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अक्षत अपहरण मामला / सुबह 6 बजे इंदौर पहुंचा अपहृत बच्चा अक्षत, पुलिस ने किया परिजनों के सुपुर्द



URL: indore news akshat kidnapping case child reached city at 6am police handed over to family
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  • सोमवार को सागर जिले में मिला था बच्चा, पुलिस की नाकाबंदी के कारण बदमाश झांसी हाईवे पर छोड़कर भाग गए थे
  • रविवार को घर के पास से बदमाशों ने कर लिया था अपहरण, पिता से मांगी थी 10 लाख की फिरोती

Feb 12, 2019, 12:49 PM IST

इंदौर. प्राइम सिटी कॉलोनी से रविवार को अगवा हुए किराना व्यापारी रोहित जैन के 6 साल के बेटे अक्षत को लेकर मंगलवार सुबह पुलिस की टीम इंदौर पहुंची। इंदौर पहुंचने के बाद बच्चे को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। मामले में अन्य आराेपियों की तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है।


रविवार 10 फरवरी को प्राइम सिटी कॉलोनी से बाइक सवार दो बदमाशों ने बच्चे का अपहरण कर लिया था। अपहरण करने के कुछ ही देर बाद आरोपियों ने बच्चे के पिता को कॉल कर 10 लाख रुपए की फिरोती मांगी थी। पुलिस ने आरोपियों के नंबर ट्रेस किए तो वह उत्तरप्रदेश के निकले। इसके बाद पुलिस ने योजना तैयार कर मप्र और उत्तरप्रदेश की सीमा पर नाकाबंदी कर दी। पुलिस की नाकाबंदी से घबराकर सोमवार शाम बदमाश अक्षत को इंदौर से करीब 400 किमी दूर सागर जिले के बरोदिया गांव के नाके पर छोड़ भाग गए। 

 

भूख लगी है...
अक्षत के पिता और अन्य परिजन रात भर से थाने में थे और बच्चे का इंतजार कर रहे थे। मंगलवार सुबह पुलिस का दल अक्षत को लेकर इंदौर पहुंचा। पिता को देखते ही अक्षत उनसे लिपट गया, बेटे को प्यार करते हुए पिता व अन्य परिजनों की आंख से आंसू बह निकले। बच्चे ने अपनी मां के बारे में पूछा तो पिता ने कहा कि वह घर पर उसका इंतजार कर रही है। पुलिस ने परिजनों को अक्षत को अपने साथ ले जाने की इजाजत दी। घर पहुंचते ही अक्षत मां से लिपट गया और कहा कि मुझे भूख लगी है। अक्षत ने परिजनों को बताया कि उसने पिछले डेढ़ दिन से खाना नहीं खाया है। 

 

दादा की फैक्ट्री में काम करता है मुख्य आरोपी
षड्यंत्र का मुख्य आरोपी संतोष विश्वकर्मा है, जो अक्षत के दादा के साथ फैक्ट्री में काम करता है। पुलिस के मुताबिक संतोष का अक्षत के घर आना-जाना था। उसने ललितपुर के अपने पांच साथियों की मदद से इस वारदात को अंजाम दिया। संतोष के अलावा नवाब, हसीन, लोकेश और अंकित को टीकमगढ़ पुलिस की मदद से ललितपुर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस को पहला सुराग व्यापारी के मोबाइल पर आए 10 लाख की फिरौती के फोन से ही मिला।


10 घंटे में पुलिस ने इस नंबर के आधार पर यूपी के ललितपुर के पास मेहरूनी गांव के रहने वाले नीलेश पिता वीरन की पहचान की। यहां निलेश को हिरासत में लिया तो उसकी काल डिटेल में अमित और संतोष नाम के युवकों के संपर्क मिले। इसमें संतोष की लोकेशन इंदौर की आई।

 

वहीं ये भी पता लगा कि जिस नंबर से फिरौती आई थी वह 22 जनवरी और 1 फरवरी को बाणगंगा इलाके में चालू था। इस आधार पर ललितपुर की लिंक पुख्ता हुई और टीकमगढ़ एसपी कुमार प्रतीक की मदद से पांच आरोपी हिरासत में लिए। इसके अलावा इंदौर पुलिस ने संतोष व उसके संपर्क के पांच ओर संदेहियों को हिरासत में लेकर पुरे अपहरण कांड से पर्दाफाश कर दिया।

 
एसपी अवधेश गोस्वामी ने बताया कि पूरा षड्यंत्र आरोपी संतोष ने रचा था। संतोष अपहृत बच्चे के दादा सुरेंद्र के साथ सांवेर रोड की एक फैक्ट्री में काम करता था। इस दौरान उसका घर आना-जाना था। ‌संतोष के घर तलाशी में चोरी का एक मोबाइल व अन्य वस्तुएं भी मिली है। संतोष ने रुपयों की लालच में साथियों से अपहरण की बात कबूली है। संतोष भी मेहरुनी गांव का रहने वाला है तीन साल पहले सांवेर रोड पर नौकरी के लिए एक फैक्ट्री में लगा था।


लड़की बन इंदौर पुलिस आरोपी को ट्रैक किया

आरोपियों की पहचान पुख्ता करने के बाद उन तक पहुंचने के लिए पुलिस ने विशेष प्लान बनाया। पुलिसकर्मियों ने लड़की बन एक आरोपी से बातचीत की और उसे जाल में फंसाकर पकड़ लिया। उसके जरिये पुलिस चार अन्य आरोपियों तक पहुंच गई। यह खबर बच्चे को ललितपुर ले जा रहे अंकित व लोकेश को लगी तो वे उसे बरोदिया चौकी के पास छोड़ गए।

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