोक-टोक नहीं थी। देखनेवालों को इससे रसक्षति होती है। बहरहाल पहले दिन के अंतिम दो नाटक बढ़िया रहे। मुंशी प्रेमचंद की कहानी \\\"स्मृति के पुजारी\\\' और मालती जोशी की कहानी \\\"ऑनर किलिंग\\\' पर दी गई प्रस्तुतियां हर लिहाज़ से उम्दा रहीं।

शुरुआत भीष्म साहनी के नाटक \\\"चीफ की दावत\\\' से हुई। प्रवीण महूवाले के निर्देशन में आलोक गच्छ ने इसे खेला। स्वार्थ के सामने बौने और बेमानी होते रिश्तों का मार्मिक चित्रण है ये कहानी। जहां एक बेटा, बड़ा होकर घर का मुखिया बनता है तो वहीं उसकी अपनी मां उसे किसी बेकार वस्तु की तरह लगती है। ऐसी चीज़ जिसे मेहमानों से छिपाना है और इसलिए उसे कोठरी में ही बंद रहने के सख्त निर्देश हैं। हालांकि बाद में वही वस्तु यानी मां बेटे की खुशी और प्रमोशन का कारण बनती है। दूसरी प्रस्तुति पिंकी लालवानी के अभिनय वाला नाटक मेरी कहानी तेरी कहानी था। कहानी और अभिनय दोनों ही कमजोर थे। ये एक लड़की की कहानी है जो सपने पूरे करने बिना किसी तैयारी के मुंबई पहुंचती है, और वहां गलत लोगों के बीच फंस जाती है। जैसे-तैसे जान बचाकर वो घर लौटती है।

बुंदेली बोली और गीतों संग भाया अरविंद का अभिनय

अरविंद बिलगईंया ने प्रेमचंद की कहानी स्मृति का पुजारी को रंग युक्तियों के साथ मंचित किया। पति-प|ी के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और समर्पण की कहानी कहता है ये नाटक। होरीलाल और उसकी प|ी सरला की इस कहानी में रोमांचक मोड़ तब आता है जब सरला का निधन हो जाता है, और होरीलाल उसकी स्मृतियों के साथ जिंदगी जीना शुरू करता है। दूसरी शादी के सभी प्रस्ताव भी वो ठुकरा देता है। कहानी साधारण है, लेकिन अरविंद ने बुंदेली बोली और गीतों के साथ सधा हुआ अभिनय कर इसे प्रभावी बनाया। ऑनर किलिंग अंतिम प्रस्तुति दी मनुकृति मिश्रा ने। पिता या परिवार के आत्मसम्मान के लिए लड़की के सम्मान का हनन कितना उचित है‌? ये सवाल चिंतनीय है। लड़की के गलत न होने पर भी समाज में अपनी साख बनाए रखने के लिए उसे गलत का साथ देने के लिए दवाब डालना भी ऑनर किलिंग है। दोनों नाटकों का निर्देशन अशोक बुलानी ने किया।

दो दिनी एकल नाट्य महोत्सव के पहले दिन भोपाल के रंगसमूह ने दी चार प्रस्तुतियां, दर्शकों की लगातार आवाजाही खलती रही

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