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  • These police officers had become one by themselves while searching for a relationship for each other

वेलेनटाइन डे / एक-दूसरे के लिए रिश्ता खोजते-खोजते खुद एक हो गए थे ये पुलिस अफसर

एसपी दिलीप सोनी बताते हैं- उन्हें गाने का शाैंक हैं। गायकी विरासत में मिली है, बेटी काव्या इसे आगे बढ़ा रही है। दादा रघुवर दायल शास्त्रीय गायक थे। एसपी दिलीप सोनी बताते हैं- उन्हें गाने का शाैंक हैं। गायकी विरासत में मिली है, बेटी काव्या इसे आगे बढ़ा रही है। दादा रघुवर दायल शास्त्रीय गायक थे।
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एसपी दिलीप सोनी बताते हैं- उन्हें गाने का शाैंक हैं। गायकी विरासत में मिली है, बेटी काव्या इसे आगे बढ़ा रही है। दादा रघुवर दायल शास्त्रीय गायक थे।एसपी दिलीप सोनी बताते हैं- उन्हें गाने का शाैंक हैं। गायकी विरासत में मिली है, बेटी काव्या इसे आगे बढ़ा रही है। दादा रघुवर दायल शास्त्रीय गायक थे।

  • एएसपी मनीषा पाठक 1998 और एसपी नारकोटिक्स दिलीप सोनी 1997 के बैच के अफसर
  • दोनों ने 11 मई 2003 को परिवार की रजामंदी से इंटर कास्ट मैरिज कर ली थी

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 06:54 AM IST

इंदौर (राजीव तिवारी). वेलेंटाइन डे यानी प्यार का दिन... 14 फरवरी को हर प्यार करने वाला इसे अपने अंदाज में मनाता है। इस दिन कुछ नए रिश्ते जुड़ते हैं तो कुछ की पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। वैलेनटाइन डे पर दैनिक भास्कर दो ऐसे पुलिस अधिकारियों से मिलवाने जा रहा है, जिन्होंने एक-दूसरे की शादी कराने के लिए शिद्दत से लड़के-लड़कियों की तलाश की, लेकिन उन्हें क्या पता था कि ईश्वर ने तो ऊपर से उन दोनों की जोड़ी बनाकर भेजी है। हम बात कर रहे हैं एसपी नारकोटिक्स दिलीप सोनी और एडिशनल एसपी मनीषा पाठक सोनी की। दोनों ने परिवार की रजामंदी से 11 मई 2003 को इंटर कास्ट मैरिज की। यह एक ऐसी जोड़ी है, जिसे पुलिसिंग के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य के लिए प्रदेश के केएफी रुस्तम अवार्ड से नवाजा गया। इन्हें गिफ्ट में एक-एक पिस्टल प्रदान की गई है।

एडिशनल एसपी मनीषा पाठक कहती हैं- जोड़ी तो ऊपर वाला ही बनाता है। हमारे रिश्ते में भी कुछ ऐसा ही था। पीएससी पास करने के बाद हम दोनों की पहली मुलाकात सागर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर में हुई। मैं 1998 बैच की थी और वो दिलीप सोनी 1997 बैच के थे। यहां पर फीडबैक सेशन के दौरान हम दोनों की जान-पहचान हुई। मैं टीकमगढ़ से थी, जबकि वे ग्वालियर से ताल्लुक रखते हैं। इसके बाद हमारी दूसरी मुलाकात भोपाल में शहीद दिवस के अवसर पर हुई। मैं यदि ये कहूं कि ऊपर वाला ही सब करता है। गलत नहीं होगा... शायद हम दोनों को वो एक करना चाहता था, इसीलिए हमें बार-बार मिलवा रहा था।

दिलीप अपनी पहली ट्रेनिंग जहां सेकंड बटालियन ग्वालियर में कर रहे थे। वहीं, मुझे ट्रेनिंग के लिए सतना जाना था। कहते हैं ना होनी को कोई नहीं टाल सकता, हमारे साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा था। सतना से कुछ दिन बाद ही उन्हें भी ट्रेनिंग के लिए ग्वालियर की सेकंड बटालियन में भेज दिया गया। यहां फिर से हम दोनों की मुलाकात हो गई। सुमन गुर्जर के जरिए भगवान ने मुझे दिलीप जी के घर तक पहुंचा दिया। ग्वालियर में ट्रेनिंग के दौरान मेरी दोस्त सुमन जो कि दिलीप की मुंह बोली बहन थी, उसके साथ मैं कई बार दिलीप के घर गई। अकेले रहने के दौरान कई बार सुमन घर चलकर खाना खाने का कहती थी। कभी वह घर पर लड्डू बनने की बात कहती तो कभी इडली खिलाने की। सुमन के साथ ही मेरा दिलीप के घर आना-जाना बढ़ गया था।

वो मेरे लिए लड़का और मैं उनके लिए लड़की खोज रहे थे
वे बताती हैं कि दिलीप की मम्मी से उनकी अच्छी बनती थी। जब भी मैं उनके घर जाती तो मां कहतीं दिलीप के लिए कोई अच्छी लड़की बताओ, शादी करनी है। इस पर मैं कहती कि मैं खोज रही हूं, जल्द ही मिल जाएगी। इस दौरान दिलीप भी मेरे लिए लड़का खोजने लगे। हम दोनों ने एक-दूसरे को कई लड़के और लड़कियां दिखाई, लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था।

जब उन्होंने कहा- इंटर कास्ट मैरिज करोगी, तो मैं चौंकी
ग्वालियर में ट्रेनिंग के मैं भोपाल पीएचक्यू पहुंच गई, जबकि दिलीप बैतूल चले गए। 8 महीने बाद फिर से हम पीएचक्यू में मिले और उसके बाद यहां काफी समय तक रहे। इस दौरान लगातार शादी की चर्चा चलती रही। एक दिन दिलीप जी जब मुझसे मिले तो उन्होंने पूछा क्या तुम अदर कास्ट मैरिज करोगी। इस पर मैं थोड़ा चौंकी, फिर मुझे लगा कि शायद दिलीप जी ने मेरे लिए कोई अदर कास्ट लड़का चुना होगा, इसलिए पूछ रहे हैं। इस पर मैंने कहा कि मैं परिवार से पूछकर ही इसका जवाब दे पाऊंगी। परिवार की हामी के बाद जब मैंने उन्हें बताया तो पता चला कि दिलीप हम दोनों की शादी की बात कह रहे हैं। इसके बाद उन्होंने मेरे और अपने परिवार से बात की और उसकी हामी के बाद हम दोनों ने 11 मई 2003 को शादी के बंधन में बंध गए।

मेरे माता-पिता और भाई को करते हैं बहुत प्यार
दिलीप के परिवार में माता-पिता के साथ बड़े भाई पीके सोनी जो कि ज्वांइट कमिश्नर उप्र वहीं, छोटे भाई विष्णु सोनी प्रोफेसर हैं। वहीं मेरे पिता इंजीनियर थे। इसके अलावा मेरे दो छोटे भाई हैं। बड़ा दिगंत पाठक जो डॉक्टर है, जबकि छोटा डॉ. कल्पान्त पाठक जो इंजीनियर है। इसके अलावा मेरी 13 साल की बेटी काव्या सोनी है, जो कि अपने पापा की तरह ही अच्छी सिंगर है। मनीषा बताती हैं कि मुझे दिलीप की बससे अच्छी एक यह बात भी लगती है कि वो मेरे परिवार को अपनों जैसा प्यार देते हैं। मेरे माता-पिता लंबे समय से मेरे साथ ही रह रहे हैं। सभी बहुत प्यार देते हैं।

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