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संस्कृत नाट्योत्सव : कलाकार 28, दर्शक 40

तीन दिनी संस्कृत नाट्य महोत्सव की यह एक कमज़ोर शुरूआत थी। पहले दिन 28 कलाकारों के नाट्यदल के मंचित किए गए नाटक...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 03:40 AM IST
Indore - संस्कृत नाट्योत्सव : कलाकार 28, दर्शक 40
तीन दिनी संस्कृत नाट्य महोत्सव की यह एक कमज़ोर शुरूआत थी। पहले दिन 28 कलाकारों के नाट्यदल के मंचित किए गए नाटक लीलाभोजराजम् को देखने रवीन्द्र नाट्यगृह में सोमवार को सिर्फ 40 दर्शक मौजूद थे। इसमें तीन दर्शक कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन के अधिकारी और दो दर्शक इस समारोह में सहयोग देने वाली स्थानीय संस्था बाल साहित्य सृजन पीठ के लोग शामिल थे। शहर में मराठी-हिंदी-बांग्ला के 30 से ज्यादा नाट्य दल हैं और हज़ारों दर्शक हैं, वहां इस महोत्सव में इतनी कम संख्या में दर्शकों का आना दुर्भाग्यपूर्ण है। महोत्सव की शुरूआत अभिराज डॉ. राजेंद्र मिश्र विरचित और धर्मेंद्र कुमार सिंह देव निर्देशित इस नाटक से की गई।

दर्शकों की कम संख्या के सवाल पर कालिदास संस्कृति अकादमी की निदेशक प्रतिभा दवे का कहना था कि हमने समारोह की सहयोगी संस्था बाल साहित्य सृजनपीठ को चार-पांच सौ आमंत्रण पत्र दे दिए थे लेकिन इतने कम दर्शकों को देख हमें भी अच्छा नहीं लग रहा है। अकादमी के कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र अवस्थी का कहना है कि इसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं कि व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं हो सका। लेकिन इसका एक कारण यह भी है कि संस्कृत नाटकों में अधिकांश लोगों की रुचि भी कम हो गई है। बालसाहित्य सृजनपीठ के कृष्णकुमार अष्ठाना का कहना है कि मुझे तो आमंत्रण पत्र सोमवार को ही मिला। मुझे नहीं पता कि हमारी संस्था को कार्ड दिए गए कि नहीं। मैंने अकादमी को सुझाव दिया कि नाट्य महोत्सव छोटे ऑडिटोरियम में करें।

राजा भोज के चरित्र को मंच पर किया गया चरितार्थ

लीलाभोजराजम् वीणापाणि संस्कृत समिति भोपाल ने मंचित किया। यह नाटक चुनिंदा प्रसंगों के जरिए राजा भोज के जीवम चरित को साकार करता है। उनका जन्म, चाचा मुंज के उनके वध का षड़्यंत्र, इससे उनकी विरक्ति, भोज का राज्याभिषेक, खरगोन की सामंतकन्या के वीरता और नृ्त्य कौशल से भोज की आसक्ति और उससे विवाह जैसे प्रसंगों से राजा भोज के जीवन को जीवंत किया गया। राजा भोज के रूप में भूपेंद्र पटेल, लीलावती के रूप में देवाशी समेले और ललिता के रूप में चंद्रेश सक्सेना ने आंगिक अभिनय के जरिए अपने किरदारों की जीवंत किया तो वत्स राज बने अभय पांडे और सिंधुल के रूप में रूकमेेश अवस्थी ने अच्छा अभिनय किया। निर्देशक धर्मेंद्र कुमार सिंह देव ने संगीत के बेहतर इस्तेमाल और निर्देशकीय प्रतिभा से कुछ अच्छी दृश्य योजना से राजा भोज के चरित को चरितार्थ किया।

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Indore - संस्कृत नाट्योत्सव : कलाकार 28, दर्शक 40
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