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हमारे कर्मों का फल हैं सुख-दु:ख : पं. शास्त्री

इंदौर| भगवान के शब्दकोष में सुख या दुख नाम का कोई शब्द है ही नहीं। सुख और दुख हमारे कर्मों का फल है। हम जैसे कर्म...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 03:36 AM IST
इंदौर| भगवान के शब्दकोष में सुख या दुख नाम का कोई शब्द है ही नहीं। सुख और दुख हमारे कर्मों का फल है। हम जैसे कर्म करेंगे, फल भी वैसे ही मिलेंगे। गंगा और अन्य नदियां तभी तक पूजनीय है, जब तक वे अपने किनारों की मर्यादा में बहती हैं। किनारे छोड़ने पर कोई भी उन्हें नहीं पूजता क्योंकि तब वही जीवनरेखा विनाश की बाढ़ लेकर आती है। उक्त विचार आचार्य पं. नारायण शास्त्री ने बड़ा गणपति, पीलियाखाल स्थित हंसदासमठ परिसर पर महंतश्री रामचरणदास महाराज के सान्निध्य में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में व्यक्त किए। बुधवार को परीक्षित मिलन की कथा होगी।