Pottery is the New Yoga

Indore News - मि ट्‌टी से बनी चीज़ों के लिए एक बार फिर लोगों का शौक बढ़ा है। अब कई लोग, खासतौर पर लेडीज़ पॉटरी सीख रही हैं। कुछ सेल्फ...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:50 AM IST
Indore News - mp news pottery is the new yoga
मि ट्‌टी से बनी चीज़ों के लिए एक बार फिर लोगों का शौक बढ़ा है। अब कई लोग, खासतौर पर लेडीज़ पॉटरी सीख रही हैं। कुछ सेल्फ टॉट हैं तो कुछ इसकी ट्रेनिंग लेने के बाद प्रैक्टिस कर रही हैं और अब खुद की एग्ज़ीबिशंस लगाने लगी हैं। शहर की ऐसी ही कुछ पॉटर्स जो पिछले कुछ सालों से क्ले आर्ट कर रही हैं उनके पॉटरी से कनेक्शन के बारे में हम आज बता रहे हैं। इनका कहना है कि माटी में कुछ रचना उन्हें वही सुकून देता है जो मेडिटेशन या योग करने से मिलता है।

सोचा नहीं था पॉटरी करूंगी, अब दिन की शुरुआत ही मिट्टी से होती है, वर्कआउट से पहले क्ले आर्ट करती हूं

बिज़नेस में मास्टर्स हैं वानी वैद। एडवर्टाइज़िंग से अपने कॅरियर की शुरुआात की लेकिन ट्रेवलिंग के अपने शौक के लिए जॉब छोड़ दिया। वानी बताती हैं - आर्ट की तरफ झुकाव हमेशा से रहा। कुछ क्रिएटिव करना चाहती थी मैं हमेशा से। इंटरनेशनल पॉटर मुदिता भंडारी जी से मिली तब से माटी से जुड़ाव हुआ। मैंने सोचा ही नहीं था कि मैं कभी क्ले वर्क करूंगी, लेकिन अब दिन की शुरुआत ही मिट्टी तैयार करने से होती है। सुबह जिस वक्त लोग वर्कआउट और मेडिटेशन करते हैं मैं दो घंटे माटी में काम करती हूं। सारे दिन के लिए ऊर्जा मिल जाती है। रात में मैं प्लान करके सोती हूं कि अगले दिन क्या करना है। जितना मज़ा आकार देने में आता है। उतना ही आनंद मिट्‌टी तैयार करने में आता है।

आप वही रचेंगे जो आप हैं, माटी पर आपके मन की ही छाप आएगी, यह विचार कितना भावुक व आध्यात्मिक

वैसे तो एकाग्रता से किया जा रहा कोई भी काम योग के समान है लेकिन ललित कलाओं का मन पर कुछ अलग असर होता है। खासतौर पर मिट्‌टी का। पहली वजह तो ये कि हमारी देह के पांच तत्वों में से मिट्‌टी भी एक है। इसलिए उससे जुड़ाव होना, उसके प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक है। दूसरा ये कि जो निराकार है, धूल है, उसे आप अपने स्पर्श से, भावनाओं से आकार देते हैं। जो आप हैं, वैसा ही रचेंगे। आपके मन का ही प्रतिबिम्ब आप अपने हाथों से माटी में रचेंगे। ये थॉट ही कितना इंट्रेस्टिंग और इमोशनल है। मिट्‌टी की प्रकृति भी विलक्षण है। ये जितनी मृदु है, आंच में तपकर उतनी ही सख़्त हो जाती है। जिस तरह हम मुसीबतों से लड़ते हुए मज़बूत होते जाते हैं। माटी में कुछ रचने के लिए उतनी ही एकाग्रता चाहिए जितनी ध्यान के लिए चाहिए होती है।

वानी वैद

अपर्णा बिदासरिया

माटी में रचते हुए देह, चित्त, मन सब एक लय में होते हैं, यही तो योग है

वर्ष 1997-98 से मैं आर्ट वर्क कर रही हूं। भारत भवन भोपाल से शुरुआत की। तब मैं कलेक्टर थी। वक्त कम मिलता था लेकिन मैंने इसे जारी रखा। चार-पांच साल ये यूं ही चलता रहा लेकिन फिर ब्रेक आ गया। पिछले साल से मैंने दोबारा क्ले वर्क शुरू किया। वक्त और अनुभवों के साथ हम और हमारे विचार भी बदलते हैं। अब पहले से भी ज्यादा आनंद आता है। मैं लकड़ी में भी काम करती हूं और अब लकड़ी और माटी को जोड़कर कर कुछ रच रही हूं। डिनर के बाद एक घंटा अपने लिए रखती हूं। पेटिंग भी करती हूं। कभी-कभी मूड नहीं होता लेकिन इस काम में जब होते हैं तो चित्त, मन, देह सब एक लय में होते हैं। वक्त की कमी के चलते बाकी प्रोफेशनल आर्टिस्ट्स और पॉटर्स की तरह मैं वॉल्यूम ऑफ वर्क तो नहीं कर पाती हूं। लेकिन अपना आनंद माटी में ही पाती हूं। जब मेरी रची हुई कोई चीज़ एग्ज़ीबिशन में कोई पसंद कर खरीद लेता है तो जो खुशी मिलती है वो अनमोल है।

स्मिता भारद्वाज, एमडी MPFC

इथियोपिया में इस आर्टफॉर्म को करीब से देखा-जाना, भावों की अभिव्यक्ति का सबसे अद्भुत माध्यम है माटी

मैं बायोलॉजी स्टूडेंट रही हूं। ड्रॉइंग पेंटिंग मेरे इंट्रेस्ट रहे। माटी ने मुझे हमेशा आकर्षित किया लेकिन इसकी शुरुआत तब हुई जब मैं इथियोपिया में थी। कुछ साल पहले मेरे हसबैंड की पोस्टिंग वहां हुई थी। इस आर्ट को मैंने वहीं करीब से देखा-जाना और फिर खुद इसकी शुरुआत की। इसका मज़ा यह है कि जब भी कहीं पहुंचते हैं, एक नई राह नज़र आ जाती है और फिर एक यात्रा शुरुआत होती है। मैं छह-सात साल से ये कर रही हूं। जो शांति मेडिटेशन में मिलती है वही मैं माटी में कुछ रचते हुए पाती हूं। भावनाएं व्यक्त करने का बहुत सहज और अदभुत माध्यम है माटी। अब मैं क्ले में गोंड आर्ट से प्रेरित म्यूरल बना रही हूं। गोंड कला में पशु-पक्षियों के बीच संबंध बड़ी खूबसूरती से दिखाया गया है।

मिट्टी में कुछ रचना, सृजन करना जीवन में वह आनंद और ठहराव लाया जो योग और ध्यान करने से मिलता है

मेरी मां आर्टिस्ट थीं। बचपन से उन्हें देखा हमेशा कुछ क्रिएटिव करते हुए। कुछ रचते हुए। फिर चाहे वो एम्ब्रॉयडरी हो या बुनाई या पेंटिंग। मुझे वो करना अच्छा लगता था जिसमें जॉय ऑफ क्रिएशन मिले। जो मैं खुद रचूं। माटी ने हमेशा मुझे आकर्षित किया और मैंने पॉटरी शुरू की। ज़िम्मेदारियां और भी थीं इसलिए काम ऑन एंड ऑफ चलता रहा लेकिन पॉटरी मैंने जारी रखी क्योंकि ये मेरे मन का काम था। ये काम जीवन में वो ठहराव और आनंद लाया जो योग से मिलता है। मेरा मेडिटेशन यही है। वक्त इसमें पता नहीं लगता। मैं 3 साल से शहर में माटी फेस्टिवल भी करा रही हूं। इसमें इंदौर और कुछ बाहर के पॉटर्स भी अपना काम एग्ज़ीबिट करते हैं।

सुचित्रा धनानी, आर्टिस्ट और आंत्रप्रेन्योर

अनुश्री दुबे

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