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अपनों के बीच अपनेपन को तरसते उन बच्चों की पीड़ा डांस में दिखाई जो जेनेटिक डिसऑर्डर के चलते उपेक्षित किए जाते हैं

वो कैसा पनीला मन होगा जिसमें किसी दैहिक कमी के कारण उपेक्षा सहते मनुष्यों की पीड़ा को नृत्य के ज़रिए अभिव्यक्त करने...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 03:51 AM IST
वो कैसा पनीला मन होगा जिसमें किसी दैहिक कमी के कारण उपेक्षा सहते मनुष्यों की पीड़ा को नृत्य के ज़रिए अभिव्यक्त करने का विचार आया…जिसने किसी लड़खड़ाते, उठने के लिए सहारा मांगते, इंसानों के बीच इंसानियत से पेश आने की गुहार लगाते किसी बच्चे के दर्द को अपने सीने में महसूस किया। अपनों के बीच अपनेपन को तरसते दिलों की यही टीस बड़ी संवदेनशीलता से व्यक्त की इन युवा कलाकारों ने। आईआईएम अथर्व फेस्ट का आखिरी दिन कुछ ऐसी ही संजीदा प्रस्तुतियों के नाम रहा।

आईईएचई भोपाल की टीम ने वामन अवतार और राजा बलि का प्रसंग प्रस्तुत किया।

कई शहरों से आए स्टूडेंट्स ने डांस परफॉर्मेंसेस दीं। विनर रही आईईएचई की टीम स्वराज जिसने जेनेटिक डिसऑर्डर जैसे विषय डांस में दिखाया। उन्होंने बताया कि अनुवांशिक ख़ामियों वाले बच्चों को जीवन में क्या-क्या सहना पड़ता है। उनके हिस्से में में उपेक्षा, घृणा या दया ही आती है। एक्ट में बताया कि उनके साथ कैसा नर्मी से पेश आना चाहिए। रनरअप टीम आईईएचई भोपाल ने वामन अवतार और इंद्र वाले प्रसंग को डांस में दिखाया।

सोलो-डुएट कमज़ोर, ग्रुप डांस बेहतर रहे

पिछले 2 सालों से अथर्व फेस्ट की डांस प्रतियोगिता की विजेता मेरी ही टीम रही है, इसलिए मैं जानता हूं कि इसका लेवल कितना हाई है। इस बार डुएट और सोलो ने मुझे इम्प्रेस नहीं किया। ग्रुप डांस ने अथर्व फेस्ट के लेवल को बरकरार रखने की अच्छी कोशिश की। 

- विपिन शर्मा, डांस कॉम्पीटिशन के जज