खंडवा / सात लड़कियां छात्रावास लौटीं, बोलीं- अब हम परछाई से भी नहीं डरेंगे

आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर व आनंदम सहयोगियों ने छात्राओं को डर दूर करने की विधि बताई। आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर व आनंदम सहयोगियों ने छात्राओं को डर दूर करने की विधि बताई।
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आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर व आनंदम सहयोगियों ने छात्राओं को डर दूर करने की विधि बताई।आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर व आनंदम सहयोगियों ने छात्राओं को डर दूर करने की विधि बताई।

  • भूत-प्रेत की अफवाह से घबराकर 23 लड़कियां छात्रावास छोड़ घर चली गई थीं
  • छात्रावास अधीक्षिका ने कहा- विज्ञान के इस युग में ऐसी बातों पर ध्यान न दें

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 10:59 AM IST

खंडवा. छैगांवमाखन के आदिवासी कन्या छात्रावास मे भूत-प्रेत की अफवाह के डर से छात्रावास छोड़ चुकी 23 लड़कियों में सोमवार दोपहर तक सात लौट आईं। सोमवार को भास्कर में प्रकाशित खबर के बाद छात्राओं और उनके परिजन के दिल से भूत-प्रेत का वहम निकल गया और वे खुद अपनी बेटियों को छोड़ने छात्रावास आए। अधीक्षिका दिप्ती जगताप ने छात्राओं के साथ ही परिजन को भी समझाइश दी कि भूत-प्रेत का कोई मामला यहां नहीं है। उन्होंने छात्रावास में रही रही लड़कियों की तरफ हाथ बताते हुए कहा ये लड़कियां भी तो यहां रह रही हैं। छात्रावास भवन के सामने बोरचिंदी की परंपरा को बंद कर किसी दूसरे स्थान पर करने का निवेदन ग्राम पंचायत से करेंगे। इसके लिए ग्रामीण भी तैयार है। वहम और अफवाह के कारण लाखों रुपए से बना हुआ भवन खाली नहीं कर सकते। 
 

अधीक्षिका ने कहा कि विज्ञान के इस युग में हमें इन सब बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। छात्रावास लौटी छात्राओं ने वादा किया कि अब हम परछाई से भी नहीं डरेंगे। छात्राओं ने कहा भूत की बातें और कहानी सुनने के बाद दिल में वहम हो गया था। इस छात्रावास में जिले के विभिन्न गांवों की 46 लड़कियां कक्षा 9वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट विद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं। 22 नवंबर को निकिता सहित पांच छात्राओं ने अधीक्षिका से कहा कि हमारा जी घबरा रहा है और भूत का डर भी सता रहा है। इसके बाद परिजन बच्चियों को ले गए। इस तरह एक सप्ताह में 23 छात्राएं अपने घर चली गईं।

सहमति के बाद श्मशान के पास बनाएंगे बोरचिंदी
छैगांवमाखन जपं अध्यक्ष चिंताराम जगताप ने बताया ग्रामीणों की सहमति और पंचायत के निर्णय के बाद बोरचिंदी का स्थान बदल देंगे। वैसे तो ज्यादातर लोग दोंदवाड़ा स्थित श्मशान से कुछ दूरी पर बोरचिंदी की परंपरा पूर्ण करते हैं। कुछ लोग पुलिया के पास रुकते हैं। कोशिश करेंगे कि वह भी छात्रावास के सामने से बंद हो जाए। सभी की सहमति से निर्णय लेंगे।

अंदर की बुराइयों को बाहर निकालें
आनंद विभाग के मास्टर ट्रेनर गणेश कनाड़े व आनंदम सहयोगी नारायण फरकले, सुनील यादव ने छात्राओं को विधियां बताकर अपने अंदर की बुराइयों को निकालने का अभ्यास कराया। छात्राओं के दिल का डर बाहर निकालने व जीवन का लेखा-जोखा बताया। छात्रावास में मंगलवार को आरबीएस की टीम को काउंसलिंग के लिए बुलाया है।

समूह में महिला चौकीदार के साथ सो रही छात्राएं
डर दूर करने के लिए छात्राएं समूह बनाकर महिला चौकीदार के साथ सो रही हैं। चौकीदार सुमनबाई ने सोमवार रात छात्राओं से कहा कि जब तुम सब अपने घर चली जाती हो तब तो मैं अकेले ही यहां रातभर रहती हूं। मुझे यहां नौकरी करते हुए पांच हो गए हैं अगर ऐसी कोई बात होती तो मैं कब की नौकरी छोड़ चुकी होती।

समझाइश देने में नाकाम
भूत दिखाई देने की बात अधीक्षिका जगताप को बताई तो वे समझा नहीं पाई। सहायक संचालक आदिम जाति नीलेश रघुवंशी को मामला पता चला तो उन्होंने परिजनों से बात की।


15 साल पहले... भूत के डर से छोड़ा था स्कूल
भेरूखेड़ा चिचगोहन की शासकीय प्राथमिक शाला रेवाड़ा में 2004 में बच्चे अचानक बेहोश हो जाते थे। भूत के डर से बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया था। यह सिलसिला करीब एक महीने तक चला था। मामला मीडिया में आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर मनु श्रीवास्तव ने अधिकारियों की टीम गांव भेजकर बच्चों का खंडवा अस्पताल में इलाज कराया। दो-तीन दिन तक इलाज होने के बाद बच्चों की काउंसलिंग की गई। तब जाकर मामला सामान्य हुआ। रेवाड़ा की स्कूल में तब से लेकर आज तक इस तरह की शिकायत नहीं मिली।


बच्चियों के दिल में वहम हो गया था। दो-तीन दिन छात्राओं व उनके परिजन से फोन पर बात की तो समझ गए। छात्राओं के दिल में डर था, वह निकल गया। जिले के अन्य छात्रावासों में भी बच्चों की काउंसलिंग की जाएगी।
नीलेश रघुवंशी, सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग
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