मप्र / हजार साल से भी ज्यादा पुराने मंदिर में नंदी के मुख्य से निकले प्राकृतिक जल, शिवलिंग का हुआ अभिषेक

गौमुख से निकले जल से हो रहा है शिव का अभिषेक। गौमुख से निकले जल से हो रहा है शिव का अभिषेक।
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गौमुख से निकले जल से हो रहा है शिव का अभिषेक।गौमुख से निकले जल से हो रहा है शिव का अभिषेक।

  • एनएच 59 बैतूल मार्ग पर देवगुराड़िया पहाड़ी पर भगवान शिव का अद्भुत मंदिर है
  • मान्यता है, गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी, जिसके बाद यहां शिव प्रकट हुए थे और शिवलिंग के रूप में यहीं रह गए
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दैनिक भास्कर

Aug 29, 2019, 12:33 PM IST

इंदौर. बायपास से बैतूल मार्ग पर देवगुराडिय़ा पहाड़ी पर स्थित शिव मंदिर अपनी प्राचीनता के साथ ही अपनी मान्यताओं के लिए विख्यात है। भगवान शिव के एक हजार साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर में बारिश के मौसम में प्राकृतिक जल से भोलनाथ का अभिषेक होता है, लेकिन अच्छी बारिश नहीं होने से तीन साल से सावन-भादौ के महीने में ऐसा नहीं हो पा रहा था। इस वर्ष अगस्त में हुई अच्छी बारिश से नंदी के मुख से जलधारा बह निकली है, जो सीधे शिवलिंग पर गिर रही है। वहीं मंदिर के दरवाजे के बाहर बना अमृतकुंड भी लबालब हो गया है।

 

शिवलिंग पर गिर रहा है प्राकृतिक जल।

 

एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना
इंदौर बायपास से एनएच 59 बैतूल मार्ग पर देवगुराड़िया पहाड़ी पर भगवान शिव का अद्भुत मंदिर है। यह एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। माना जाता है, देवगुराड़िया शिव मंदिर और शिवलिंग पूर्व समय में जमीन में दब गया था। बाद में ऊपर से एक मंदिर बनवा दिया गया था।

 

गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी
मान्यता है, गरुड़ ने यहां कठिन तपस्या की थी, जिसके बाद यहां शिव प्रकट हुए थे और शिवलिंग के रूप में यहीं रह गए। होल्कर रियासत की देवी अहिल्या शिव भक्त थीं, उन्होंने 18वीं सदी में इस प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

 

मंदिर के बाहर मौजूद तलाब में पानी भरा।

 

पहाड़ी जल से शिवजी का प्राकृतिक जलाभिषेक
हजार साल पुराने इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां हर साल सावन में पहाड़ी जल से शिवजी का प्राकृतिक जलाभिषेक होता है। शिवलिंग के ऊपर की तरफ बने नंदी के मुख से सावन-भादौ में प्राकृतिक जल निकलता है, जो सीधे शिवलिंग पर गिरता है और मंदिर के दरवाजे के बाहर बने अमृतकुंड में भर जाता है। यह सिलसिला जब मंदिर बना था तब से चल रहा है।

 

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सोलह पीढ़ियों से मंदिर की पूजा
पुरी परिवार यहां सोलह पीढ़ियों से मंदिर की पूजा कर रहा है। अब सत्रहवीं पीढ़ी यह दायित्व संभालने के लिए तैयार है। यहां हर साल शिवरात्रि पर भव्य मेला लगता है। मंदिर में पांच कुंड हैं, जिनमें दो कुंडों में लोग स्नान करते हैं। इनमें हमेशा पानी रहता है। मान्यता है, इनका पानी कभी नहीं सूखता है और पूरे गांव की प्यास इसी कुंड से बुझती है।

 

नाग-नागिन भक्तों को दर्शन देते हैं
मंदिर में भगवान शिव के गण माना जाने वाला नाग का जोड़ा भी रहता है। कभी कुंड में तो कभी शिवालय में ये नाग-नागिन भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है, जिस भक्त को इनके दर्शन होते हैं, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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