जज बोले- झगड़े छोड़ें, बच्चाें की सोचें; बुुजुर्ग हैं घर के वट वृक्ष... यह सुन एक हुए दंपती, दादी को मिला पोतों का प्यार

Indore News - कहीं सिगरेट और शराब के कारण तलाक की नौबत आई तो कहीं घर के झगड़े में पति-प|ी अलग रहने लग गए थे। बात फैमिली कोर्ट की...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:45 AM IST
Indore News - mp news the judge said leave quarts think of the children the elderly are the tree of the house listening to a couple the granddaughter got the love of the ships
कहीं सिगरेट और शराब के कारण तलाक की नौबत आई तो कहीं घर के झगड़े में पति-प|ी अलग रहने लग गए थे। बात फैमिली कोर्ट की चौखट तक भी पहुंची। न्यायाधीशों ने दंपतियों से कहा अपने झगड़े छोड़ो। छोटी बातों को एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल दो। जो बच्चे तुम्हारे भरोसे दुनिया में आए, उनके बारे में सोचो। न्यायाधीशों की सलाह और दो-बच्चों की उदासी ने मां-बाप का दिल पिघला दिया और हाथ में हाथ डालकर कोर्ट से गए। यह हुआ शनिवार काे मेगा अदालत में। यहां 15 घर फिर से बस गए। फैमिली कोर्ट के प्रोटोकाॅल प्रभारी ब्रजेश भार्गव के मुताबिक, मेगा अदालत में े 300 में से 73 केस का निराकरण हुआ। प्रधान न्यायाधीश सुबोध कुमार जैन, प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरभि मिश्रा, द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश रेणुका कंचन की कोर्ट में दंपती के मामलों का निराकरण हुआ।

कोर्ट में दादी को हाथ जोड़ बैठी देख पोते रूआंसे हुए, बोले- प्यार से रखेंगे

अधिवक्ता प्रमोद जोशी और प्रणय शर्मा के मुताबिक, सांवेर रोड निवासी राधादेवी के पति राजकुमार की मौत वर्ष 2012 में हो गई थी। एक साल में बेटा भी चल बसा था। राधादेवी पाई-पाई को मोहताज हो गईं। चार पोतों और बहू से 20 हजार रु. महीना भरण-पोषण भत्ता लेने के लिए अर्जी लगाई। पोते शनिवार को कोर्ट आए। 77 साल की दादी को कोने में हाथ जोड़कर बैठे देखा तो रुआंसे हो गए। प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश सुरभि मिश्रा ने पोतों से कहा बुुजुर्ग घर के वट वृक्ष होते हैं, जिनकी छांव हमें मिलती है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पोते तीन हजार रु. महीना दादी को दें। पोतोंं ने कहा दादी को घर ले जाएंगे और प्यार से रखेंगे।

पति ने कहा- प|ी को दूंगा अब पूरा सम्मान, छोड़ दूंगा नशा करना

किला मैदान क्षेत्र निवासी संजय सिगरेट, शराब पीकर वह आए दिन प|ी मनीषा को पीटता था। मनीषा ने दो साल पहले अलग होने के लिए फैमिली कोर्ट में परिवाद दायर किया था। इससे पहले दोनों की कई बार काउंसिलिंग की गई। समझाइश के बाद दोनों में तालमेल बैठा। पति ने तय किया कि वह प|ी को पूरा सम्मान देगा। फैमिली कोर्ट के समक्ष पति ने नशा छोड़ने की बात कही। आखिर में दोनों एक हो गए।

धर्मस्थल पर रहने वाले बच्चों को मिलेगी छत और शिक्षा

10 और 12 साल के दो बेटों के साथ महिला 2009 से कर्बला स्थित धर्मस्थल पर पूजन सामग्री, साफ-सफाई कर गुजर-बसर कर रही थी। उसका घर भी धर्मस्थल ही था। उसने भी पति से भरण-पोषण भत्ता लेने के लिए परिवाद लगाया था। न्यायालय में पति-प|ी हाजिर हुए तो सबसे पहले बच्चों की पढ़ाई पर सहमति बनी। बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने पर राजी हुए। वहीं, पति को आदेश दिया कि वह पांच हजार रुपए महीना प|ी को देगा, ताकि वह जीवनयापन कर सके।

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