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चोरल में हजार पेड़ और हुए बर्बाद

चोरल में पेड़ों की अवैध कटाई की जांच कर रहे दल के एक डिप्टी रेंजर का मानना है कि पूरी रेंज में एक हजार से ज्यादा ऐसे...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 03:30 AM IST
चोरल में पेड़ों की अवैध कटाई की जांच कर रहे दल के एक डिप्टी रेंजर का मानना है कि पूरी रेंज में एक हजार से ज्यादा ऐसे पेड़ और हैं जिनका सूखकर गिरना तय है। कारण- इन पेड़ों को काटने के लिए घावटी (कट) लगाई गई थी। इन पेड़ों को किसी सूरत में बचाया नहीं जा सकता। हैरत की बात यह है कि पिछले दिनों वनकर्मियों की हड़ताल के दौरान एसडीओ संदीप गौतम ने चोरल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई के प्रकरण बनाए थे। लकड़ी जब्त कर डिपो पहुंचाई थी। इस कार्रवाई के तीन महीने बाद ही फिर से भारी मात्रा में जंगल पर कुल्हाड़ी चली।

वन कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष भीमसिंह कुशवाह एवं संभागीय अध्यक्ष अंतरसिंह बैस ने भी छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई होने पर मोर्चा खोल दिया है। संघ ने इस मामले में डिविजन के बड़े अफसरों पर भी निलंबन और वसूली की कार्रवाई करने की मांग की है। अवैध कटाई में तिल्लौर क्षेत्र के एक डिप्टी रेंजर की भी मिलीभगत के संकेत अफसरों को मिले हैं। यह चोरल में गम्मू नामक व्यक्ति के साथ मिलकर लकड़ी कटवाने और उसे बड़वाह, सनावद खरगोन पहुंचाने का काम करता था।

घावटी (कट) (घेरे में) लगाने के बाद पेड़ पूरी तरह सूख गए हैं। इन्हें बचाना मुश्किल है।

रेंजर ने दिए हैं प्रमाण

महू रेंजर चंद्रशेखर श्रोत्रिय ने रिपोर्ट में बड़ी संख्या में घावटी लगे पेड़ों का उल्लेख किया है। पेड़ों को सुखाकर गिराने के लिए इतनी गहरी घावटी लगाई है कि इनका सूखकर गिरना तय है। इस हिसाब से अवैध कटाई का आंकड़ा एक हजार और बढ़ जाएगा।

दो माह में हुआ नुकसान

एसडीओ ने रिपोर्ट में कटाई छह महीने पहले होना बताई है, जबकि इन पेड़ों की गणना दो महीने पहले एसडीओ संदीप गौतम ने कर ली थी। वनकर्मियों की हड़ताल के दौरान जंगल काटा गया था। गौतम को जांच कर प्रकरण बनाने भेजा था। उस वक्त ही उन्होंने केस बना लिए थे। ताजा मामले में हुई अवैध कटाई को छुपाने के लिए एक कमेटी ने कटे पेड़ों को पुराना बता दिया।