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ओलावृष्टि से धान 1121 की फसल 25 प्रतिशत कमजोर उतरने की संभावना

पिछले महीने पंजाब, हरियाणा में हुई ओलावृष्टि से धान 1121 की फसल को क्षति पहुंची है। धान बारीक रह गया है। एक अनुमान के...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 04:41 AM IST
Indore - paddy 1121 crop likely to get 25 percent weak due to hailstorm
पिछले महीने पंजाब, हरियाणा में हुई ओलावृष्टि से धान 1121 की फसल को क्षति पहुंची है। धान बारीक रह गया है। एक अनुमान के अनुसार 1121 धान का उत्पादन 25 प्रतिशत कमजोर उतर सकता है। धान के भाव बढ़ गए हैं। अगले सप्ताह से भारतीय बाजारों में नए चावल के कामकाज शुरू हो जाएंगे। बासमती चावल में निर्यात मांग जोरदार बनी हुई है। मिलों को फिलहाल निर्यात में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही है। इस वर्ष धान 1509 का उत्पादन अधिक हुआ है। इससे बने चावल की पकाव भी अच्छा बैठ रहा है। अत: मांग अच्छी मात्रा में बनी रहेगी। पंजाब में धान की पूरजोश आवक करीब सवा माह होती है। 8-10 दिन से आवक भरपूर मात्रा में हो रही है। शुरुआती दौर में आवक गत वर्ष से कम रही थी। बैंकों द्वारा चावल मिलों को इफरादी से ऋण नहीं देने से धन की तंगी महसूस की जा रही है।

मंदी के संयोग कम

पिछले महीने में पंजाब, हरियाणा में ओलावृष्टि से धान 1121 की फसल को नुकसान हुआ है। उत्पादकता करीब 25 प्रतिशत कम बैठ रही है। पंजाब में 1121 धान की आवक करीब सवा माह तक पूरजोश पर रहती है। करीब 8-10 दिन से धान की आवक अच्छी मात्रा में शुरू हो गई है। 20-25 दिन तक आवक का दबाव इसी तरह से बने रहने की आशा है। उसके बाद आवक कम पड़ जाएगी। धान हो अथवा चावल 1121 में मंदी के संयोग कम है, क्योंकि धान की फसल गत वर्ष से कम उतर रही है। अगले कुछ दिनों में यदि हलकी सी मंदी आई तो उसकी वजह धन की तंगी हो सकती है। बैंकों ने रुपया देने से हाथ खींच रखा है। संभव है धान में चावल मिलों की कुछ मात्रा में खरीदी कमजोर पड़ी तो अल्प समय के लिए भावों में आंशिक गिरावट आ सकती है।

1121 धान 3700 रुपए

ओलावृष्टि से धान 1121 का दाना बारीक हो गया है। क्वालिटी काफी हलकी हो गई है। वर्तमान में मौसम साफ है। मंडियों में आवक बनी हुई है। धान के भाव ऊंचे हैं, जबकि चावल नीचे भावों पर मांगा जा रहा है। पिछले दिनों धान 1121 के भाव 3300 से 3600 रुपए खुले थे, वर्तमान में 3400 से 3700 रुपए धान 1509 के भाव 2500 से 3200 रुपए बताए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस बार धान 1509 की क्वालिटी अच्छी बैठ रही है, और पकाव भी अच्छा बैठ रहा है। आने वाले महीनों में बाजारों में चावल 1121 की बजाय 1509 अधिक मात्रा में बिकता नजर आ सकता है। धान 1509 काफी लंबे समय से आ रहा है। इस वर्ष इसका उत्पादन भी अधिक हुआ है। पिछले दिनों अमृतसर में चावल 1121 के भाव 7200 रुपए निकले थे, बढ़कर लूज में 7500 रुपए बोले जाने लगे हैं।

खाड़ी देशों की मांग

धान हलका उतरने से धीरे-धीरे 1121 चावल का स्थान 1509 ले सकता है। निर्यात में खाड़ी, यूरोपीय देशों के साथ आस्ट्रेलिया की भरपूर मात्रा में मांग बनी हुई है। चावल 1509 एवं 1121 बासमती का निर्यात भी हो रहा है। निर्यातकों को अभी किसी तरह की चिंता नहीं है। भारतीय बाजारों के लिए भाव अभी नहीं खुले हैं। अनेक बाजार अभी बंद है। सोमवार से खुलने वाले हैं, उसी के बाद चावल में मांग बढ़ना संभव है। मप्र के बाजार भी सोमवार से खुलने जा रहे हैं। उसी के बाद चावल के सौदे शुरू होंगे। सामान्यत: मप्र में दाल- चावल का व्यापार एक साथ होता है। पिछले दिनों दालों में तेजी आने से अधिकांश व्यापारियों को रूझान दालों की ओर चला गया था। इस वजह से भी चावल का कारोबार कमजोर पड़ गया। पंजाब, दिल्ली से नए चावल के भाव निकलने के साथ कामकाज शुरू हो जाएंगे।

एक नामी मिल घाटे में

पंजाब की एक नामी चावल मिल पर 1200 करोड़ रुपए बकाया है। मिल के पास बड़ी मात्रा में प्रापर्टी है, किंतु बिकती नहीं है। इस वजह से मिलने फील्ड एवं मिल के स्टॉफ को नौकरी से बिदाई दे दी है। मिल पर ताले लग गए हैं। वैसे पंजाब की अनेक चावल मिलें बैंकों के कर्ज से डूबी हुई है। मिलों की सबसे दिक्कत यह है मंडियों में अधिक भाव पर धान की खरीदी करती है, और घरेलू बाजार में चावल प्रतिस्पर्धा की वजह से कम भाव पर बेचना पड़ता है। इसके अलावा अनेक बार निर्यात बाजार भी धोखा दे जाता है। यही घाटे का कारण होता है। घरेलू बाजारों में ऊंचे भावों पर चावल बिक जाए तो मिलें घाटे से उबर सकती है। यूरोपीय देशों ने धान में कीटनाशक अधिक पाए जाने पर ऐसे चावल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। मप्र एवं देश के अन्य भागों में वर्षों पुराना एवं विश्वसनीय हनुमान ब्रांड चावल के निर्माता आर एस राइस मिल के मालिक रविंदर सिंह ने बताया कि इस वर्ष चावल के भावों में मंदी के संयोग नहीं के समान है। आने वाले दिनों में धान की बड़ी मात्रा में आवक एवं चावल में मांग कमजोर होने पर हलकी-सी मंदी अल्प समय के लिए आ सकती है।

शुरुआत में आवक कम

चंडीगढ़ से प्राप्त समाचार के अनुसार पंजाब की मंडियों में धान की आवक का दबाव शुरुआत में जितनी मात्रा में होना था, वह नहीं हो सकी। इसकी प्रमुख वजह सरकार द्वारा धान की बोवनी प्रारंभ करने की अवधि 15 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दी गई थी। इस वजह से बोवनी में देरी हुई है। इसके अलावा ओलावृष्टि होने से कटाई का कार्य भी प्रभावित हुआ है। लेकिन सरकारी अधिकारियों एवं किसानों को आशा है कि आगामी दिनों में आवक बढ़ सकती है। किसान वर्ग धान रोकने में सफल नहीं हो सकेंगे। गेहूं की बोवनी नजदीक आने से धान की कटाई जल्दी करना अनिवार्य है। गोदामों को खाली रखना भी जरूरी है, अन्यथा किसानों को समस्या आएगी। 14 अक्टूबर तक धान की आवक 41.41 लाख टन की बजाय 14.58 लाख टन हुई थी। पंजाब में पिछले वर्ष में प्रतिदिन 4 लाख टन धान की आवक हो रही थी।

निर्यात कीमतों में कमी

निर्यात में कमजोर मांग और आगामी दिनों आपूर्ति बढ़ने की संभावना से भारतीय गैर-बासमती चावल के निर्यात कीमतों में लगातार तीसरे सप्तह गिरावट आई है, जबकि चीन और फिलिपींस की मांग निकलने से थाईलैंड और वियतनाम के चावल के भावों में तेजी आई है। आंध्र के निर्यातक सूत्रों के अनुसार प्रत्येक सप्ताह कीमतों में गिरावट से आयातक सौदे लेने से पीछे हट रहे हैं। रुपया कमजोर होने से भी निर्यातकों को कीमतें कम करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। गैर-बासमती चावल का उत्पादन 1.8 प्रतिशत बढ़कर 9.92 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया गया है।

ट्रेडिशनल बासमती की उपज कम

वैसे भी नए चावल में वार्षिक स्टॉक करने वालों की मांग आने वाले दिनों में निकलने की आशा रखी जाती है। ट्रेडिशनल बासमती चावल की खेती घटकर 10 प्रतिशत रह गई है। संभव है अगले कुछ वर्षों में असल बासमती बाजार से बाहर हो जाए। जिस तरह से कालीमूंछ चावल बाजार से बाहर हो गया है। कहीं-कहीं थोड़ी बहुत मात्रा में असली काली मूंछ बिक रहा होगा, शेष नकली ही बिक रहा है। आने वाले वर्षों में असल बासमती की बाजार में खोज करना होगी। कौन- से व्यापारी असल बासमती की बिक्री अभी भी ईमानदारी से कर रहे हैं। असल बासमती चावल को बाजार से बाहर करने में धान 1121 की अहम् भूमिका रही है। इस वर्ष 1509 चावल 1121 को झटका पहुंच सकता है।

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