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विडंबना : सात दिन तक पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने समझाया, तब जाकर निकल सका दलित दूल्हे का बाना

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 11:39 AM IST

बलाई समाज के लोगों ने गड़बड़ी होने की आशंका के चलते 10 दिन पहले पुलिस को दे दी थी सूचना।

The police explained, then the dalit Process could come out

इंदौर। जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की तमाम कोशिशाें के मध्य कभी-कभी कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ जाती है जो हमें शर्मसार कर देती है। मप्र की आैद्योिगक राजधानी इंदौर के पास देपालपुर के शहावदा गांव में एक दूल्हे को मंदिर में प्रवेश और बाना निकालने से इसलिए राेका गया क्योंकि वह दलित वर्ग का था। इस मामले ने दस दिन पहले उस समय तूल पकड़ लिया जब गांव के बलाई समाज के लोगों ने प्रशासन को एक ज्ञापन देकर कहा कि उन्हें आशंका है कि गांव के कलोता वर्ग के लोग मंदिर में प्रवेश नहीं करने देंगे और गांव में दूल्हे का बाना भी नहीं निकालने देंगे। इसके बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने एक सप्ताह तक गांव के लोगों को समझाया तब जाकर रविवार को दूल्हे का बाना निकल पाया।

  • दलित वर्ग के साथ भेदभाव होने के संबंध में ज्ञापन मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया और उन्होंने गांव में दोनों समाज के लोगों की बैठक बुलाई और समझाया कि मंदिर में किसी को भी प्रवेश से नहीं रोका जा सकता और न ही दूल्हे के बाने पर रोक लगाई जा सकती है।

  • कलोता वर्ग ने प्रशासन को ज्ञापन देकर बताया कि मंदिर में प्रवेश को लेकर किसी को नहीं रोका है, बस यहां बोर्ड लगा है कि शराब पीकर मंदिर में आना मना है और कोई भी चाहे वह किसी भी समाज का हो मूर्ति के पास नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम किसी को बाना निकालने से नहीं रोक रहे हैं।


बाने में सादी वर्दी में पुलिस भी शामिल थी
देपालपुर एसडीएम अदिति गर्ग ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद रविवार को दोपहर में बाना निकला और इस दौरान पुलिस ने सादी वर्दी में नजर रखी, वहीं प्रशासन की ओर से प्रतिनिधि भी गांव में रहे, लेकिन किसी तरह की विवाद की स्थिति नहीं बनी। इसके लिए थाना प्रभारी व नायब तहसीलदार जे सोलंकी व अन्य ने लगातार गांव वालों से बात की थी।

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