अपराध / इंदौर व आसपास के जिलों से वाहन चोरी करने वाली गैंग को पुलिस ने पकड़ा, 15 बाइक जब्त

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 08:03 PM IST


Two criminals arrested for stealing vehicles by indore police
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Two criminals arrested for stealing vehicles by indore police
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  • इंदौर पुलिस द्वारा धार के टाण्डा व बाग में दी गई दबिश के दौरान, कई संदिग्ध वाहन मिले
  • चुराए गए वाहनों की नंबर प्लेट बदलकर 5 से 10 हजार रुपए में बेच देते थे

इंदौर. इंदौर पुलिस द्वारा धार के टाण्डा व बाग में रविवार को दी गई दबिश के दौरान वाहन चोरों की एक गैंग को पकड़ने में सफलता मिली है। अपराधियों के पास से चोरी की 15 बाइक बरामद की गई है। आरोपी चुराए गए वाहनों की नंबर प्लेट बदलकर 5 से 10 हजार रुपए में बेच देते थे।

  कनाड़िया पुलिस ने बताया कि पिछले दिनों चोरी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। धार जिले के बाग व टाण्डा क्षेत्र के रहने वाले इन आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि बाग व टाण्डा के रहने वाले अन्य आरोपियों ने भी इंदौर में काफी सारी चोरियों को अंजाम दिया है। अधिकांश आरोपी इंदौर में रहकर चोरी की वारदात करते है।

 

इस जानकारी के बाद पुलिस ने खजराना थाना क्षेत्र में दबिश देकर वाहन चोर सुखलिया उर्फ अनिल पिता वाघु भील (20) निवासी बाग जिला धार को गिरफ्तार किया। आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस धार के टाण्डा और बाग क्षेत्र में शनिवार देर रात दबिश दी। पुलिस के लगभग 100 जवानों द्वारा अंजाम दी गई इस कार्रवाई के दौरान संदेही अश्विन उर्फ आशु पिता केसर सिंह निवासी ग्राम बेकल्या थाना बाग जिला धार, सुनील पिता रेवसिंह निवासी ग्राम बेक्लया धार को गिरफ्तार किया गया।


आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे वाहन चुराने के लिए इंदौर आते थे। वे पॉश कॉलोनियों के आसपास अपना डेरा जमा देते थे और मौका पाकर गाड़ियो के लॉक तोड़कर उसी वाहन से गांव निकल जाते थे। गांव पहुंचने पर ये गाड़ियों की नंबर प्लेट बदलकर, बहुत ही कम कीमत में वाहन बेच देते थे। 


पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से जब्त वाहनों में कई गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट पाई गई। आरोपियो से अब तक कुल 15 वाहन बरामद हो गए है, जबकि शेष मिले 24 वाहनों का सत्यापन किया जा रहा है। 


नहीं देते थे कागजात
वाहन चोर देवास, इन्दौर, भोपाल,उज्जैन, खरगोन, खंडवा से गाड़ी चुराते है और चैकिंग में चकमा देने के लिए जिला धार का एमपी-11 नंबर लिख लेते है। ऐसा करने से स्थानीय पुलिस लोकल रजिस्ट्रेशन नंबर को बारीकी से चेक नही कर पाती। इससे चैकिंग के दौरान मौके पर कागज नही होने व अन्य बहाना बना कर वे बच जाते थे। चोरी की इन गाड़ियों को आरोपी 5 से 10 हजार रुपए कीमत पर ग्रामीण क्षेत्र में बेच देते थे और फायनेंस की गाड़िया बताकर कागजात आदि नहीं देते थे।
 

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