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तुकोगंज के संत की सलाह पर 125 साल पहले पुणे मेंे हलवाई ने बनाया था दगड्ू शेेठ मंदिर, 5 करोड़ श्रद्धालु

खजराना गणेश मंदिर, इंदौर 233 साल पुराने मंदिर में हर साल तीन करोड़ रु. दान देते हैं 1.25 करोड़ श्रद्धालु खासियत :...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 03:15 AM IST
खजराना गणेश मंदिर, इंदौर

233 साल पुराने मंदिर में हर साल तीन करोड़ रु. दान देते हैं 1.25 करोड़ श्रद्धालु

खासियत : 1785 में बने इस मंदिर में चमत्कारी मूर्ति है। श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। इसके लिए श्रद्धालु यहां बंधन बांधकर जाते हैं। 16 एकड़ में फैले मंदिर परिसर में अन्न क्षेत्र हैं, जहां रोज एक हजार लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। 8 बेड का हॉस्पिटल है, जहां 400 रुपए में डायलिसिस किया जाता है, जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च 1200-1500 रुपए है। मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्‌ट ने बताया यह प्रदेश का एकमात्र गणेश मंदिर है, जिसके लिए विधानसभा में एक्ट पारित किया गया।

पं. अशोक भट्‌ट

सिद्धि विनायक मंदिर मुंबई

22 करोड़ श्रद्धालु हर साल जाते हैं 217 साल पुराने मंदिर में, दान 90 करोड़ रु.

खासियत : मुंबई के प्रभादेवी इलाके में वर्ष 1801 में निर्मित इस मंदिर में गणेश प्रतिमाओं की सूड़ दायीं तरह मुड़ी है। मान्यता है कि दाहिनी ओर मुड़ी गणेश प्रतिमाएं सिद्ध पीठ की होती हैं। इसलिए यह मंदिर भी सिद्ध पीठ है। मंदिर ट्रस्ट के सीईओ संजीव पाटिल बताते हैं कि तीन नेत्रों वाली यह गणेशजी की पहली प्रतिमा है। यह स्वयंभू प्रकट हुई थी। यह महाराष्ट्र का दूसरा सबसे अमीर मंदिर है। 2016 में यहां गूगल के सीईओ टिम कुक भी जा चुके हैं। सामाजिक कार्यों के लिए मंदिर ट्रस्ट को बेस्ट ट्रस्ट का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

संजीव पाटिल

दगड़ू शेठ हलवाई गणपति मंदिर, पुणे

22.5 करोड़ का नकद चढ़ावा हर साल आता है 125 साल पुराने इस मंदिर में

खासियत : यह मंदिर पुणे के हलवाई दगड़ू शेठ के नाम पर है। श्रीमंत दगड़ू शेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट पुणे के ट्रेजरार महेश सूर्यवंशी बताते हैं कि शेठ के बेटे का कम आयु में प्लेग के कारण निधन हो गया था। इससे सेठ अवसाद में चले गए थे। तब इंदौर के साउथ तुकाेगंज में रहने वाले उनके आध्यात्मिक गुरु माधवनाथ महाराज ने बेटे की याद में गणेश मंदिर का निर्माण करने का सुझाव दिया था। कहा था कि जैसे एक बेटा अपने पिता का नाम रोशन करता है। उसी तरह इस मंदिर से तुम्हारा नाम हो जाएगा।

महेश सूर्यवंशी