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पुलिसकर्मियों के खिलाफ बढ़ रहे आपराधिक मामले; उनमें ज्यादती और छेड़छाड़ के मामले भी शामिल

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 05:56 AM IST

मई की रिपोर्ट आने के बाद अफसरों को सौंपा मॉनिटरिंग व कार्रवाई का जिम्मा।

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इंदौर. पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज हो रहे आपराधिक मामलों से चिंतित विभाग ने अब उनकी मॉनिटरिंग सीधे बड़े अफसरों के हवाले कर दी है। हर मामले का रिकॉर्ड उसी दिन बुलाकर समीक्षा की जा रही है। मई महीने में ही ऐसे 10 मामले सामने आए हैं, जिसमें आरोपी पुलिस या किसी सरकारी विभाग का कर्मचारी है। जो केस दर्ज हुए हैं, वह जानलेवा हमला, लापरवाही से किसी की जान लेने और ज्यादती जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े हैं।

अफसर निगाह रखेंगे और जवाब तलब होगा

- सीधे अफसरों के पूरा रिकॉर्ड रखने और निगरानी करने के पीछे उद्देश्य यह है कि ऐसे मामलों से सरकारी कर्मचारियों को कैसे दूर किया जाए, इसका उपाय किया जाए। अफसर निगाह रखेंगे और जवाब तलब होगा तो ऐसे मामलों की संख्या में थोड़ी कमी आएगी।

- दूसरा, कर्मचारियों की एसीआर (एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट) बनाना भी आसान होगा। हर कर्मचारी का रिकॉर्ड रहेगा तो इसके लिए सीआईडी के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा, जो अब तक इस तरह के मामलों को देख रही थी। इससे जब भी कोई जानकारी एकत्र करना होती, तो पूरे रिकॉर्ड की छंटनी करवाना पड़ती थी। इसके अलावा ऐसे मामले स्थानीय अफसर दबा देते थे, अब उन्हें छुपाना भी आसान नहीं होगा।

बंदूक लेकर पहुंच गया कब्जा करने

1. मेघनगर थाने में पुलिसकर्मी मेशुल भूरिया, रतन और कनिया पर मारपीट सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ। मेशुल पारिवारिक विवाद में शासकीय बंदूक लेकर रिश्तेदारों को धमकाने और खेत पर कब्जा करने चला गया था।

2. इंदौर में संजू अलोने के खिलाफ विजयनगर थाने में उसी की पत्नी ने गाली-गलौज और चाकू मारकर घायल करने का केस दर्ज करवाया।

3. महेश्वर थाने में पुलिसकर्मी अरुण भूरिया पर महिला के साथ शादी का झांसा देकर ज्यादती करने के मामले में केस दर्ज हुआ।

4. मंडलेश्वर थाने में पुलिसकर्मी शैलेंद्र मारु पर महिला के साथ अश्लील हरकत करने के मामले में केस दर्ज हुआ। 5. मेघनगर थाने में पटवारी नटवरसिंह कछोटिया के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज हुआ। पटवारी नटवर सिंह पर आरोप है कि उसने आदिवासी भूमि का गैर आदिवासी व्यक्ति के नाम नामांतरण कर दिया।

दबाव बनाकर केस करवा लेते थे खारिज
जोन के 8 जिलों में पहली बार पुलिस और शासकीय कर्मचारियों का रिकॉर्ड अलग से तैयार करने की व्यवस्था की है। थानों में इसका अलग से कोई रिकॉर्ड नहीं होता था कि दर्ज केस में कितने शासकीय लोग हैं। सीआईडी को हर साल जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट शासन को भेजना होती थी। इसमें कई बार छोटे प्रकरण थाने से दबा लिए जाते थे। बाद में अधिकारी दबाव बनाकर वह केस ही खारिज करवा लेते थे।

एप्लीकेशन बनी मददगार : थानों से ऑनलाइन बुलवा रहे हर दिन की रिपोर्ट
एआईजी सोनाली दुबे के मुताबिक, शासकीय और पुलिस सेवकों द्वारा किए गए अपराधों की जानकारी सीआईडी इकट्ठा करती थी। इसमें कई बार महीनों लग जाते थे। हमने हर थाने से प्रतिदिन की रिपोर्ट ऑनलाइन बुलवाने के साथ कर्मचारियों पर दर्ज अपराध का भी रिकॉर्ड लेना शुरू किया। यह सिर्फ एक नहीं, बल्कि सभी अधिकारियों को एप्लीकेशन के जरिए उपलब्ध है। इसके आधार पर एसीआर रिपोर्ट बनाने में भी आसानी होगी।

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