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कपड़ा बाजार में राखी त्योहार की जोरदार ग्राहकी निकलने से उत्पादक-व्यापारी खुश

2 वर्ष पहले
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कपड़ा बाजार में राखी त्योहार की जोरदार ग्राहकी चल रही है। व्यापारी वर्ग उत्पादक क्षेत्रों से उत्साह के साथ नई खरीदी भी कर रहे हैं। चारों ओर मानसून की वर्षा हो जाने से फसलें ठीक से उतरेगी और आगामी त्योहारों पर भी ग्राहकी निकलने की आशा बंधने लगी है। सूरत की फिलहाल स्थिति ठीक नहीं है। आए दिन व्यापारी कमजोर पड़ने लगे हैं। पिछले कुछ समय से कुर्ती का चलन अधिक मात्रा में बढ़ गया है। इससे उद्योग को नए सिरे से आर्थिक मजबूती मिली है। चीन का टेक्सटाइल उद्योग संकट में है। इससे भारतीय निर्यात बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। दक्षिण भारत से ग्रे कपड़ों का निर्यात भी ठंडा पड़ा हुआ है। सूरत-बड़ौदरा में भारी वर्षा से कपड़ा व्यापारियों को नुकसान होने की चर्चा है। मालेगांव में यार्न और कपड़ा दोनों में गिरावट आने से उत्पादक-व्यापारी परेशान हैं।

नई खरीदी उत्साह से

लंबे समय बाद कपड़ा बाजार में राखी त्योहार की ग्राहकी अति उत्साहजनक रूप से देखी जा रही है। इस वजह से व्यापारियों को थोड़ी- राहत मिली है। जोरदार ग्राहकी होने से राखी त्योहार के लिए माल भी मंगवा रहे हैं। रक्षाबंधन के बाद ग्राहकी पुन: ठंडी पड़ जाएगी। मानसून की वर्षा चारों तरफ हो रही है। इससे ऐसी उम्मीद बंधने लगी है कि आगामी पूजा, दशहरा, दीपावली पर ग्राहकी अच्छी मात्रा में चलने की आशा रखी जा रही है। पिछले दिनों मानूसन में देरी से कपास उत्पादन में कमी अथवा देरी की वजह से रूई भावों में सुर्खी आई थी। अब जोरदार वर्षा एवं फसलों की स्थिति ठीक होने से आने वाले महीने में भाव दबने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। फिलहाल फसलों की स्थिति ठीक है। बाजार में धन की तंगी से कारोबार रुका हुआ है। व्यापारी वर्ग स्टॉक बोझ से बचना चाहते हैं, क्योंकि जीएसटी लागू होने के बाद भुगतान पहले होने लगा है।

बांग्लादेश कपड़ों की मांग

राखी त्योहार की साड़ियां, सलवार सूट्स एवं ड्रेस मटेरियल में मांग अधिक है। हालांकि उधारी जल्दी नहीं आने से धन की तंगी बनी हुई है। पिछले कुछ समय से व्यापारी काफी सूझबूझ के साथ कारोबार कर रहे हैं। राखी त्योहार की ग्रामीण क्षेत्रों में भी मांग बढ़ने की आशा रखी जाती है। सूरत से साड़ियों के अलावा सामान्य कीमत वाले ड्रेस मटेरियलों की मांग अधिक है। पिछले दिनों लहरिया साड़ी और लेडिज गारमेंट, मटेरियल में शिफान बेस की खरीदी ठीक रही। इंदौर में भी बांग्लादेश कपड़ों की मांग अच्छी मात्रा में बताई जा रही है। ट्रेड वॉर की वजह से चीन का टेक्सटाइल उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। इससे घरेलू एवं निर्यात बाजार पर पकड़ बनाने का अच्छे अवसर बताए जा रहे हैं।

भारी वर्षा से नुकसान

सूरत बाजार में कोई विशेष सुधार नहीं आया है। हाल ही में वर्षा ने अलग से कहर बरपा दिया है। कुछ गोदामों एवं दुकानों में पानी भर गया था। कुछ मात्रा में बड़ौदा में भी कपड़ा व्यापारियों को वर्षा की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा है। व्यापारी वर्ग पूर्व के संकटों से तो उभर नहीं पा रहे हैं, तूफानी वर्षा ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। सामान्यत: सूरत में दिवालिया होने की घटना आम है। दीपावली पर जो अवकाश होता है, उसके 4-8 बाद की दुकानें नहीं खुलती हैं, तो यह मान लिया जाता है कि व्यापारी ने रवानगी डाल दी है। सूरत में अब 12 महीने व्यापारी भागने लगे हैं। एसोसिएशन ने भागने वाले व्यापारियों को पकड़ने का अभियान चलाया है। अब किराएदार व्यापारियों की जानकारी एकत्र की जा रही है। भागने वाले व्यापारी बाजार का माहौल खराब कररहे हैं। व्यापारी एसोसिएशन पुलिस को पूरी जानकारी देगा।

कुर्ती का चलन बड़ी मात्रा में

सूरत के उद्योगपतियों ने कुछ न कुछ नया करने में महारथ हासिल कर रखी है। पिछले कुछ समय में लेडिज वियर के रूप में कुर्ती बाजार में जो प्रसिद्धि मिली है, वह अकल्पनीय है। महिलाओं के पहनावे में कभी साड़ी, सलवार सूट्स आदि की मांग अधिक मात्रा में रहती थी, लेकिन इसी बीच फैशन ने करवट बदली और उच्चवर्ग की महिलाएं, युवतियां कुर्ती के पहनावे को प्राथमिकता देने लगी है। कुर्तियां लेंगीज, प्लाजो, जींस घाघरा आदि सभी पर इसका उपयोग होने लगा है। विशेषता यह भी है कि इस पहनावे को युवतियां एवं महिलाओं ने भी अपनाया है। ऐसा आभास होता है, जब तक कोई लोकप्रिय फैशन नहीं आ जाती, कुर्ती का चलन बरकरार रहने वाला है। उल्लेखनीय है दो -तीन वर्ष पूर्व तक सूरत में कुर्ती का व्यवसाय नहीं के समान होता था, पिछले अल्प समय में कुर्ती की मांग में बड़ी मात्रा में इजाफा हुआ है। अगले 1-2 वर्ष में बाजार में इनकी भरमार हो जाएगी। कुर्ती का कारोबार 3 हजार करोड़ वार्षिक का हो गया है। इसमें 5 से 15 करोड़ का वार्षिक टर्न ओव्हर करने वाले व्यापारी अधिक है।

यार्न कपड़ा दोनों में मंदी

मालेगांव का कपड़ा उद्योग भी संकट के दौर से गुजर रहा है। पावर लूम उद्योग में तेजी-मंदी तो चलती रहती है, किंतु इस वर्ष इसे क्षेत्र में या हाल कुछ अलग है। यार्न और कपड़ा दोनों में मंदी का आलम है। कारोबार कम होता है, और भाव अधिक मात्रा में घटते हैं। इसके अलावा बेचवाली का दबाव बना रहता है। कुछ व्यापारियों ने व्यापार से हाथ खींच लिया है। स्टॉकिस्ट या सटोरिए भी कारोबार से अलग हो रहे हैं। प्रत्येक एक ही बात बोलते हैं कि समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हो क्या रहा है? आर्थिक नीतियों में बदलाव हुआ है। जीएसटी एक कठोर कर प्रणाली है। आमदनी कम और खर्चे अधिक हो गए हैं। पापलीन और कैम्बिक में हलका-सा कारोबार हो रहा है। रोटो और पीसी का यही हाल है। आम व्यापारियों की राय में दीपावली तक कारोबार में सुधार आ सकता है। लेकिन इसके पूर्व की अवधि में क्या होगा। किसी को पता नहीं।

ग्रे कपड़ों का निर्यात ठंडा

दक्षिण भारत में इस समय ग्रे की प्रमुख से ग्रे कपड़ों का निर्यात बड़ी मात्रा में होता है। वर्तमान में निर्यात कारोबार ठंडा चल रहा है। लेकिन आने वाले दिनों में मानसून की वर्षा अच्छी मात्रा में होने से ग्रे मालों में जोरदार मांग निकलने की आशा रखी जाती है। इंदौर- उज्जैन में फेरीवालों की मांग अच्छी मात्रा में देखी जा रही है। विशेषकर रजाई खोल, बेडशीड, कम कीमत वाले गलीचे जिनकी कीमत 1500 से 2000 रुपए तक होती है, में जोर दार मांग बनी हुई है। हैंडलूम बाजार में इस समय मेरठ, मिलखुआ, पानीपत एवं लुधियाना, से तैयार माल आ रहा है। व्यापारी वर्ग आगामी ठंड के सीजन की तैयारी में लगे हुए हैं। पिछला सीजन ग्राहकी के हिसाब से काफी सफल गया था। सीजन के अंत तक गरम कपड़ों की बिक्री होती रही।

कुर्ती का कारोबार बढ़कर 3 हजार करोड़ हो गया

1500 से 2000 रुपए की कीमत वाले गलीचों में मांग

जून माह में कॉटन यार्न के निर्यात में 51 % की गिरावट

मानसून की वर्षा हो जाने से कपास की फसल अच्छी आएगी

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