पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने का मामला अधर में

Indore News - इंदौर/भोपाल

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:50 AM IST
Indore News - mp news police recruitment board case
इंदौर/भोपाल
प्रदेश में पुलिस के पास पर्याप्त बल उपलब्ध नहीं है। जब भी कोई वारदात या बड़ी घटना होती है तो यह बात सामने आती है। जनसंख्या के अनुपात में पुलिस अमले की कमी अपराधों का ग्राफ बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। प्रदेश में अमले की कमी के कारण मुख्यमंत्री, गृहमंत्री चाहकर भी पुलिसकर्मियों को अवकाश नहीं दे पा रहे हैं।

प्रदेश में पुलिस बल की कमी की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने मप्र शासन को वर्ष 2009 में पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने का सुझाव दिया था। मप्र के पुलिस मुख्यालय ने तमिलनाडु राज्य की तर्ज पर बोर्ड बनाने का एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेजा है। यह प्रस्ताव पिछले 5 महीने से गृह विभाग की फाइलों में दबा धूल खा रहा है। जब गृहमंत्री से इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि इसे जल्द अस्तित्व में लाया जाएगा। इधर पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इसे मंजूरी मिलने के बाद पुलिस भर्ती में गुणवत्ता आएगी और चयन प्रक्रिया आसान होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि समय पर भर्ती भी हो पाएगी, जिससे अमले की कमी दूर होगी। मौजूदा अमला तो वीआईपी की सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों की सेवा में ही जुटा रहता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बंगलों पर तैनात अमले को वापस बुलाकर कानून व्यवस्था संभालने में लगा दिया जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। एक अन्य अधिकारी का मानना है कि बंगलों पर तैनात अमले को कानून व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी सौंपना समस्या का तात्कालिक हल है। समस्या का स्थाई निदान नए अमले की भर्ती करना ही है।

फैक्ट फाइल

2009

में केंद्र ने पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने का सुझाव दिया

2019

तक भी मामले की फाइल आगे नहीं बढ़ी

प्रदेश में जब भी कोई बड़ी आपराधिक घटना होती है तो पुलिस का बल कम होने का राग शुरू हो जाता है। जनसंख्या के अनुपात में पुलिस बल कभी भी पर्याप्त नहीं हो सकता है। पुलिस में अमले की कमी है, लेकिन इसे दूर करने के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड की बात लंबे समय से की जा रही है। लेकिन एक दशक से इसकी फाइल पेंडिंग हैं।

फाइल फोटो

पुलिस बोर्ड बनने से पुलिस भर्ती की गुणवत्ता में आएगा सुधार

तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने वर्ष 2009 में अर्द्धशासकीय पत्र लिखकर अनुशंसा की थी कि राज्य शासन को अपना पुलिस भर्ती बोर्ड बनाना चाहिए। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक ड्राफ्ट भी तैयार कर भेजा था, इसके बावजूद मप्र की पुलिस को यह प्रस्ताव बनाने में 10 साल लग गए। अब एक दशक बाद जब प्रस्ताव बनकर तैयार हुआ तो उसे मंजूरी नहीं मिल पा रही है।

इस मामले में पुलिस मुख्यालय का कोई अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। बताया जाता है कि यह प्रस्ताव गृह विभाग में अटका हुआ है। पहले इसे विधानसभा और फिर लोकसभा चुनावों के कारण मंजूरी नहीं मिल पाई। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि सरकार बदलने के साथ प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं, जिसके कारण भर्ती बोर्ड के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। इस प्रस्ताव में पीएचक्यू ने समान वर्दी पहनने वाले विभागों के लिए भी बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करवाने का सुझाव दिया है। जैसे पुलिस, होमगार्ड, वन विभाग, आबकारी विभाग सहित अन्य यूनिफॉर्म वाले विभागों की भर्ती भी इसी बोर्ड से की जा सकती है। इसमें एक डीजी स्तर के अधिकारी को पदस्थ किया जाने का सुझाव है। जबकि अभी पीईबी के जरिए भर्ती की जाती है। यदि बोर्ड अस्तित्व में आ जाएगा तो पुलिस बल की भर्ती में गुणवत्ता आएगी। वैधानिक संस्था होने की वजह से इस बोर्ड को कई अधिकार होंगे।

अमले की कमी जल्द दूर होगीे

 बोर्ड बनाने का प्रस्ताव अभी मेरे सामने नहीं आया है। लेकिन हम पुलिस व्यवस्था को ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए इस तरह के सुझावों पर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। पुलिस अमले की कमी को दूर करने के लिए भी हम चर्चा कर रहे हैं। पुलिस के साप्ताहिक अवकाश को लेकर भी जल्दी ही व्यवस्था बनाएंगे। बाला बच्चन, गृहमंत्री, मप्र शासन

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