इंदौर

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अफसरों की रिश्तेदार बन 10 साल मैस में रुकी सोनाली को जमानत, कोर्ट में मजबूत पक्ष नहीं रख पाई पुलिस

सोनाली की जमानत को खारिज कराने पुलिस ने अपना पक्ष दमदारी से नहीं रखा।

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 05:47 AM IST
सोनाली उर्फ सोनिया शर्मा पर पु सोनाली उर्फ सोनिया शर्मा पर पु

इंदौर. एडीजी और अन्य अफसरों की रिश्तेदार बनकर 10 साल तक पुलिस मैस में रुकने वाली सोनाली उर्फ सोनिया शर्मा पर पुलिस ने केस तो उम्रकैद और फांसी की धाराओं में दर्ज किया, लेकिन सत्र न्यायालय में उसकी जमानत नहीं रोक पाई। गुरुवार को उसे जमानत मिल गई। मेस से पकड़े जाने के बाद से ही वह जेल में थी। सोनाली की जमानत को खारिज कराने के लिए सदरबाजार पुलिस ने अपना पक्ष दमदारी से नहीं रखा। कोर्ट में प्रभावी रूप से बताया ही नहीं कि उसके बाहर निकलने से पड़ताल प्रभावित हो सकती है। वह साक्ष्यों को भी प्रभावित कर सकती है। पुलिस ने सिर्फ इतनी दलील दी कि इटारसी में भी उसके खिलाफ केस है, जिसके चलते उससे पूछताछ की जाना है। जमानत नहीं दी जाए।

पुलिस की लिखी एफआईआर पर ही संदेह

वहीं सोनाली के वकील राम बजाड़ गुर्जर, धमेंद्र गुर्जर ने कोर्ट में कहा कि पुलिस ने जो एफआईआर लिखी है उस पर ही संदेह है। पुलिस ने सोनिया पर सीधे-सीधे कोई आरोप नहीं लगाया। उसने एडीजी अजय शर्मा का नाम लिया तो एडीजी को शिकायतकर्ता होना चाहिए था। सोनाली के साथ उसका प्रेमी कृष्णा भी जेल में था। पुुलिस ने उसका भी नाम एफआईआर में लिखा था। कोर्ट से दोनों को जमानत मिल गई।

सोनिया को तंत्र-मंत्र के लिए बुलाते थे अधिकरी

- सोनिया की मां कमला देवी ने बताया कि सोनिया उन्हें मंदिर के पास मिली थी। वह ट्रांसजेंडर नहीं है। वह शिव मंदिर के पास मिली थी, इसलिए हम उसे नागकन्या भी कहते थे। वह तंत्र-मंत्र क्रिया भी जानती थी। पुलिस अधिकारी भी इसी वजह से उसके संपर्क में आ गए थे। वह अपनी समस्याएं लेकर सोनिया के पास आते थे। वह तंत्र-मंत्र से उनकी परेशानी दूर करती थी। उसने किसी पुलिस अधिकारी का गलत नहीं किया। उसे जबरन पुलिस अधिकारी झूठे आरोपों में फंसा रहे हैं।

उम्रकैद, फांसी जैसा कोई अपराध नहीं
पुलिस ने सोनाली के खिलाफ उम्रकैद और फांसी की धाराएं भी एफआईआर में लगा दी थी। जमानत आदेश में कहा है कि जैसी धाराएं लगाई गई हैं वैसा अपराध ही नहीं दिख रहा है।

अब एफआईआर को भी कोर्ट में देगी चुनौती
सोनाली अब सदर बाजार और तेजाजी नगर थाने में दर्ज एफआईआर को भी चुनौती देगी। उधर सदर बाजार पुलिस ने अभी तक इस मामले में सोनाली के खिलाफ चालान पेश नहीं किया है।


एसपी रैंक के अफसर की गाड़ी लेकर शहरभर में घूमती थी
- पकड़े जाने से पहले सोनाली ने इंदौर में कई बार एसपी रैंक के अफसरों की गाड़ी का भी इस्तेमाल किया था। हाल ही में एसपी रैंक के अफसरों को नई गाड़ियां मिली हैं, लेकिन जो उनकी पुरानी एंबेसेडर कार थी वह डीआरपी लाइन में थी जिसे एक वरिष्ठ अधिकारी के कहने पर सोनाली के लिए उपलब्ध करवाया जा चुका है। इसी कार में बैठकर वह रौब जमाती थी। पुलिस पूछताछ में सोनाली ने बताया था कि मैस में कभी कोई किसी के आने पर आईडी कार्ड या अन्य जानकारी नहीं लेता था इसी का फायदा उसने उठाया था।

रिटायर्ड लोकायुक्त से मुलाकात का फायदा उठा पुलिस से बढ़ाया था मेलजोल
- इस शातिर युवती ने 2008 में रिटायर्ड लोकायुक्त डीजी कापदेव से पहली मुलाकात का फायदा उठाकर कई पुलिस अफसरों से मेलजोल बढ़ाया और गहरी दाेस्ती गांठ ली। एक अफसर के जरिए दूसरे से मिलते-मिलते उसकी पैठ पुलिस मुख्यालय तक हो गई। इससे उस पर किसी को शक नहीं हुआ।

- एडीजी की बहन बताकर ही उसकी मुलाकात सीएसपी ज्योति उमठ से हुई और एडीजी पवन श्रीवास्तव से संपर्क भी इसी झूठ से हुआ। मैस में रुकने के साथ वह रौब दिखाकर वाहन, गार्ड की सुिवधा भी लेने लगी। पोलोग्राउंड मैस में वह रिकॉर्ड के मुताबिक 10 साल में 13 बार रुकी थी।

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