मप्र / शिवराज सरकार ने पेड़ों की जिन 53 प्रजातियों की कटाई व परिवहन को मुक्त किया था, उस पर हाई कोर्ट की रोक

Shivraj Sarkar freed 53 species of trees that had been harvested and transported.
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Shivraj Sarkar freed 53 species of trees that had been harvested and transported.

दैनिक भास्कर

Jul 22, 2019, 06:57 AM IST

राहुल दुबे| इंदौर . हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रदेश में पेड़ों की 53 प्रजातियों की कटाई और बगैर अनुमति के परिवहन पर अंतरिम रोक लगा दी है। तत्कालीन शिवराज सरकार ने 24 सितंबर 2015 को एक नोटिफिकेशन जारी कर प्रदेश में कहीं से भी कटाई और परिवहन करने पर वन विभाग से अनुमति लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। इसके पीछे मकसद यह था कि किसान अपने खेतों में लगे नीम, बबूल, सागौन को काट कर बेच सकते हैं।

 

कटाई और परिवहन को अतिरिक्त आय का जरिया बना सकते हैं। इस नोटिफिकेशन के बाद कटाई तो बढ़ गई थी, लेकिन उस अनुपात में पेड़ नहीं लग रहे थे। जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा, जस्टिस वीरेंदर सिंह की डिविजन बेंच के समक्ष रिट पिटिशन दायर की गई थी। इसमें उल्लेख था कि राज्य सरकार के एक नोटिफिकेशन ने पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है। 


इन प्रजातियों में पीपल, बरगद, आम जैसे धार्मिक आस्था वाले पेड़ भी शामिल हैं। इससे नुकसान यह हो रहा है कि 50 से सौ साल पुराने पेड़ भी कटकर बाजार में बिकने आ रहे थे। इस नोटिफिकेशन पर रोक लगाई जानी चाहिए। ज्यादा कटाई होने से प्रदेश में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है जो चिंता का विषय है। हाई कोर्ट ने याचिका काे अंतरिम रूप से सुनते हुए नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी। सरकार को आठ सप्ताह में विस्तृत जवाब पेश करने के लिए भी कहा है। 


आगे क्या : वन विभाग के नाके फिर से सक्रिय हो जाएंगे। वन विभाग से टीपी लेना जरूरी होगा। बगैर परिवहन गाड़ी मिलने पर जब्त भी की जा सकती है। हालांकि गुरूनानक टिंबर मार्केट में ज्यादातर व्यापारी हरी लकड़ी खरीदने से बचते हैं। व्यापारी खुद उस समय सीएम शिवराजसिंह चौहान से मिले थे और आस्था वाले पेड़ों को सूची से हटाने की मांग की थी।

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