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उद्योग के हित में मंडी शुल्क की छूट दें

2 वर्ष पहले
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इंदौर| इस वर्ष दलहनों का उत्पादन कम हुआ है, खरीफ की फसल कर भविष्य अधिक उज्जवल नजर नहीं आ रहे हैं, आयात भी ठप है। मसूर और तुअर चलाने वाली दाल मिलें प्रदेश के बाहर पर ही पूर्णत: निर्भर है। अभी तक दाल मिलें प्रदेश के बाहर से दलहन लाकर मिलें चला रही हैं। 1 अगस्त से मंडी शुल्क की छूट समाप्त हो गई है। उद्योग के हित में इसे जारी रखना चाहिए। पिछले 10-12 वर्षों से इस छूट को राज्य में बैठे अधिकारियों, राजनेताओं ने अवैध आय का साधन बना लिया था। इसकी वजह से लंबे समय तक तोल-मोल करने के बाद छूट दी जाती रही है और अंत में मुख्यमंत्री की मोहर लगा दी जाती थी। कांग्रेस सरकार को इस भ्रष्ट परंपरा को तोड़कर उद्योग के हित में प्रदेश के बाहर से आने वाली दलहनों को मंडी शुल्क की छूट देना चाहिए। कटनी की दाल मिलों का प्रतिनिधि मंडल पूर्व मुख्यमंत्री से इस संबंध में मिल भी चुका है। चने में लेवाल नहीं है तो बेचवाल भी कम है। चना दाल में मांग का अभाव बना हुआ है । डबल डॉलर की आवक 6500 से 7000 बोरी की रही। नीलामी डॉलर 4400 से 4950 ऊपर में 5000 से 5325 रुपए। कुछ ट्रालियां 5365, 5410, 5445 एवं 5485 रुपए बिक गई। कंटेनरों में डॉलर 42X44-5850 रुपए, 44X46- 5650 रुपए।

चना कांटा 4225 से 4250 देशी 4100 तुअर मप्र 5000 से 5200 महाराष्ट्र 5850 से 5900 मसूर 4100 मीडियम 3800 मूंग 5000 से 5200 बेस्ट 5500 से 5700 उड़द हलका 3800 से 4000 बेस्ट 5000 से 5200 रुपए। चना दाल चलनसर 5000 मीडियम 5200 बोल्ड 5400 मार्केवाली 5500 तुअर दाल फूल नई 8000 से 8200 मार्केवाली 8500 मसूर 5100 से 5300 उड़द दाल 5600 से 5800 बोल्ड 6800 से 7000 मोगर 6500 से 6700 बोल्ड 7400 से 7500 मूंग 6500 से 6700 बोल्ड 7200 से 7500 मोगर 7700 से 8000 बोल्ड 8100 से 8200 रुपए। गेहूं मिल 2125 लोकवन 2200 से 2350 मक्का 2200 रुपए।

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