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जीएसटी का जिन्न / बार-बार रिटर्न से कर सलाहकार और व्यापारी परेशान, फिर करने लगे विरोध



Tax advisor and businessman troubled by repeated returns of GST
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Tax advisor and businessman troubled by repeated returns of GST

  • पंजीयन निरस्त करने के विभाग के नोटिस से भी है नाराजगी
  • वार्षिक रिटर्न 9 पेचीदा, भरने में लगेगा समय, पर अपलोड नहीं हुआ

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 01:17 AM IST

इंदौर.  जीएसटी को 15 माह हो गए, लेकिन इसकी लंबी प्रक्रिया कर सलाहकार, व्यापारी सभी निराश हैं। वहीं वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा व्यापारियों के पंजीयन निरस्ती की कार्रवाई से व्यापारियों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि कई पंजीयन तो विभाग ने जीएसटी एक्ट से बाहर जाकर रद्द किए हैं। हाल ही में जारी हुए जीएसटी के वार्षिक रिटर्न 9 को लेकर भी काफी रोष है। कर सलाहकार और व्यापारियों का कहना है कि यह इतना पेचीदा है इसे भरने में लंबा समय लगेगा, जबकि इसे अभी तक पोर्टल पर अपलोड ही नहीं किया गया है।
 

परेशानियां कई, लेकिन अपील के लिए अधिकारी पर्याप्त नहीं

पोर्टल धीमा : शुरुआत से ही जीएसटी पोर्टल से लोग परेशान हैं। रिटर्न की आखिरी तारीख पर इसका हैंग होना आम बात है। इससे पेनल्टी लग जाती है।
पंजीयन रद्द होना : रिटर्न-3 बी लगातार छह माह तक नहीं भरने पर पंजीयन निरस्त होता है, लेकिन अवैधानिक रूप से  कई व्यवसायियों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं।

 

हर माह रिटर्न : जीएसटी के अधिक रिटर्न को लेकर शुरू से ही विरोध रहा है। बाद में तीन रिटर्न खत्म कर जीएसटीआर 3 बी, जीएसटीआर वन लागू रहने दिया। लेकिन हर माह दो-दो रिटर्न, इसके बाद व्यापारियों को इनकमटैक्स रिटर्न भी देना होता है। अब वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट का लंबा-चौड़ा पेचीदा रिटर्न भी आ गया है। इससे कर सलाहकार और व्यापारी दोनों परेशान हैं।
 

अपील के लिए विभाग में अधिकारी नहीं : राज्य कर में मप्र में केवल तीन अपीलीय ज्वॉइंट कमिश्नर अधिकृत किए हैं। इन्हें पंजीयन अपील के साथ ही कई अन्य काम भी करने होते हैं। कम अधिकारी होने से इनमंे लंबा समय लग रहा है। प्रत्येक संभाग स्तर पर एक अपीलीय अधिकारी की नियुक्ति आवश्यक है।
 

लगातार  रिटर्न की समस्या बनी हुई है। कई बार तारीखें एक के बाद एक आती रहती हैं। वहीं अब पंजीयन भी निरस्त हो रहे हैं। इनकी भी अब अपील होंगी, वहीं अधिकारी हैं नहीं और पोर्टल भी हैंग होता है। - अश्विन लखोटिया, अध्यक्ष मप्र टैक्स लॉ बार एसोसिएशन

 

 

शुरू से ही व्यापारिक संगठन लंबी प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रहे थे। जीएसटी का कभी विरोध नहीं किया। लेकिन हालात ये हैं कि व्यापार से ज्यादा समय रिटर्न, ऑडिट में लगाना पड़ रहा है। इसमें व्यापारी और कर सलाहकार उलझ कर रह गए हैं। - सुशील सुरेका, महामंत्री अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

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