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अयोध्या / कोर्ट का फैसला संतुलित, इसे सभी को आनंद भाव से स्वीकार्य करना चाहिए- पूर्व लोस स्पीकर



पूर्व लोस स्पीकर सुमित्रा महाजन। पूर्व लोस स्पीकर सुमित्रा महाजन।
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पूर्व लोस स्पीकर सुमित्रा महाजन।पूर्व लोस स्पीकर सुमित्रा महाजन।

  • सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया, केंद्र से तीन महीने में ट्रस्ट की रूपरेखा बनाने को कहा
  • जमीन : 2.77 एकड़ की विवादित भूमि केंद्र सरकार के पास रहेगी, वह मंदिर निर्माण के लिए उसे ट्रस्ट को सौंपेगी
  • हिंदू पक्ष : विवादित जमीन पर नियंत्रण का निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज, ट्रस्ट में उसे प्रतिनिधित्व मिलेगा

    मुस्लिम पक्ष : विवादित ढांचे पर शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज, सुन्नी वक्फ बोर्ड को नई मस्जिद के लिए 5 एकड़ की वैकल्पिक जमीन मिलेगी

Dainik Bhaskar

Nov 09, 2019, 12:26 PM IST

इंदौर. सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ ने शनिवार को अयोध्या केस पर फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 45 मिनट तक फैसला पढ़ा और कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए और इसकी योजना 3 महीने में तैयार की जाए। कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया और कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन आवंटित की जाए। फैसले के बाद पूर्व लोस स्पीकर और सांसद सुमित्रा महाजन ने कहा कि यह वैसा ही संतुलित निर्णय है, जैसे एक मां को उसके बेटे का अधिकार मिलने पर आनंद मिलता है वैसे ही यह फैसला है, सभी को शांत भाव से इसे स्वीकार्य करना चाहिए।

 

ताई ने कहा कि कोर्ट का जो निर्णय है उससे मेरा मातृत्व हृदय आज आनंद से प्रफुल्लित है। क्योंकि कोर्ट ने रामलला का अधिकार मान लिया है, यानि एक बच्चे का। यदि एक बच्चे को उसके जन्म का स्थान मिलता है, तो मां को आनंद मिलता है। कोर्ट ने एक संतुलित निर्णय दिया है, इसे हम सभी को संयम से संतुलित मन से इसे अंगीकार करना चाहिए। जैसा एक मां को आनंद होता है, वैसा ही आंनद आज सभी जनमानस को होना चाहिए। दूसरे पक्ष को कोर्ट ने जो जमीन देने की बात कही है वह पूरी तरह से सही है। देना ही चाहिए।

 

वहीं, सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह फैसला किसी के हार-जीत का नहीं है। यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है। हम सबको इसे मानना है। फैसला आने के पहले हमने सभी धर्माें के प्रमुखों से बात की थी। सभी ने फैसले को मान्य करने का कहा था। सभी धर्म के प्रतिनिधियों ने राजबाड़ा पर अहित्या माता के चरणों में शपथ लिया हम सभी शहर में शांति के साथ इस शहर को आगे बढ़ाएंगे। इंदौर की जनता ने भी इस फैसले को शांतिपूर्वक स्वीकार्य किया।

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