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डॉक्टरों ने दो माह इलाज के बाद छठे माह में जन्मी प्री मेच्योर बच्ची की बचाई जान, वजन था 550 ग्राम

प्रदेश में पहली बार कम वजन के नवजात की जान बचाने का दावा

Bhaskar News | Last Modified - Aug 13, 2018, 01:57 AM IST

डॉक्टरों ने दो माह इलाज के बाद छठे माह में जन्मी प्री मेच्योर बच्ची की बचाई जान, वजन था 550 ग्राम

इंदौर.डॉक्टरों ने लगातार दो महीने इलाज कर एक ऐसी प्री-मेच्योर बच्ची की जान बचाई है, जिसने समय से 12 हफ्ते पहले यानी नौ की बजाय छह महीने में ही जन्म ले लिया। यही नहीं सामान्य बच्चों की तुलना में इस बच्ची का वजन भी दो किलो कम था। डॉक्टरों का दावा है प्रदेश में पहली बार इस तरह के प्री-मेच्योर बेबी की जान बचाई गई है।
खंडवा निवासी पूर्णिमा त्रिवेदी ने इंदौर में इनफर्टिलिटी का इलाज कराया था। शादी के 18 साल बाद 10 जून को एक निजी अस्पताल में उन्होंने बेटी को जन्म दिया। डिलीवरी 37 की बजाय 25 हफ्ते में हो गई। समय पूर्व जन्म लेने से बच्ची का वजन भी सामान्य 2500 ग्राम की बजाय 550 ग्राम निकला। डॉक्टरों ने तत्काल सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट में बच्ची को रखा और दो माह तक इलाज के बाद रविवार को उसे डिस्चार्ज किया गया। अस्पताल प्रशासन ने भी सहयोग करते हुए 50 फीसदी बिल माफ किया। नर्सिंग केयर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने पर नर्सिंग स्टाफ का सम्मान भी किया गया।

बच्ची डिस्चार्ज हुई तो मां (बाएं) का चेहरा खिल उठा: नियोनेटोलॉजी स्पेशलिस्ट डॉ. विवेक पाठक ने बताया समय के पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों के अंग विकसित नहीं हो पाते। फेफड़े पिचके होते हैं। ब्रेन में ब्लीडिंग होती है। आंखों की समस्या होने के साथ त्वचा इतनी नाजुक होती है कि कोई स्पर्श करे या हवा के संपर्क में आने से भी संक्रमण हो जाता है।

दावा इसलिए... 600 ग्राम तक के बच्चों की बचाई थी जान:एमजीएम मेडिकल कॉलेज में शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत जैन बताते हैं ऐसे बच्चों को बचा पाना मुश्किल होता है। हमने 600 ग्राम तक के बच्चों को बचाया है। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल करीब 10 फीसदी बच्चे प्री-मेच्योर हो रहे हैं।

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